Invisible Sacrifice Better Half - 3 in Hindi Moral Stories by archana books and stories PDF | अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3

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अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3


1. पीढ़ियों का चक्रव्यूह

ये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,
जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।
ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,
अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में फँसती चली जाती है।
जिसे उसने दूसरों के लिए बुना था।
ये एक ऐसा दुष्चक्र है, जहाँ सम्मान पाने की चाह में,
दूसरे का अपमान किया जाता है।
और अंततः, वही अपमान अपने हिस्से आता है।
क्या आपको लगता है कि इस चक्र को कभी तोड़ा जा सकता है?
या यह समाज का एक अंतहीन हिस्सा है?
और नई-नई प्रेमिकाएँ बनती हैं, नई पीढ़ी की,
जो प्रेमिका नई बनी, जाल एक पत्नी के लिए।
जब वो प्रेमिका से पत्नी बनती है,
नई पीढ़ी की प्रेमिका, उन्हीं को प्रेमिका बुरी कहती है।

2. पत्नी और प्रेमिका का चक्रव्यूह
जिस पत्नी की आलोचना करती है,
उसी पत्नी पद को पाने को, बदनाम करती है।
और तुलना खुद की एक पत्नी से करती है,
मैं श्रेष्ठ, मेरा निस्वार्थ प्रेम, ऐसा वो कहती है।
पत्नी तो स्वार्थ का प्रेम, अपने पति से करती है,
या प्रेमिका अपने भविष्य का जाल बुनती है।
जब किसी की वो एक दिन प्रेमिका से पत्नी बनती है,
बुरी पत्नी का कलंक, अपने माथे मढ़ती है।
ये प्रेमिका ऐसा चक्रव्यूह पत्नी के लिए रचती है,
पत्नी की प्रेमिका से पत्नी बनती है, तो खुद को,
अच्छी पत्नी साबित करते-करते थक जाती है।
ये चक्रव्यूह पीढ़ी दर पीढ़ी, जो नई प्रेमिका बनती है


3. पत्नी के प्रेम में स्वार्थ क्यों दिखता - कारण

प्रेमिका के खर्चे का भार प्रेमी नहीं उठाता। प्रेमिका की हर ज़रूरत और खर्चा प्रेमिका के माता-पिता द्वारा किया जाता है। इसलिए इस रिश्ते में स्वार्थ नज़र नहीं आता है। प्रेमी अपनी प्रेमिका से सप्ताह या महीने में मिलने जाता है और सारा दुःख-दर्द प्रेमी प्रेमिका से बांटता है। परिवार और विपरीत परिस्थितियों और क्लेश के वातावरण से ये प्रेमी जोड़ा बच जाता है। और इन दोनों के हिस्से में ज़िम्मेदारी का भार नहीं आता है, इसलिए प्रेमी और प्रेमिका को प्रेम का आसान रिश्ता नज़र आता है।

यही कारण है कि समाज द्वारा इन दोनों के प्रेम को निस्वार्थ प्रेम बताया जाता है। शायद एक प्रेमी/पति इसलिए पत्नी का प्रेम समझ नहीं पाता। इसलिए पत्नी के प्रेम को स्वार्थ के तराजू पर रखकर प्रेमिका से तोला जाता है। जब पति पर पत्नी का भार आता है, उसकी ज़रूरतों का हिसाब लगता है, और वह सबको बताता है कि पत्नी बहुत खर्चा करवाती है। सबको बताता है। इस तुलना के कारण पत्नी के प्रेम को स्वार्थ से जोड़ा जाता है।

4. प्रेमिका और पत्नी का प्रेम

प्रेमिका कहे, पत्नी मान से प्रेम करे,
पर वो तो समाज से अपमान सहकर प्रेम करे।
क्या प्रेमिका की सच्चाई से मुलाकात नहीं हुई?
या चोरी-छिपे प्रेम में ही उसकी बात हुई।
समाज से अपमान मिले, तो वो हट जाए,
नई जगह जाकर, अपमान से बच जाए।
भूलकर सब, वो आगे बढ़ जाए,
प्रेमिका का प्रेम, ऐसे ही निभा जाए।
पर पत्नी का अपमान, ससुराल और समाज से,
उसे वहीं रहना है, दूर नहीं जा सकती वो आज से।
आरोप जो लगे, वो बोल नहीं सकती,
हर रोज़ अपमान झेले, भूल नहीं सकती।
परिवार से प्रेम करे, दबा दर्द सहती रहे,
पत्नी का अपमान, वो अधिक सहती रहे।
शायद प्रेमिकाओं को ये अनुभव नहीं,
पत्नी जो सहती है, वो बहुत मुश्किल सही।
प्रेमिका भूले अपने प्रेमी के लिए अपमान,
पर पत्नी तो समाज, परिवार, पति से अपमान।
फिर भी प्रेम किया, बिगड़ी परिस्थितियों में भी,
भूलने का कोई उपाय नहीं, इस जीवन में कभी।


5. कलम का अन्याय (कलम ही रहस्य छिपाती है)

बस कलम ही रहस्य छिपाती है।
ये कलम बहुत कुछ छिपाती है, अर्धांगिनी के उनके त्याग
और बलिदान को, और प्रेम पर पूर्ण विराम लगाती है।
ये कलम के रंग, तर्क, विचार तो बहुत हैं।
शायद कोई ऐसी कलम हो, जो अनदेखे त्याग को सराहन
करती हो, अपने विचारों, किताबों में लिखती हो।
प्रेमिकाओं के लिए सर्वाधिक कलम सदियों से चली हैं,
फिर से लिखने पर बदलती रहती हैं।
एक कलम भी अपना दर्द लिखती है,
और कहती है, "सुन सखी, तुम अकेली नहीं।
मैं लिखूँगी अर्धांगिनी की पीड़ा,
जो किसी को नहीं दिखती है।"
ये कलम कोई और नहीं,
पत्नी रूपी कलम है, उन अर्धांगिनी की अनगिनत कही
भावनाओं को संगति है।
ये कलम किसी से तुलना नहीं न भावनाओं को समझाना चाहती है
बस ये चाहती है कि जो अपमान सिंदूर का करते हैं, उन्हें
समझाती है, बस ये क्या त्याग किए जो पत्नी ने
अनदेखा करते हैं कुछ कलमकार,
बस यही बतलाती है।

6. आखिर में बनाना पत्नी है सबको

प्यार की डगर, ये कैसी पहेली,
प्रेमिका और पत्नी, क्या इनमें तुलना सही?
एक दिन प्रेमिका बनेगी पत्नी, यह तय है कहानी,
और अपने सिर लेगी, जो पत्नी की ज़िम्मेदारी।
जिस नज़र से देखा पत्नी को कभी,
प्रेमिका भी उसी राह से गुज़रेगी अभी।
लेखक और पुरुष शायद भूले ये बात,
प्रेमिका का स्थान नहीं ले सकता कोई, पर ली प्रेमिका ने पत्नी की सौगात।
और शादी के बाद, चुकाया उन्होंने भी मोल,
सच कहूँ, तुलना है बेकार, इनका प्रेम अनमोल।
पहले तो हैं वे स्त्री, इसमें नहीं कोई संशय,
फिर बनी प्रेमिका, और पत्नी का भी था पथ प्रशस्त।
कौन जाने, क्या प्रेमिका रहेगी आजीवन प्रेमिका?
कोई बनेगी पत्नी, रचकर कोई नई प्रेमिका।
घूम-फिर कर बनना पत्नी ही है उसका भाग्य,
राधा भी बनी कृष्ण की पत्नी, पार्वती भी थी अंत तक पत्नी ही।
और फिर भी कोई समझ न पाया, इस रिश्ते का गहरा सत्य।

7. सच्चे साथी: सम्मान और प्रेम की गाथा

महान है वो पुरुष, जो पत्नी का सम्मान करता है,
विपरीत परिस्थितियों में भी, उसे धोखा नहीं देता।
दूसरी स्त्री का ख्याल, मन में नहीं लाता,
अपनी अर्धांगिनी की भावनाओं का, सदा ध्यान रखता है।
कितना भी हो जाए क्लेश, फिर भी प्यार करता है,
सच्चा पति वो, चाहे कितनी ही स्त्रियां दिखें,
उनके बारे में कभी नहीं सोचता है,
उसके दिमाग और दिल में, पत्नी के सिवा कोई नहीं बसता है।
वो किसी से भी, पत्नी की बुराई नहीं करता है,
जो बात हो, वो बंद कमरे में समझाता है।
कभी पत्नी को सबके सामने, बेइज्जत नहीं करता है,
क्योंकि वो जानता है, सम्मान ही रिश्ते की बुनियाद है।
जब दोनों के विचार एक से होते हैं,
सच में, वही सच्चे पति और पत्नी होते हैं।