Adhuri Mohabbat - 10 in Hindi Love Stories by sapna books and stories PDF | अधूरी मोहब्बत - अध्याय 10 (अंतिम अध्याय)

The Author
Featured Books
Categories
Share

अधूरी मोहब्बत - अध्याय 10 (अंतिम अध्याय)

अधूरी मोहब्बत — अंतिम अध्याय: नई सुबह ✨

राधा के सवाल ने अर्जुन को सोच में डाल दिया था। क्या वाकई किसी की मौत के साये में अपनी खुशियाँ ढूँढना गलत था? उस रात अर्जुन सो नहीं पाया। उसने समीर की डायरी के उन आखिरी पन्नों को बार-बार पढ़ा।

समीर ने लिखा था— "राधा, अगर तुम अर्जुन के पास जाने में हिचकिचाओगी, तो मेरी रूह को शांति नहीं मिलेगी। मेरी खुशी तुम्हें खुश देखने में थी, तुम्हें ताउम्र विधवा के लिबास में तड़पते देखने में नहीं।"

कुछ महीने बीत गए। अर्जुन ने राधा पर कोई दबाव नहीं डाला। उसने राधा को वक्त दिया ताकि वह खुद को और अपनी भावनाओं को संभाल सके। वह दूर रहकर भी हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहता।

एक सुबह, अर्जुन अपने घर की बालकनी में बैठा चाय पी रहा था, तभी उसके दरवाज़े की घंटी बजी। दरवाज़ा खोलने पर सामने राधा खड़ी थी। उसके चेहरे पर महीनों बाद एक अजीब सा सुकून और आत्मविश्वास था। उसने सफेद नहीं, बल्कि हल्के नीले रंग का सूट पहना था—वह रंग जो अर्जुन को बहुत पसंद था।

"राधा? तुम यहाँ इस वक्त?" अर्जुन ने हैरान होते हुए पूछा।

राधा अंदर आई और मेज़ पर समीर की वही डायरी रख दी। उसने धीमे मगर मज़बूत स्वर में कहा, "अर्जुन, मैंने बहुत सोचा। समीर ने मुझे जो आज़ादी दी थी, मैं उसे डर और दुख में बर्बाद कर रही थी। लेकिन आज मुझे समझ आया कि समीर ने मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में इसलिए नहीं दिया था कि मैं पछतावे में जिऊँ, बल्कि इसलिए दिया था कि मैं फिर से जीना सीखूँ।"

राधा ने अर्जुन की आँखों में सीधे देखते हुए पूछा, "क्या तुम अब भी एक ऐसी लड़की का हाथ थामना चाहोगे, जिसके पास यादों का एक भारी बोझ है? क्या तुम मुझे फिर से मुस्कुराना सिखाओगे?"

अर्जुन की आँखों में नमी आ गई। उसने बिना कुछ कहे राधा का हाथ थाम लिया। उसने महसूस किया कि यह सिर्फ दो प्रेमियों का मिलन नहीं था, बल्कि दो टूटे हुए दिलों का एक-दूसरे को जोड़ने का वादा था।

एक साल बाद...

पार्क की वही पुरानी बेंच जहाँ कभी दोनों उदास बैठा करते थे, आज वहाँ की नक्काशी कुछ और ही कह रही थी। अर्जुन और राधा वहाँ बैठे थे। अर्जुन अब एक सफल चित्रकार बन चुका था और उसकी सबसे मशहूर पेंटिंग का नाम था— 'मुकम्मल मोहब्बत'।

राधा ने उसके कंधे पर सिर टिकाया और ढलते सूरज को देखते हुए कहा, "पता है अर्जुन, कभी-कभी हमें लगता है कि हमारी कहानी अधूरी रह गई, पर कुदरत उसे कहीं और, किसी और तरीके से पूरा कर रही होती है।"

अर्जुन ने मुस्कराते हुए कहा, "हमारी मोहब्बत अधूरी नहीं थी राधा, वह बस इंतज़ार में थी। समीर ने हमें जो मौका दिया, वह उसका हम पर सबसे बड़ा अहसान है।"

हवा का एक झोंका आया, जैसे समीर कहीं आस-पास ही हो और उनकी खुशियों को आशीर्वाद दे रहा हो। अर्जुन और राधा अब एक थे—हमेशा के लिए। उनकी कहानी में अब कोई 'सवाल' नहीं था, सिर्फ 'जवाब' और 'साथ' था।

समाप्त ✨📖
अंतिम अध्याय का शीर्षक: मुकम्मल सफर (A Complete Journey)
आशा है कि आपको यह सुखद अंत (Happy Ending) पसंद आया होगा! आपकी यह कहानी 'अधूरी मोहब्बत' से शुरू होकर 'मुकम्मल वफ़ा' पर खत्म हुई।