Khamosh jindagi ke bolate jajbat - 20 in Hindi Love Stories by Babul haq ansari books and stories PDF | खामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात - 20

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खामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात - 20

"ख़ामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात"
भाग 20: “मौत के साए से वापसी… और आख़िरी सबूत”
रचना : बाबुल हक़ अंसारी
पिछले खंड से…
“अब वो वहाँ है… जहाँ तुम्हारी पहुँच नहीं।”
और फिर गूँजी वो आवाज़… जिसने सब कुछ थाम दिया।
 गोली… और रहस्य
कमरे के अंदर धुआँ भर गया था।
नकाबपोशों ने चारों तरफ़ देखा —
फर्श पर खून के छींटे थे… लेकिन शेखर दत्त वहाँ नहीं थे।
एक गुंडा चिल्लाया —
“भाग नहीं सकता वो बूढ़ा! ढूंढो उसे!”
लेकिन उन्हें सिर्फ़ टूटी कुर्सियाँ, बिखरे काग़ज़… और खाली खिड़की मिली।
दरअसल…
गोली चलने से पहले ही शेखर दत्त ने खिड़की से छलांग लगा दी थी।
उनका कंधा ज़ख्मी हुआ… लेकिन वो बच गए।
  छुपा हुआ सच
रात के अंधेरे में, शहर के एक पुराने गोदाम में —
अनया, आर्या और नीरव सांसें थामे बैठे थे।
तभी दरवाज़ा धीरे से खुला…
“डरो मत… मैं हूँ।”
तीनों ने पलटकर देखा —
शेखर दत्त!
अनया दौड़कर उनसे लिपट गई —
“आप ज़िंदा हैं…!”
शेखर ने मुस्कुराकर कहा —
“सच इतनी आसानी से नहीं मरता, बेटी।”
फिर उन्होंने अपने बैग से एक छोटा पेन-ड्राइव निकाला।
“डायरी तो बस शुरुआत थी…
असली सबूत इसमें है।”
  वीडियो का सच
नीरव ने लैपटॉप खोला।
पेन-ड्राइव लगाई गई।
स्क्रीन पर वीडियो चला…
धुंधली रिकॉर्डिंग में एक कमरा दिखा —
जहाँ मंत्री कैलाश पांडे और कुछ बड़े अधिकारी बैठे थे।
आवाज़ आई —
“रघुवीर ज़्यादा बोलने लगा है…
अगर ये मंच पर सच बोल गया, तो हम सब खत्म हो जाएँगे।”
दूसरी आवाज़ —
“तो फिर… एक्सीडेंट करा दो।”
वीडियो अचानक खत्म हो गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
  अनया का विस्फोट
अनया की आँखों से आँसू नहीं… आग निकल रही थी।
“तो ये है सच…
मेरे पापा को मारा गया… साज़िश करके…”
उसने मुट्ठी भींच ली —
“अब ये वीडियो पूरे शहर में जाएगा।
अब कोई नहीं बचेगा।”
  आख़िरी योजना
नीरव ने गहरी आवाज़ में कहा —
“हमें सीधा हमला नहीं करना…
हमें ऐसा वार करना है कि पूरा देश देखे।”
आर्या ने पूछा —
“कैसे?”
नीरव बोला —
“कल शहर का सबसे बड़ा जनसभा है…
जहाँ खुद कैलाश पांडे भाषण देगा।”
अनया की आँखों में चमक आई —
“और उसी मंच पर… उसका सच उजागर होगा।”
शेखर दत्त ने सिर हिलाया —
“यही आख़िरी मौका है…
या तो सच जीत जाएगा… या हमेशा के लिए दब जाएगा।”
  तूफ़ान से पहले की रात
रात गहरी हो चुकी थी।
चारों एक ही छत के नीचे बैठे थे…
लेकिन किसी की आँखों में नींद नहीं थी।
आर्या ने धीरे से नीरव का हाथ पकड़ा —
“अगर कल कुछ हो गया तो…?”
नीरव मुस्कुराया —
“तो कम से कम ये सुकून रहेगा…
कि हम सच के लिए लड़े थे।”
अनया खिड़की के पास खड़ी थी —
आसमान की ओर देखते हुए।p
“पापा…
कल आपका इंसाफ़ होगा।”
(जारी रहेगा… खंड 21 में)
अगले खंड में आएगा:  जनसभा में बड़ा धमाका — सच सबके सामने मंत्री कैलाश पांडे की असली गिरफ़्तारी या पलटवार
 एक ऐसा बलिदान… जो कहानी की दिशा हमेशा के लिए बदल देगा

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"ख़ामोश ज़िंदगी के बोलते जज़्बात" – पाठकों के लिए एक संदेश
सत्य की लड़ाई अब अपने अंतिम और सबसे खतरनाक पड़ाव पर है! शेखर दत्त की वापसी और उस पेन-ड्राइव ने साज़िश की परतों को उधेड़ दिया है। क्या अनया अपने पिता के हत्यारों को सरेआम बेनकाब कर पाएगी? अगले खंड में होने वाली 'महा-जनसभा' केवल एक भाषण नहीं, बल्कि न्याय का रणक्षेत्र होगी।
आपसे एक सवाल:
क्या आपको लगता है कि जनसभा के बीच सच उजागर करना सुरक्षित है, या कैलाश पांडे कोई नया और खौफनाक जाल बिछाएगा?
इस महा-संग्राम में किसका 'बलिदान' कहानी का रुख हमेशा के लिए बदल देगा?
अपनी राय ज़रूर साझा करें!