एपिसोड 8: शादी की तैयारियां और नए सफर की शुरूआत
पटना की गलियों में अब एक नई चर्चा थी – “रिया और आरव की शादी होने वाली है।” मोहल्ले की औरतें चौखट पर बैठकर बातें कर रही थीं, बच्चे उत्साह से गली में दौड़ रहे थे। हर कोई इस अनोखी जोड़ी के बारे में जानना चाहता था।
तैयारियों की शुरुआत
रिया के घर में हलचल बढ़ गई थी। मां ने पड़ोस की औरतों को बुलाकर कहा, “बेटी की शादी है, सब मिलकर मदद करेंगे।” आंगन में रंग-बिरंगे कपड़े सूख रहे थे, दीवारों पर हल्दी और मेहंदी की खुशबू फैल रही थी। रिया अपनी सहेलियों प्रिया और नेहा के साथ बैठी थी। प्रिया ने हंसते हुए कहा, “रिया, तू तो अब रानी बनने वाली है।” नेहा ने चुटकी ली, “देखना, शादी में पटना का आधा शहर आएगा।”
उधर आरव के घर में भी तैयारियां शुरू हो गई थीं। उसकी मां अब भी थोड़ी नाराज़ थीं, लेकिन रिश्तेदारों के दबाव और आरव की जिद के आगे झुक गईं। उन्होंने कहा, “ठीक है बेटा, अगर तू खुश है तो मैं भी मान जाती हूं। लेकिन शादी शान से होगी।” आरव ने मुस्कुराकर कहा, “मां, शान दिल से होती है, पैसे से नहीं। रिया की सादगी ही हमारी असली शान होगी।”
मेहंदी की रस्म
शादी से दो दिन पहले रिया के घर में मेहंदी की रस्म हुई। आंगन में ढोलक बज रही थी, औरतें गाना गा रही थीं – “मेहंदी है रचने वाली, हाथों में रंग सजने वाला…” रिया के हाथों पर मेहंदी लगाई गई। उसकी हथेली पर आरव का नाम लिखा गया। सहेलियां चिढ़ाने लगीं, “देखना, आरव तेरा नाम ढूंढेगा।” रिया शरमा गई।
आरव भी चुपके से आया। उसने रिया के हाथों को देखा और मुस्कुराया। “ये नाम मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा है।” रिया की आंखें नम हो गईं।
बारात की तैयारी
शादी के दिन मोहल्ले में रोशनी जगमगा रही थी। गली के हर घर में दीये जल रहे थे। आरव की बारात सज-धज कर आई। घोड़ी पर बैठा आरव, दोस्तों के साथ नाचते हुए, ढोल-नगाड़ों की गूंज में रिया के घर पहुंचा। बच्चे चिल्ला रहे थे, “बारात आ गई!”
रिया की मां ने आंगन सजाया था। फूलों की मालाएं, रंग-बिरंगी सजावट, और गंगा घाट से लाए गए दीये हर कोने में चमक रहे थे।
शादी का मंडप
मंडप में पंडित मंत्र पढ़ रहे थे। रिया लाल जोड़े में बैठी थी, आरव शेरवानी में। दोनों की आंखें मिल रही थीं। पंडित ने कहा, “अब वर-वधू सात फेरे लेंगे।”
पहला फेरा – धर्म का पालन।
दूसरा फेरा – जीवन की जिम्मेदारी।
तीसरा फेरा – धन और समृद्धि।
चौथा फेरा – परिवार की खुशी।
पांचवां फेरा – संतान और भविष्य।
छठा फेरा – स्वास्थ्य और सुख।
सातवां फेरा – दोस्ती और प्यार।
हर फेरे के साथ रिया और आरव का रिश्ता मजबूत होता गया।
समाज की प्रतिक्रिया
मोहल्ले के लोग शादी देख रहे थे। कुछ ने कहा, “देखो, अमीर लड़का गरीब लड़की से शादी कर रहा है। ये सच्चा प्यार है।”
कुछ ने ताना मारा, “देखना, आगे कितनी मुश्किलें होंगी।”
लेकिन तालियों और शुभकामनाओं की गूंज ने हर ताने को दबा दिया।
मां का आशीर्वाद
शादी के बाद रिया की मां ने आशीर्वाद दिया। “बेटी, तूने साहस दिखाया है। तूने अपनी खुशी चुनी है। अब मैं निश्चिंत हूं।” आरव ने मां के पैर छुए। “आंटी नहीं, अब आप मेरी मां हैं।”
नए सफर की शुरुआत
शादी के बाद रिया और आरव गंगा घाट पर गए। सूरज डूब रहा था, लहरें चमक रही थीं। आरव ने कहा, “रिया, ये हमारी नई जिंदगी की शुरुआत है। अब कोई हमें अलग नहीं कर सकता।”
रिया ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ आरव, प्यार ने जीत हासिल की है। अब हमारा सफर हमेशा साथ होगा।”
गंगा की लहरें गूंज रही थीं, जैसे कह रही हों – “प्यार सबसे बड़ा सच है।”
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अगले एपिसोड में:
शादी के बाद का जीवन – नए रिश्तों की चुनौतियां, परिवार की जिम्मेदारियां और प्यार की परीक्षा।