Honey Doll - Ranjan Kumar Desai (74) in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (74)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (74)

              

                शहद की गुड़िया - प्रकरण 74

           "50 साल पहले क्या था? क्या होना चाहिये था उस का उदाहरण थी.

          ' दो आंखे बारह हाथ. "

           "उस में वी शांता राम ने एक जैलर की भूमिका निभाई थी, और उन्हों ने छह कैदियो को सुधारा था."

          " उस के लिये गलत करने वाले लोगो के साथ टकरा जाते हैं. उन्हें बचा लेते हैं और खुद अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. इस फ़िल्म में प्रेम का अनोखा प्रकार दिखाया गया था. "

         " एक खिलोने वाली उस जैलर से प्यार करती थी. लेकिन कहीं भी उसे दिखाया नहीं गया था. केवल उस की मौत पर वह अपनी चुडिया तोड़कर वह अपने प्रेम का इजहार करती है."

          "यह एक प्रतिकात्मक प्यार की अनूठी मिशाल थी. "

          " वह अंत में जेलर का गाया हुआ गीत गाकर उन्हें श्रद्धांजली देती है.."

                   ए मालिक तेरे बन्दे हम       

                      ऐसे हो हमारे करम   

                           नेकी पर चले   

                          हर बदी से तले           

                ताकि हसते  हुए निकले दम

             "फ़िल्म के अंत ने सब को रुलाया था."

            "ऐसी कई फ़िल्में बनी थी जिस ने  कुछ ना कुछ नया संदेशा दिया था."

                ज़ब जुल्मो का हो सामना      

                   तब तूही हमें थामना   

                 वह बुराई करे हम भलाई करे      

                   नहीं बदले की हो कामना

          " यह सब कहने का मतलब यह नहीं है. फिल्मों में कुछ गलत नहीं बताया जाता था. फिल्मे तीन घंटे के भीतर ' अंत भला तो ' सब भला की थियरी को अपनाकर पूरी हो जाती थी."

         "  सभी फिल्मे इसी पोजिटिव सोच की वजह से हजम हो जाती थी. उस की अवधि तीन घंटे की रहती थी. अंत में सब कुछ ठीक हो जाता था, लेकिन टी वी धारावाहिक की क़ोई निश्चित अवधि नहीं थी, वह बंध होने का नाम नहीं लेती थी."

         "  रोज कुछ ना कुछ  नया तमाशा खड़ा हो जाता  था. "

          " एक न एक चीज देखकर कंटाला भी आता था. लेकिन नई नई धारावाहिक का उदभव होता रहता हैं.

           " दादू ने अख़बार में मीडिया में उस की कड़क आलोचना की थी."

            " टी वी धारावाहिक की अवधि कम करने की डिमांड की थी. "

            " लेकिन खुद राज्य सरकार को भी उस में क़ोई दिलचस्पी नहीं थी. कुछ धारावाहिक बच्चों के लिये सही नहीं थी. फिर भी दिखाई जाती थी ,  जिसे बूढ़े बच्चे देर रात तक साथ बैठकर देखते थे."

           " बच्चों के भावि के बारे में मात पिता को क़ोई चिंता नहीं होती थी."

           "   वह खुद भी धारावाहिक में पूरा समय व्यस्त रहते थे.

            " अपनी जिम्मेदारी से उन्हें कुछ लेना देना नहीं होता हैं. "

             " बच्चे भी ठीक से पढ़ते नहीं थे.  उन के लिये ट्यूशन टीचर रखना पड़ता था."

            "  फिर भी मुश्किल से परीक्षा देते थे और जैसे तैसे  पास भी हो जाते थे."

             "बच्चो के भावि को मोबाइल ने जंक लगा दिया था."

             " अमीर मा बाप अपने बच्चों के महेंगे मोबाइल फोन दिलाते थे. और बच्चे मोबाइल की दुनिया में खो जाते थे.."

             " दादू एक दोस्त था. उन को तीन लडके थे. उस ने तीनो बेटों को मोबाइल दिलाया. बड़ा और छोटा तो उस का सही उपयोग करते थे. लेकिन मजला बेटा देर रात तक पोर्न वीडियो देखता रहता था. वह गुमराह हो गया था. उस के मा बाप भी देर रात तक ऐसे अश्लील वीडियो देखते रहते थे.. ऐसी स्थिति में उस की बीवी चंदा भी रंडी जैसा व्यवहार करती थी. "

           " अब यह किस का दोष था? "

            "  एक पति ने अपनी पत्नी की आदते ख़राब की थी.वह अपने पति से संतुष्ट नहीं थी. उस ने दूसरे पुरुष श्रवण के साथ संबंध बनाये थे. इस बात का उस के पति को पता चल गया था. और उस ने अपनी पत्नी को किसी भी पुरुष से बात करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. "

            "फिर भी वह पति से अनजान अन्य पुरुषो के साथ अपना मुंह काला करती रहती थी.. उस के पति को पता चल गया तो वह श्रवण को दोषित मानकर गाली गलोच करने पर उतर आया था उसे मारने की धमकी भी दी थी. उस पर श्रवण के पास अपने बचाव के लिये कुछ नहीं था. उस ने  चंदा का भांडा फोड़ते हुए कह दिया था."

         " मेरे इलाके में पांव तो रखकर देखो.  सलामत वापस कैसे जाते हो, मैं देखता हूं!"

         " तुम्हारी बहु ने है मुझे उत्तेजित किया हैं.. मैं उस के बारे में F I R फ़ाइल करने जा रहा हूं. "

         " सुनकर वह डर गया था. वह खुद अपनी बीवी के करतूतों से वाकिफ था. वही बीवी की गुमराही के लिये जिम्मेदार था. इस लिये वह कुछ नहीं कर पाया था. लेकिन चंदा ने अपने बेटे को सब कुछ बताया था."

          "और वह अपने मा बाप से दो कदम आगे था. वह श्रवण से बात करना चाहता था, लेकिन उस ने लडके को रोकते हुए चेतावनी दी थी."

           " इस बारे में कुछ बात ना करे वह तुम्हारी मा और परिवार की भलाई हैं. नाहक में तुम लोगो की बदनामी होगी. "

         " और वह चुप हो गया था."

         " कुछ दिनों के बाद दादू के एक दोस्त ने उन्हें बताया था."

         " चंदा ने ख़ुदकुशी कर ली हैं! "

         " यह सुनकर श्रवण को भी बड़ा झटका लगा था. इस वारदात के उस का पति जिम्मेदार था."

            " ऊस का पति किसी व्योपारी के घर मे ड्राइवर का काम करता था. सुबह जल्दी निकल जाता था और रात को देरी से घर आता था. खाना पीकर, दारू पीकर सो जाता था. ऊस ने अपनी बीवी की जरूरतों को नजर अंदाज कर दिया था. इस स्थिति में वह भटक गई थी. वह जहाँ खाना बनाने जाती थी ऊस घर के मालिक के साथ ऊस के शारीरिक सम्बन्ध बन गये थे. "

          " ऊस की वजह खुद ऊस का पति था. वह एक हादसे में शारीरिक सुख से वंचित हो गया हैं ऐसा कहकर अपनी बीवी की जरूरत पूरी नहीं कर पाता था.. और मालकिन के साथ ऊस का चक्कर चालू था. अपनी बीवी को गुमराह करने में ऊस का खुद का दोष था और वह यह बात मानने को तैयार नहीं था. "

         

                  0000000000000   ( क्रमशः)