The last Ring - 1 in Hindi Horror Stories by Deepti Gurjar books and stories PDF | आखरी घंटी - 1

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आखरी घंटी - 1


पहाड़ियों की चोटी पर स्थित उस विशाल और जर्जर हवेली को लोग 'चीखती हवेली' कहते थे। लोगों का मानना था कि रात के सन्नाटे में वहां से सिसकियों और फोन की घंटी बजने की आवाजें आती हैं, जबकि उस हवेली में दशकों से कोई नहीं रहता था। आर्यन, जो एक निडर खोजी लेखक था, इस राज से पर्दा उठाने वहां पहुँच गया।

चीखती हवेली को अपना नया शिकार मिल गया है।"

शहर के शोर से दूर, आर्यन ने पहाड़ियों के बीच एक पुराना बंगला किराए पर लिया था। वह एक लेखक था और उसे शांति चाहिए थी। लेकिन उस बंगले की शांति में कुछ अजीब था—एक ऐसी खामोश फुसफुसाहट, जो कानों में नहीं, सीधे दिमाग में उतरती थी।


बंगले के पिछले हिस्से में एक पुराना टेलीफोन लगा था, जो दशकों से बंद पड़ा था। पहले ही दिन मकान मालिक ने चेतावनी दी थी: "रात 12:00 बजे के बाद अगर फोन की घंटी बजे, तो उठाना मत।"
आर्यन हंसा। उसने सोचा यह गांव वालों का अंधविश्वास है।

पहली रात

रात के ठीक 12:05 बजे। घर में सन्नाटा था, सिर्फ उसकी टाइपराइटर की 'टिक-टिक' गूँज रही थी। अचानक, पूरे घर की लाइट चली गई। और तभी—'ट्रिन... ट्रिन...'

वह पुराना, धूल से भरा फोन बज रहा था। आर्यन जम गया। उसने खुद को समझाया कि शायद तारों में कोई शॉर्ट-सर्किट होगा। उसने फोन नहीं उठाया।

दूसरी रात

अगली रात फिर वही हुआ। 12:05 बजे। फोन की घंटी इस बार पहले से ज्यादा तेज और करकश थी। आर्यन की जिज्ञासा उसके डर पर भारी पड़ गई। उसने अंधेरे में टटोलते हुए रिसीवर उठा लिया।

उधर से कोई आवाज नहीं आई। बस एक भारी सांस लेने की आवाज थी।

"हेलो?" आर्यन ने कांपती आवाज में कहा।

दूसरी तरफ से एक धीमी, फटी हुई आवाज आई—

"आधा रास्ता तय हो गया है... क्या तुम तैयार हो?"

लाइन कट गई। आर्यन को पसीने छूटने लगे। उसने देखा कि फोन का तार तो दीवार से जुड़ा ही नहीं था! वह तार सालों पहले काटा जा चुका था।

तीसरी रात: आखिरी बुलावा

आर्यन ने तय किया कि वह आज रात यह बंगला छोड़ देगा। उसने अपना सामान बांधा, लेकिन जैसे ही वह दरवाजे की तरफ बढ़ा, घड़ी ने 12 बजा दिए। अचानक दरवाजे खुद-ब-खुद बंद हो गए।

फोन फिर से बजा। इस बार वह तब तक बजता रहा जब तक आर्यन ने उसे उठाया नहीं। जैसे ही उसने रिसीवर कान से लगाया, उसके पीछे की दीवार पर एक ठंडी परछाई उभरी।

आवाज आई: "मैं तुम्हारे पीछे खड़ा हूँ।"

आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा, वहां कोई नहीं था। लेकिन जब उसकी नजर खिड़की के कांच पर पड़ी, तो उसकी चीख निकल गई। कांच के परावर्तन (reflection) में, उसके ठीक पीछे एक सफेद लिबास वाली आकृति खड़ी थी, जिसके चेहरे की जगह सिर्फ मांस का लोथड़ा था।

अगले दिन सुबह, बंगला बाहर से बंद था। कमरे के अंदर टाइपराइटर पर एक आखिरी पन्ना छपा हुआ था: "उसने फोन उठा लिया। अब अगली बारी तुम्हारी है।"

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Kya me isa kahani ka chapter 2 bhi leka aau comment karge bataya ✨🙏

लेखक: दिप्ती गुर्जर