Honey Doll - Ranjan Kumar Desai (82) in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (82)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (82)

                       

                   शहद की गुड़िया -प्रकरण 82

         "   कुछ भी हो.. भगवान ने सदैव उन्हें प्यार करने वाले लोगो से मिलाया था. "

         "  करोना काल के दौरान वह फुटपाथ पर बैठकर घरेलू चीज वस्तु का धंधा करते थे . उस दौरान साथ में कई औरते शाक भाजी, फूल - फल, श्रृंगार इत्यादि चीजों को बेचने का धंदा करती थी. उन सब को मैं अच्छी तरह से  जानता था. मैंने उन का सन्मान अर्जित किया था. "

        "   वह जहाँ बैठते थे उस की थोड़ी दुरी पर सामने की ओर एक दूध की दुकान थी. जिस में एक 45-50 वर्षीय महिला काम करती थी, उस से दादू का परिचय हुआ था. "

       " वह तीन बच्चों की मा थी. दो लड़कियां और एक लड़का. साथ में उस का पति और सास भी होते थे. मैं दूर रहता था फिर भी वही से दूध खरीदता था."

       " उस लड़की का नाम संजना था. उस के मात पिता राजस्थान के किसी शहर में रहते हैं. उसे दादू में अपने पिताजी दिखाई दिये थे, वह बहुत समय से उन्हें मिली नहीं थी. यह जानकर दादू ने उसे अपनी बेटी के रूप में कबूल कर लिया था."

         "उस की बड़ी लड़की भी दादू को पहचानती थी.  भगवान ने उस के नसीब में एक बीमारी दी थी. उसे फिट आती थी."

           " संजना उस के बारे में सदा चिंतित रहती थी. उस की शादी को लेकर भी वह तनाव महसूस करती थी. लेकिन उस का नसीब कुछ अच्छा था. उस की शादी अच्छे घराने में हो गई थी. लेकिन उस की बिरादरी में दहेज का चलन था..उस के लिये भारी खर्चा उठाना पडा था, जिस ने उस के बाप की कमर तोड़ दी थी. " 

            " दादू ने भी उसे एक पोती का दर्जा दिया था. उस की शादी में 500 रूपये का कन्या दान किया था. उन लोगो से एक खास रिश्ता बन गया था. उस के पति ने भी दादू का संजना के पिताजी के रूप में स्वीकार कर लिया था, जो उन के लिये अपूर्व उपलब्धि थी. उस की सास ने भी यह रिश्ता स्वीकार कर लिया था."

          "  कभी कभी वह दादू को चाय पिलाती थी. संजना भी कभी उन्हें छास पिलाती थी. दादू का बड़ा ख्याल रखती थी."

           "  लेकिन उस की सास, सास जो थी.. कभी अपना असली रंग रूप दिखाती थी. जाने क्यों वह अपनी बहु को नाहक में बहुत परेशान करती थी. किसी भी चीज में पांच मिनिट की देरी बर्दास्त नहीं करती थी. इस स्थिति में संजना को रोना आ जाता था. और उस के पास आंसू पी जाने के सिवा क़ोई विकल्प नहीं बचता था."

            " उस का छोटा भाई किसी अपराध की तेहत जैल में था, यह उस की एक और दुखती रग थी."

         " वह दिखने मे बड़ी अच्छी थी. सब के साथ, हसकर खुलकर बातें करती थी. उस की दूध की दुकान में ब्रेड, बिस्किट्स, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स इत्यादि मिलता था."

         ""  दादू एसिडिटी के मरीज थे . वह उस के पास रोज जीरा सोडा के बहाने उस को मिलने दुकान में जाते थे. कभी उन के कहने पर वह आधा सोडा पी लेती थी. यह उन्हें लिये अत्यंत खुशी की बात थी."

        " वह हर दूसरे तीसरे दिन उसे मिलने  जाते थे उस से बात करते थे. कुछ ना कुछ खरीदते थे. और निकलते समय उस के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते थे , कभी उस की पीठ को सहलाते थे उस के गालों का भी स्पर्श भी करते थे. "

         "  उस को मिलना, बातें करना उन का ओबसेशन बन गया था. उस की लड़कियो  से भी उन की बातें होती थी. उस की बड़ी लड़की शांत थी. उस की दादी मा मम्मी को तकलीफ देती थी, वह सह नहीं सकती थी, लेकिन कुछ बोल नहीं पाती थी. लेकिन छोटी लड़की उस से बड़ी अलग थी. वह अपनी मा का पक्ष लेकर दादी मा की बराबर क्लास लेती थी."

        " दादू के बेटे की तकलीफ जानकर उस ने  दुःख व्यक्त किया था." 

          " वह तो उसे गले लगाना चाहते थे. अपनी अंतरेच्छा उस को बताई थी लेकिन उस ने यह कहकर मना कर दिया था:"

        " यहाँ नहीं. सब लोग देखते हैं. नाहक में बातें बनायेंगे! "

         "दादू को उस की बातों में वजूद लगा था. उन्होंने दोबारा कभी उसे अपनी मनसा का जिक्र नहीं किया था."

         "वह सख्त मेहनत करती थी. थक जाती थी. लड़की की शादी हो जाने के बाद उस की सास गांव जाकर बैठी थी., और उस पर सारे घर की जिम्मेदारी आ गई थी."

         " वह उसे हमेशा हसती देखना चाहते थे . उस की निर्दोष मुस्कान दादू के दिल को छू जाती थी.".

         " वह कड़ी धुप में बारिश में बाहर निकलते थे तो वह एक दादी मा की तरह दादू को डाटती थी. "

         " इतनी धुप में घर से क्यों बाहर निकलते हैं?! "

         " बारिश में बाहर निकला मत करो. बीमार पड़ जाओगे. "

         " उस की ऐसी बातों में प्यार की महक थी, जो दादू को बहुत ख़ुशी प्रदान करती थी."

        "  वह कभी जेब में नगद पैसे नहीं रखते थे.  दो तीन बार उन से पैसे खो गये थे. इस लिये वह बहुधा सारा पेमेंट G pay से करते थे. "

         " कभी पैसे की जरूरत होती तो G pay में पैसे ट्रान्सफर कर के उस से नगद रकम बरामद कर लेते थे."

           "  वह ज्यादातर साड़ी परिधान करती थी. उस में वह खूबसूरत लगती थी. साड़ी ही आर्य नारी का असली पहनावा है. वह किसी भी  नारी के सौंदर्य को  चार चांद लगा देता हैं. "

            " वह कभी भी समय मिलने पर दुकान में कचरा निकालने में बैठ जाती थी. उस वक़्त क़ोई ना क़ोई घराक आ जाता था."

             " वह नीचे बैठकर कचरा निकालती थी. उस वक़्त उस का पल्लू सरक जाता था. और उस का यौवन उभार साफ दिखाई पड़ता था, जिस को  लोगो की कामुक नजर घूरती रहती थी . यह बात दादू की  नजर में आ गई थी. तो उन्होंने उस का दयान खिंचते हुए हिदायत दी थी."

        " देखो बेटा बुरा मत मानना. मेरी बात दयान से सुनना. जो बात एक मा या सास को कहनी होती हैं वह बात एक पिता के नाते मैं करता हूं.. एक घराक की उपस्थिति में कचरा मत निकालो और दूसरा नीचे बैठते समय अपना पल्लू को संभालो, जो सरक जाता हैं..और ... "

         " और  वह दादू का इशारा समझ गई थी. उस ने दादू की बात का अमल भी किया था."

         " संजना सही मायने में प्यार की मुरत थी जो दादू के लिये एक बड़ा उपहार थी,  जिसे वह कभी छोड़ने या छूट जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे. ".

          "दुनिया में खून से बढ़कर प्यार के रिश्ते, दिल के रिश्ते होते हैं जिन का क़ोई मोल नहीं होता है. संजना ने दादू को वैसे ही रिश्ते की भेट दी थी जिसे वह भूलकर भी भूला नहीं सकते थे. "

           "  उस के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देना दादू का अटूट नियम सा बन गया था, जिसे निभाये बिना उन्हें शकुन नहीं मिलता था., चैन नहीं प्राप्त होता था.

                         00000000000     ( क्रमशः )