Unfinished Love - Chapter 8 in Hindi Love Stories by sapna books and stories PDF | अधूरी मोहब्बत - अध्याय 8

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अधूरी मोहब्बत - अध्याय 8

अधूरी मोहब्बत — अध्याय 8: एक अनकहा सच ✨

अर्जुन के हाथ काँप रहे थे। उसने धीरे से समीर का भेजा हुआ वह लिफाफा खोला। उसे लगा था कि समीर शायद उसका शुक्रिया अदा करेगा, लेकिन खत की पहली लाइन ने ही उसके दिल की धड़कन तेज़ कर दी।

"बड़े भाई अर्जुन,

मुझे पता है कि जब आप यह खत पढ़ रहे होंगे, मैं और राधा शहर छोड़कर जा चुके होंगे। अस्पताल में उस दिन जब आप और राधा बालकनी में बात कर रहे थे, मैंने सब कुछ सुन लिया था। मुझे पता चल गया कि आप दोनों का रिश्ता क्या था और मेरी वजह से आप दोनों को कितनी बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी।"

अर्जुन की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उसे डर था कि समीर कहीं राधा से नफरत न करने लगे। उसने आगे पढ़ना शुरू किया:

"राधा ने कभी मुझसे कुछ नहीं छुपाया, पर उसकी खामोशी उसकी वफादारी थी। मुझे अहसास हुआ कि मैं उस इंसान के साथ ज़िंदगी बिता रहा हूँ जिसका दिल कहीं और बसता है। प्यार जबरदस्ती नहीं कमाया जाता, अर्जुन भाई। आपने मेरी जान बचाई, और आज मैं आपकी और राधा की मोहब्बत को एक मौका देना चाहता हूँ।"

खत के साथ एक कानूनी दस्तावेज़ भी था। समीर ने राधा को तलाक के कागज़ात दे दिए थे और उसे उसके फैसले के लिए आज़ाद कर दिया था। खत के आखिर में लिखा था— "राधा अब भी उसी पुराने पार्क में तुम्हारा इंतज़ार कर रही है जहाँ तुम दोनों पहली बार मिले थे। उसे अपनी दुनिया में वापस ले जाओ।"

अर्जुन बिना एक पल गँवाए अपनी गाड़ी की तरफ भागा। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। क्या वाकई किस्मत ने उसे दूसरा मौका दिया था? क्या राधा उसे स्वीकार करेगी?

जब वह पार्क पहुँचा, तो शाम ढल रही थी। दूर उसी पुरानी बेंच पर एक साया बैठा था। वह राधा थी। जैसे ही अर्जुन पास पहुँचा, राधा मुड़ी। उसकी आँखों में बेतहाशा आँसू थे और चेहरे पर एक अजीब सा खालीपन।

"राधा!" अर्जुन ने पुकारा।

राधा खड़ी हुई, पर वह अर्जुन की तरफ नहीं दौड़ी। उसने सिसकते हुए कहा, "समीर चला गया अर्जुन। उसने मुझे आज़ाद कर दिया, पर क्या मैं वाकई आज़ाद हूँ? एक इंसान जिसने मुझे इतना सम्मान दिया, जिसने मेरे अतीत को जानने के बाद भी अपनी खुशी कुर्बान कर दी... क्या मैं उसे भूलकर तुम्हारे साथ खुश रह पाऊंगी?"

अर्जुन के कदम ठिठक गए। उसे अहसास हुआ कि प्यार सिर्फ दो लोगों का मिलना नहीं होता, इसमें उन लोगों का बोझ भी होता है जिन्हें हम पीछे छोड़ आते हैं।

"राधा," अर्जुन ने नरमी से कहा, "समीर ने तुम्हें आज़ाद किया है क्योंकि वह तुम्हें खुश देखना चाहता है। अगर तुम दुखी रहोगी, तो उसका त्याग बेकार चला जाएगा।"

राधा ने अर्जुन की आँखों में देखा। उन आँखों में आज भी वही पुराना प्यार था, वही भरोसा था। उसने धीरे से अपना सिर अर्जुन के कंधे पर रख दिया। बरसों बाद दोनों के बीच का सन्नाटा टूटा था।

लेकिन तभी राधा के फोन की घंटी बजी। वह समीर के डॉक्टर का फोन था।
"हेलो, राधा जी? समीर जी का एक्सीडेंट वाली चोट फिर से उभर आई है, उनकी हालत बहुत नाज़ुक है... वो बार-बार आपका नाम ले रहे हैं।"

राधा का हाथ कांपने लगा और फोन ज़मीन पर गिर गया। एक तरफ उसका वह प्यार था जिसके लिए वह बरसों तड़पी, और दूसरी तरफ वह इंसान जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी उसके नाम कर दी थी।

क्या राधा अर्जुन को फिर से छोड़कर समीर के पास जाएगी? या इस बार वह अपने दिल की सुनेगी?
जानने के लिए पढ़ें — अध्याय 9 ✨📖