Prernaspandan - 8- 9 in Hindi Short Stories by Bhupendra Kuldeep books and stories PDF | प्रेरणास्पंदन - 8-9

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प्रेरणास्पंदन - 8-9

अध्याय: 8

अनुभव की पतवार और संकल्प का संसार 

 

                 जीवन का पथ किसी विशाल महासागर की भांति है, जहाँसमय की लहरें निरंतर अपना मिजाज बदलती रहती हैं। कभी स्थितियाँशांत होती हैं, तो कभी संकटों का भीषण ज्वार उठता है। ऐसे में मनुष्य कीसफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि लहरें कितनी ऊँची हैं, बल्किइस पर निर्भर करती है कि उसके हाथों में 'अनुभव' की पतवार कितनीसशक्त है। सच्चा मार्गदर्शक वही है जो आने वाली पीढ़ी को केवल किनारेपर बैठना नहीं सिखाता, बल्कि उसे वक्त की नब्ज पहचानकर नाव खेनेकी कला सिखाता है। अनुभव वह अमूल्य धन है जो हमें विपरीतपरिस्थितियों में भी अडिग रहना सिखाता है।

सच्चा साहस वह नहीं है जो केवल सुख के दिनों में दिखाई दे, बल्किअसली वीरता तो घोर पीड़ा के क्षणों में भी मुस्कुराते रहने में है। जबजीवन का अंधकार गहरा होने लगे और दुःख की घड़ियाँ मनुष्य को चारोंओर से घेर लें, तब अनुभव का सार ही काम आता है। यह सार हमें बताताहै कि कष्ट स्थाई नहीं हैं और मुस्कुराहट वह अस्त्र है जो बड़ी से बड़ी वेदनाको भी छोटा कर देती है। जो व्यक्ति अपने अनुभवों से सीखता है, वह न केवल स्वयं प्रकाशित होता है, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बन जाता है।

मुश्किलें कभी बताकर नहीं आतीं, वे अचानक सामने खड़ी हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में कायर व्यक्ति अपनी आवाज़ खो देता है, किंतु एकदृढ़निश्चयी व्यक्ति अपनी आवाज़ को इतना बुलंद करता है कि मुश्किलोंके हौसले पस्त हो जाते हैं। हमें अपने भीतर हिम्मतों की एक ऐसी तलवारविकसित करनी चाहिए, जो हर बाधा को काटकर आगे बढ़ने का मार्गप्रशस्त करे। यह हिम्मत किसी बाज़ार में नहीं मिलती, बल्कि संघर्ष कीभट्टी में तपने के बाद प्राप्त होती है। अपनी आवाज़ और अपने इरादों कोइतना मजबूत बनाना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

अंतिम लक्ष्य केवल यात्रा करना नहीं, बल्कि मंजिलों को जीतकर इतिहासके नए पन्ने लिखना है। हर व्यक्ति के भीतर सपनों का एक झिलमिलातासंसार होता है, लेकिन उन सपनों को हकीकत की धरती पर उतारने केलिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। जब अनुभव, मुस्कुराहट औरहिम्मत एक साथ मिलते हैं, तब मनुष्य एक ऐसे गौरवशाली भविष्य कानिर्माण करता है जिसकी मिसाल दी जा सके। हमें अपनी असफलताओंको अंत नहीं, बल्कि अनुभव की एक नई सीढ़ी मानना चाहिए जो हमें नईमंजिलों की ओर ले जाती है।

 

सीख / नैतिक संदेश

यह अध्याय हमें यह महत्वपूर्ण शिक्षा देता है कि अनुभव ही जीवन कीसबसे बड़ी पाठशाला है। कठिन समय में मुस्कुराना और अपनी हिम्मत कोशस्त्र की तरह उपयोग करना ही एक सफल व्यक्तित्व की पहचान है। हमेंपरिस्थितियों का गुलाम बनने के बजाय अपनी मेहनत और बुद्धिमानी सेसमय का रुख मोड़ने का प्रयास करना चाहिए। जब हम अपने अनुभवों सेसीखकर हिम्मत के साथ आगे बढ़ते हैं, तो हम न केवल अपनी मंजिलप्राप्त करते हैं, बल्कि इतिहास में अपना नाम भी स्वर्ण अक्षरों में अंकितकर देते हैं। दृढ़ संकल्प और अनुभव का मेल ही जीवन को सार्थक बनाताहै। 

अध्याय:9

समय की पुकार और मानवता का हाथ 

 

                 मनुष्य के जीवन में सफलता का मार्ग कभी भी सीधा औरसरल नहीं होता। कई बार जब हम अपनी मंज़िल के बिल्कुल करीब होतेहैं, तभी कोई अनजानी बाधा हमारे सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। ऐसे कठिन क्षणों में व्यक्ति का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है, लेकिनयही वह समय होता है जब धैर्य और सही मार्गदर्शन की सबसे अधिकआवश्यकता होती है। यह कहानी एक ऐसी ही युवती की है, जिसने अपनीवर्षों की कठिन तपस्या और परिश्रम से एक महत्वपूर्ण सरकारी परीक्षाउत्तीर्ण की थी। उसके सपने अब हकीकत बनने ही वाले थे, लेकिनदस्तावेज़ों के सत्यापन (verification) के दिन एक तकनीकी समस्या नेउसे संकट में डाल दिया। अधिकारियों ने उससे उसकी मुख्य शैक्षणिकउपाधि (Degree) की मांग की, जो उस समय उसके पास उपलब्ध नहींथी।

निराशा के गहरे सागर में डूबी वह युवती रोते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी केपास पहुँची। उसकी आँखों के आँसू उसकी उस मेहनत के थे जो अब व्यर्थहोती प्रतीत हो रही थी। यहाँ हमें जीवन का एक बहुत बड़ा सत्य सीखनेको मिलता है—यह संसार भले ही कितना भी व्यस्त क्यों न हो, लेकिनआज भी यहाँ मानवता जीवित है। जब उस वरिष्ठ अधिकारी ने उस युवतीकी पीड़ा को समझा, तो उन्होंने केवल सांत्वना नहीं दी, बल्कि तुरंतसक्रियता दिखाई। उन्होंने प्रशासनिक बाधाओं को किनारे रखकर अपनीटीम को निर्देशित किया और मात्र एक घंटे के भीतर उस युवती की डिग्रीतैयार करवा दी। यह घटना हमें सिखाती है कि यदि सत्ता और व्यवस्था मेंबैठे लोग संवेदनशील हों, तो वे किसी का बुझता हुआ भविष्य फिर सेरोशन कर सकते हैं।

डिग्री हाथ में आते ही उस युवती के पास समय बहुत कम था। उसे तुरंतदूसरे शहर पहुँचकर अपनी काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होना था। अधिकारी ने उसे प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह हार न माने और वहांजाकर अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से साझा करे। उस युवती ने वैसा हीकिया। उसने वहां के अधिकारियों से प्रार्थना की और अपनी वास्तविकताको ईमानदारी से सामने रखा। सत्य की शक्ति और समय पर की गईमदद का परिणाम यह हुआ कि उसे काउंसलिंग में शामिल कर लियागया। कुछ दिनों बाद, जब वह युवती अपने नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) के साथ वापस लौटी, तो उसकी आँखों में दुख के नहीं बल्किकृतज्ञता और सफलता के आँसू थे।

यह संस्मरण हमें दो गहरे संदेश देता है। पहला यह कि यदि आप एककठिन और वास्तविक स्थिति से गुजर रहे हैं, तो मदद मांगने में कभीसंकोच न करें। दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है; बस आवश्यकता हैसही समय पर सही द्वार खटखटाने की। दूसरा संदेश यह है कि समय परकी गई एक छोटी सी मदद किसी का पूरा जीवन बदल सकती है। हमारीसंवेदनशीलता और हमारा एक छोटा सा प्रयास किसी के संघर्ष कोसफलता में बदल सकता है।

 

सीख / नैतिक संदेश

इस अध्याय से हमें यह शिक्षा मिलती है कि 'मानवता' और 'समयबद्धता' जीवन के दो सबसे बड़े गुण हैं। जहाँ एक ओर व्यक्ति को विपरीतपरिस्थितियों में घबराने के बजाय पूरी ईमानदारी से समाधान की तलाशकरनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर समर्थ व्यक्ति को सामर्थ्य होने पर दूसरोंकी सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। समय पर मिला सहयोगकेवल एक कार्य सिद्ध नहीं करता, बल्कि एक मनुष्य का भविष्य सुरक्षितकरता है। हमें सदैव दूसरों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, क्योंकि हमाराएक छोटा सा नेक काम किसी के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन सकताहै।

bhupendra kuldeep

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bhupendrakuldeep@gmail.com