God Wishar - 1 in Hindi Adventure Stories by Ram Make books and stories PDF | God Wishar - 1

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God Wishar - 1



धड़ाम!

जैसे ही वह बैंक के अंदर भागा, एक भारी आग बुझाने वाला सिलेंडर (Fire Extinguisher) कबीर के सिर पर आ लगा, जिससे वह वहीं बेहोश हो गया। दुनिया में जैसे अंधेरा छा गया और उसकी आँखों के सामने तारे नाचने लगे। 

कबीर एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था, और नौकरी की तलाश में उसने अपना कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया था। हाल ही में एक जान-पहचान वाले की सिफारिश पर, वह स्थानीय पुलिस विभाग में शामिल हुआ था और पेट्रोलिंग स्क्वाड के लिए एक आईटी तकनीशियन (Technician) के रूप में काम करने लगा था।

उसे पुलिस के साथ काम करते हुए कुछ ही महीने हुए थे, और अब वह सीधे एक बैंक डकैती के बीच फंस गया था! इससे पहले कि वह समझ पाता कि क्या हो रहा है, उस सिलेंडर ने उसके होश उड़ा दिए।जैसे ही उसे लगा कि उसकी जान जाने वाली है, कबीर के दिमाग में एक रहस्यमयी आवाज़ गूंजी।

उसे अपने दिमाग में एक बीप सुनाई दी, "डिंग!" और फिर एक आवाज़ आई, "विश सिस्टम (Wish System) सफलतापूर्वक जुड़ गया है। नए होस्ट के लिए स्वागत उपहार अपलोड किया जा रहा है।"आवाज़ आगे बोली, *"डिंग! बधाई हो, होस्ट को 3 इच्छाएं (wishes) प्राप्त हुई हैं।"कबीर पूरी तरह से हैरान था, उसका दिमाग सुन्न हो गया था। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि वह मरना नहीं चाहता।

उसे फिर से वह आवाज़ सुनाई दी। *"डिंग! आपने अपनी पहली इच्छा पूरी कर ली है। होस्ट को एक कौशल (skill) प्राप्त होता है: चोट से उबरना (Recovery from injury)।"विवरण: होस्ट पांच सेकंड के भीतर किसी भी और हर तरह की चोट से ठीक हो जाएगा।"आवाज़ के गायब होते ही कबीर को अपने पूरे शरीर में एक गर्म धारा बहती हुई महसूस हुई। कुछ ही सेकंड बाद, उसके होश वापस आ गए। उसने अपनी आँखें खोलीं, अपना सिर छुआ और ऐसे खड़ा हो गया जैसे कुछ हुआ ही न हो।

बेहोश किए जाने पर तो कोई भी शांत इंसान भड़क जाता, फिर कबीर जैसे गर्म खून वाले लड़के की तो बात ही छोड़िए। होश में आते ही वह चिल्लाया, "मुझे किसने मारा बे? कसम से, मैं तुम्हारी हड्डियाँ तोड़ दूंगा!"उसके दिमाग में फिर से आवाज़ गूंजी। *"डिंग! दूसरी इच्छा सफल। होस्ट को एक कौशल प्राप्त होता है: अचूक निशाना (Throwing Proficiency)।"

"विवरण: होस्ट 100% सटीकता के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार करने में सक्षम होगा, बशर्ते लक्ष्य सीमा (range) के भीतर हो।"कबीर को अपने शरीर में एक और गर्माहट महसूस हुई, लेकिन उसने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। इसके बजाय, उसने वही आग बुझाने वाला भारी सिलेंडर उठाया जिसने उसे बेहोश किया था, और उसे सबसे नज़दीकी लुटेरे की ओर पूरी ताकत से दे मारा।

क्रैश!

वह लाल सिलेंडर किसी गाइडेड मिसाइल की तरह हवा में उड़ता हुआ गया। वह सीधे नकाबपोश लुटेरे के सिर पर जा लगा, और वह एक जोरदार आवाज़ के साथ ज़मीन पर गिर पड़ा।यह सब इतनी जल्दी हुआ कि बैंक कर्मचारी, ग्राहक और लुटेरे सभी इस अनजान लड़के को देखकर हैरान रह गए, जो अचानक से मसीहा बनकर प्रकट हो गया था।मंकी कैप पहने एक दूसरे लुटेरे ने जोर से चिल्लाते हुए कबीर पर गोली चलाने के लिए अपनी पिस्तौल तान ली।

कबीर ने पागलों की तरह चारों ओर देखा, लेकिन आस-पास फेंकने के लिए कुछ भी नहीं था! तभी उसे याद आया कि उसकी जेब में दस रुपये का एक सिक्का है।जैसे ही उसने सिक्का निकाला, उसके दिमाग में फिर से आवाज़ गूंजी, "डिंग! थ्रोइंग प्रोफिशिएंसी स्किल सक्रिय (activated)!"

"आह!" कबीर ने चिल्लाते हुए वह सिक्का बंदूकधारी लुटेरे के चेहरे पर दे मारा। पलक झपकते ही, सिक्का सीधे उस आदमी के खुले मुंह के अंदर जा घुसा। उसका शरीर तुरंत सुन्न पड़ गया और उसका चेहरा पीला हो गया। वह अपनी गर्दन पकड़कर तड़पने लगा और खांसते हुए ज़मीन पर गिर पड़ा।"बॉस!" मंकी कैप पहने एक मोटे आदमी ने चिल्लाया। उसने हाथ में पकड़ा चापड़ (machete) उठाया और कबीर की तरफ लपका।

लगातार दो लुटेरों को ढेर करने के बाद, कबीर का पूरा ध्यान अब लड़ाई पर था। बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने मन ही मन दहाड़ते हुए कहा, "मैं इस चोर को हराना चाहता हूँ!"बिना चूके, आवाज़ ने उसे जवाब दिया। "डिंग! इच्छा पूरी हुई। होस्ट को नई क्षमता मिलती है: हैमर फिस्ट (हथौड़ा मुक्का) में निपुणता।"जैसे ही वह मोटा लुटेरा उसके पास पहुँचा, वह गर्म एहसास वापस लौट आया।

"मुझे लड़ने के लिए अतिरिक्त ताकत चाहिए!" कबीर चिल्लाया। उसने चापड़ के वार को चकमा दिया और मौका पाकर लुटेरे को नीचे गिरा दिया। फिर उसने उस आदमी के सिर पर मुक्कों की बरसात कर दी। लुटेरा चीख भी नहीं पाया और ज़मीन पर ढेर हो गया।

इस लड़ाई के बाद बैंक में मौत जैसा सन्नाटा छा गया। बैंक के कर्मचारी और ग्राहक हैरानी से कबीर को घूर रहे थे। कुछ ही पल पहले, वे अपनी जान के डर से कांप रहे थे और भागने का रास्ता ढूंढ रहे थे। लेकिन इस नौजवान ने अकेले ही पूरी स्थिति को संभाल लिया था और कुछ ही सेकंड में तीनों बैंक लुटेरों को धूल चटा दी थी। बैंक का माहौल एक अजीब से अविश्वास से भरा हुआ था।

लेकिन कबीर के दिमाग में वह आवाज़ अभी रुकी नहीं थी। "डिंग! आपने लुटेरों की बैंक लूटने की इच्छा को चकनाचूर कर दिया है। आपको मिलता है: एक फ्री डिस्ट्रीब्यूशन एट्रीब्यूट पॉइंट (Free Distribution Attribute Point)।"डिंग! आपने वहां मौजूद लोगों की बचने की इच्छा पूरी कर दी है। आपको मिलता है: एक विश वैल्यू (Wish Value)।"विवरण: जब आपका कुल विश वैल्यू 10 अंक तक पहुँच जाएगा, तो सिस्टम आपको एक नई इच्छा (wish) प्रदान करेगा।"

लुटेरों के बेहोश होने के बाद, कबीर को आखिरकार यह सोचने का मौका मिला कि आखिर हो क्या रहा है। जैसे ही उसने अपने दिमाग में गूंजती उस "सिस्टम" की आवाज़ को सुना, उसके दिमाग में कई सवाल और भावनाएं उमड़ने लगीं।"सिस्टम? कैसा सिस्टम?" उसने अपना सिर खुजलाते हुए खुद से पूछा।

तभी पुलिस के सायरन की आवाज़ से पूरा बैंक गूंज उठा और एटीएस (ATS) की टीम मौके पर पहुँच गई। जब स्पेशल कमांडो अंदर घुसे, तो वे नज़ारा देखकर दंग रह गएतीनों नकाबपोश लुटेरे ज़मीन पर बेहोश पड़े थे। किसी भी आम नागरिक को खरोंच तक नहीं आई थी।

एक अधेड़ उम्र का अफसर तेजी से अंदर आया और यह सब देखकर कुछ पल के लिए अवाक रह गया। फिर उसने हैरानी से पूछा, "यहाँ चल क्या रहा है?"भीड़ में से एक महिला ने जवाब दिया, "आप लोग लेट हो गए साहब! इस नौजवान ने पहले ही गुंडों की छुट्टी कर दी है!""नौजवान?"उस अफसर ने उलझन में कबीर की ओर देखा। उसने शक के लहज़े में पूछा, "क्या यह सब तुमने किया है?"

तब तक कबीर पूरी तरह से होश में आ चुका था। उसकी उलझन दूर हो गई थी और उसका आत्मविश्वास लौट आया था। आख़िरकार, उसकी मदद के लिए अब यह रहस्यमयी 'सिस्टम' जो था!उसने एक प्यारी सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "मुझे लगता है कि मेरी किस्मत अच्छी थी।"

शुरुआत में उस सीनियर अफसर को इस बात पर यकीन नहीं हुआ। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उसने अविश्वास से कबीर को देखा। लेकिन जब उसने सामने खड़ी भीड़ की ओर देखा, तो वे सिर हिला रहे थे और इस नौजवान की तारीफ कर रहे थे। उसने कबीर की पीठ थपथपाई और कहा, "शाबाश!"उसने आगे पूछा, "बेटा, तुम किस विभाग से हो? तुम्हारा नाम क्या है?"

कबीर ने सावधान की मुद्रा में खड़े होकर जवाब दिया, "सर, मैंने हाल ही में एक तकनीशियन (technician) के रूप में जॉइन किया है। मेरा नाम कबीर शर्मा है।"
कबीर के रवैये ने यकीनन उस अफसर को प्रभावित किया था। उसका विनम्र लहज़ा सुनकर वह मुस्कुराया। "मैं तुम्हें याद रखूँगा, कबीर शर्मा।"

इसके बाद, उस अफसर ने अपने बगल में खड़े एटीएस कमांडर की ओर मुड़कर कहा, "सीन की जांच करो और स्थिति को नियंत्रण में लो। सबसे पूछताछ करो। यह सुनिश्चित करो कि कोई और संदिग्ध यहां न छिपा हो।" वह थोड़ा रुका और बोला, "और मुझे सीसीटीवी फुटेज लाकर दो। मुझे देखना है कि यहाँ क्या हुआ था।"

तभी कबीर को एहसास हुआ कि वह अधेड़ उम्र का आदमी कौन था। वह कोई और नहीं बल्कि शहर के पुलिस कमिश्नर, जयंत सिन्हा थे।सी सी टीवी फुटेज देखते हुए कमिश्नर जयंत के चेहरे पर मुस्कान थी। उनके लहज़े में तारीफ झलक रही थी जब उन्होंने कहा, "कबीर, क्या तुम्हारे सिर में अभी भी दर्द है? तुमने बहुत बढ़िया काम किया है। हमें तुम्हारी इस बहादुरी का इनाम देना ही होगा। चलो, मेरे साथ चलो!"

कबीर शर्म से अपना हाथ खुजलाने लगा जब कमिश्नर जयंत ने उसे सिटी हॉस्पिटल ले जाने का इंतज़ाम किया। हालांकि उसकी सारी रिपोर्ट्स नॉर्मल आईं, लेकिन जयंत ने ज़िद की कि कबीर को कुछ समय के लिए निगरानी में रखा जाए। उन्होंने कबीर के लिए अस्पताल के सबसे अच्छे प्राइवेट रूम का इंतज़ाम किया और सबको बताया कि वह ड्यूटी के दौरान घायल हुआ है।

अस्पताल के उस कमरे का बिस्तर कबीर की ज़िंदगी का सबसे आरामदायक बिस्तर था। जब वह वहां लेट गया और सब लोग चले गए, तो उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपने अंदर मौजूद उस "सिस्टम" को समझने की कोशिश की।उसके दिमाग की आँखों के सामने डेटा की एक स्क्रीन उभर आई। उस पर लिखा था:

होस्ट:कबीर शर्मा।
तकत (Power):8 (वयस्क पुरुषों का औसत स्तर 10 अंक है।)फुर्ती (Dexterity):9 (वयस्क पुरुषों का औसत स्तर 10 अंक है।)सहनशक्ति (Stamina): 9 (वयस्क पुरुषों का औसत स्तर 10 अंक है।)कौशल (Skills):जासूसी आँख (Eye of Detection - पैसिव स्किल), चोट से उबरने में निपुणता, अचूक निशाना, हैमर फिस्ट (हथौड़ा मुक्का)।विश पॉइंट्स (Wish points):1 / 10 फ्री डिस्ट्रीब्यूशन एट्रीब्यूट पॉइंट: 1

कबीर मन ही मन थोड़ा मुस्कुराया। अब जब उसके पास इस पर ध्यान देने का समय था, तो उसे एहसास हुआ कि यह सिस्टम उसके पसंदीदा कंप्यूटर गेम, 'विश सिस्टम ऑल-स्टार्स' जैसा लग रहा था। ऐसी अफवाह थी कि गेम बनाने वाले ने इसे अपनी असल ज़िंदगी के तजुर्बे पर बनाया था, और हालांकि कबीर हमेशा यही उम्मीद करता था कि काश यह सच हो, लेकिन उसने कभी हकीकत में ऐसा होने की उम्मीद नहीं की थी।लेकिन अब जब यह उसके अपने दिमाग में हो रहा था, कबीर को लगने लगा कि शायद उन अफवाहों में कुछ सच्चाई थी। या फिर सिर पर आग बुझाने वाला भारी सिलेंडर लगने से सच में उसके दिमाग पर कोई गहरा असर हुआ था...

कुछ आजमाने का फैसला करने से पहले कबीर एक पल के लिए झिझका। उसने सिस्टम को अपना फ्री पॉइंट अपनी 'फुर्ती' (Dexterity) में जोड़ने के लिए कहा, यह सोचकर कि अगर कभी कोई मुसीबत आई तो भागने में काम आएगा। उसकी खुशी का ठिकाना न रहा जब उसने नंबरों को बदलते देखा और उसकी फुर्ती बढ़कर 10 पॉइंट हो गई। क्या यह सच में हो रहा था? क्या वह सच में रीयल-लाइफ का 'विश सिस्टम ऑल-स्टार' बन गया था?

अस्पताल का गाउन पहने हुए ही कबीर ने साइड टेबल से अंगूर का गुच्छा उठाया और खड़ा हो गया। जैसे ही वह वार्ड से बाहर निकला, वह अपने मन में चिल्लाया, "आई ऑफ़ डिटेक्शन (Eye of Detection)!"

तुरंत ही, उसे अपने सामने खड़ी एक युवा नर्स के शरीर से लाल रोशनी निकलती हुई दिखाई दी। 'आई ऑफ़ डिटेक्शन' के तहत कोई भी जीवित इंसान अगर लाल चमक रहा था, तो इसका मतलब था कि उस पल उसकी कोई अधूरी इच्छा थी।उसने देखा कि वह नर्स किसी जल्दी में थी, इसलिए वह उसके पास गया और बड़ी नम्रता से पूछा, "एक्सक्यूज़ मी सिस्टर, क्या बात है? कोई परेशानी है क्या?"






वह युवा नर्स दिखने में भोली-भाली और प्यारी सी थी। उसे देखकर लग रहा था जैसे उसने हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी की हो। उसने घबराहट के साथ कबीर को देखा और बोली, "मेरे एक मरीज़ का एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) का इंजेक्शन गायब हो गया है! मैं क्या करूँ? अगर वह नहीं मिला, तो हेड नर्स मुझे कच्चा चबा जाएगी! हो सकता है मुझे नौकरी से भी निकाल दे!"

"एनेस्थीसिया?" कबीर ने चारों ओर देखते हुए पूछा। अचानक उसकी नज़र एक चीज़ पर पड़ी और उसने धीमी आवाज़ में कहा, "हिलना मत।""क्या!?" नर्स तुरंत रुक गई और खौफज़दा होकर उसे देखने लगी।कबीर ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और नर्स के कान के पास से होता हुआ पीछे ले गया। कबीर की नज़रों से वह युवा नर्स थोड़ी झेंप गई। कबीर ने उसकी शर्ट के पीछे से टेप का एक टुकड़ा उखाड़ा और उसके सामने कर दिया। उस टेप से एक छोटी सी शीशी चिपकी हुई थी।

"क्या तुम इसे ही ढूंढ रही हो?"र्स सन्न रह गई। "हाँ! यही तो है!"कबीर ने मुस्कुराते हुए शीशी उसे पकड़ा दी। "मानना पड़ेगा, पीठ पर एनेस्थीसिया चिपकाकर घूमने का हुनर हर किसी में नहीं होता!"नर्स शर्म से लाल हो गई और उसने कबीर से शीशी ले ली। उसे धन्यवाद कहकर वह तुरंत दूसरे वार्ड की तरफ भाग गई।अरे, मैंने अभी तक तुम्हारा नाम तो पूछा ही नहीं!" कबीर ने पीछे से आवाज़ लगाई, लेकिन तब तक वह जा चुकी थी।"डिंग! आपने नर्स की इच्छा पूरी की और उसे बचा लिया। आपको एक विश वैल्यू (Wish Value) मिलता है।"उसके दिमाग में सिस्टम की आवाज़ गूंजी।

"हीही," कबीर मन ही मन हंसा, "ये तो बहुत आसान है!"अब तक कबीर का मूड बहुत अच्छा हो चुका था। जैसे ही वह कॉरिडोर में आगे बढ़ा, उसने दो नर्सों को अपनी ओर आते देखा। उनमें से पच्चीस-छब्बीस साल की एक नर्स ने उसे एक व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ देखा और पूछा, "क्या तुम उसके बॉयफ्रेंड हो?"कबीर ने हैरानी से सिर हिलाया और कहा, "मैं तो उसे जानता भी नहीं। क्यों? तुम्हें इससे क्या मतलब?"नर्स ने ताना मारते हुए कहा, "अगर तुम उसे नहीं जानते, तो अपने काम से काम रखो!"

"ओह?" कबीर ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। उसे समझ आ गया था कि इन नर्सों के इरादे ठीक नहीं हैं। "मुझे एक बात समझ नहीं आ रही। वो इतनी बेवकूफ तो नहीं लग रही थी कि खुद ही अपनी कॉलर पर दवा की शीशी चिपका ले... ये तुम दोनों की ही हरकत थी, है ना?"दूसरी नर्स ने कबीर को घूरते हुए हिकारत से कहा, "तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम हमारे बीच में पड़ो! यहाँ आस-पास के लोगों को देखो। क्या तुम्हें सच में लगता है कि तुम्हारे जैसे आदमी की हमारी बातों में दखल देने की औकात है?"

कबीर ने सच में चारों ओर देखा, और उसे एहसास हुआ कि यह जगह काफी शांत थी। यह वार्ड किसी आम मरीज़ के वार्ड से कहीं ज़्यादा शानदार तरीके से सजाया गया था। उसे समझ आ गया कि यहाँ भर्ती मरीज़ या तो बहुत अमीर होंगे या बहुत रसूखदार।दूसरे शब्दों में कहें तो, उसे शहर के सबसे अच्छे अस्पताल का सबसे बेहतरीन कमरा मिला था। यह एक फाइव-स्टार सुविधा वाली जगह थी। पुलिस विभाग ने उस पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबानी कर दी थी।

कबीर स्थिति समझ गया और नर्सों की ओर सिर हिलाते हुए बोला, "तो बात ये है। यहाँ के सारे मरीज़ वीआईपी (VIP) हैं, है ना? और वो नई नर्स तुम दोनों से ज़्यादा खूबसूरत है। मुझे यकीन है कि यहाँ के सारे अमीर और बड़े लोगों का ध्यान उसी पर जाता होगा। तुम दोनों उससे जलती हो क्योंकि वह तुम्हारे 'अमीर मुर्गे फंसाने' के रास्ते में कांटा बन रही है।"

कबीर थोड़ा हंसा और बोला, "इसीलिए तुम दोनों उसे अपनी घटिया चालों से यहाँ से भगाना चाहती हो, है ना? लेकिन मैंने तुम्हारा प्लान चौपट कर दिया, तो तुम दोनों यहाँ मेरा मज़ाक उड़ाने आ गईं?"पहली नर्स ने यह सुनकर मुँह बनाया। "खूबसूरत? वो? वो तो एक बदसूरत और बेवकूफ लड़की है!"

"हा!" कबीर उन दोनों की इस घटिया सोच पर हंस पड़ा। उसने इधर-उधर देखा और पास ही लगे एक शीशे की ओर इशारा करते हुए बोला, "जाकर ज़रा आईने में अपनी शक्ल देखो। अगर तुम्हें वो बदसूरत लगती है, तो फिर तुम दोनों क्या हो?"नर्सों ने शर्मिंदगी से उसकी ओर घूरा। अचानक कबीर के दिमाग में एक नोटिफिकेशन की आवाज़ आई। 

"डिंग! आपने नई नर्स को परेशान करने की इन नर्सों की इच्छा को चकनाचूर कर दिया है। आपको एक एट्रीब्यूट पॉइंट (Attribute Point) मिलता है!""डिंग!"*सिस्टम की आवाज़ फिर आई। "आपने आपका मज़ाक उड़ाने की इन नर्सों की इच्छा को भी खत्म कर दिया है। आपको एक और एट्रीब्यूट पॉइंट मिलता है!"

उन दोनों नर्सों की बोलती बंद करके कबीर ने दो और एट्रीब्यूट पॉइंट हासिल कर लिए थे। वह इतना खुश था कि उसे किसी और चीज़ की परवाह नहीं रही, वह बस मुस्कुराया और कॉरिडोर में आगे बढ़ गया।नर्सें उसे जाते हुए देखती रहीं। उनमें से एक ने चिढ़ते हुए कहा, "ये गँवार खुद को समझता क्या—"इससे पहले कि वह अपनी बात पूरी कर पाती, कोई चीज़ हवा में उड़ती हुई सीधे उसके खुले मुँह में जा गिरी।

कबीर अभी ज़्यादा दूर नहीं गया था। उसने अपने हाथ में लिए गुच्छे से एक अंगूर हवा में उछाला था और बोला, "अच्छा होगा कि तुम दोनों दूसरों के मामलों में टांग अड़ाने के बजाय अपनी हरकतों पर ध्यान दो।"अंगूर नर्स के गले में अटक गया और वह खांसने लगी। उसने कबीर से लेकर अपने बगल में खड़ी नर्स की ओर देखा, और उसे अपनी साथी की आँखों में भी वही घबराहट नज़र आई जो वह खुद महसूस कर रही थी।

जैसे ही कबीर लिफ्ट में चढ़ा, अचानक उसे अपनी गर्दन के पीछे कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ। उसने उस जगह पर ज़ोर से थप्पड़ मारा और एक मच्छर को कुचल दिया।"डिंग! आपने आपका खून पीने की मच्छर की इच्छा को कुचल दिया है। आपको एक एट्रीब्यूट पॉइंट मिलता है!"हैं?" कबीर ने सोचा, "सच में? क्या ये भी गिना जाता है!?"वह अचानक ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा। इसका मतलब तो यह था कि उसे बस कुछ मच्छरों को मारना है, और वह जितने चाहे उतने एट्रीब्यूट पॉइंट हासिल कर सकता है!

लेकिन जैसे ही उसके दिमाग में यह विचार आया, सिस्टम की आवाज़ फिर से गूंजी, **"डिंग डोंग। आप एक दिन में गैर-मानवीय जीवों से केवल दो एट्रीब्यूट पॉइंट ही प्राप्त कर सकते हैं।"कबीर ने एक फीकी मुस्कान के साथ सोचा। शायद यह सिस्टम उतना भी बेहतरीन नहीं था जितना उसने सोचा था।उस दोपहर, उसने एक मरीज़ का बिस्तर लिफ्ट तक ले जाने में एक और नर्स की मदद की, जिससे उसे एक और विश वैल्यू मिल गया। यह काम निपटाने के बाद, वह अस्पताल की बिल्डिंग से बाहर निकला, तो देखा कि शाम घिरने लगी थी।
वह अस्पताल के बगीचे में टहलने लगा, और जब उसने देखा कि आस-पास कोई नहीं है, तो उसने अपना एट्रीब्यूट्स पैनल (Attributes Panel) खोला।

उसने पहले ही तीन फ्री एट्रीब्यूट पॉइंट कमा लिए थे, और उन्हें बिना इस्तेमाल किए ऐसे ही रखे रहना बेवकूफी थी। कुछ देर सोचने के बाद, उसने 1 पॉइंट अपनी ताकत (Power) में जोड़ा और बाकी 2 फुर्ती (Dexterity) में डाल दिए।

अब, उसकी स्टैट्स विंडो कुछ ऐसी दिख रही थी:

होस्ट:कबीर शर्मा
ताकत (Power): 9
फुर्ती (Dexterity):12
सहनशक्ति (Stamina): 10

एट्रीब्यूट पॉइंट्स को सफलतापूर्वक बांटने के बाद, उसे अपने शरीर में एक गर्म धारा बहती हुई महसूस हुई। उसकी नसों और हड्डियों में एक अजीब सी गर्माहट और गजब की चुस्ती आ गई।एक गहरी सांस लेते हुए, उसने ज़मीन से कुछ कंकड़ उठाए और उन्हें फेंकना शुरू किया।"डिंग! अचूक निशाना (Throwing Proficiency) सक्रिय..."खट! कंकड़ बिल्कुल सटीक निशाने पर पास के एक पेड़ की टहनी से टकराया। टहनी एक इंसान के अंगूठे से ज़्यादा मोटी नहीं थी, लेकिन कंकड़ के प्रहार से वह तेज़ी से हिलने लगी।

यह देखकर कबीर खुश भी था और निराश भी। उसे खुशी इस बात की थी कि उसका निशाना इतना अचूक था, लेकिन इस बात का दुख भी था कि उसकी ताकत अभी भी उतनी ज़्यादा नहीं थी। हर कोई ताकतवर बनना चाहता है, और कबीर भी इससे अलग नहीं था।वह अभी यह सोच ही रहा था कि अपनी ताकत में और पॉइंट्स कैसे जोड़े जाएं, तभी पीछे से एक आवाज़ आई, "अरे! कबीर, तुम हो क्या? कबीर शर्मा? इतनी सुहानी शाम है, और तुम यहाँ अकेले मिट्टी में खेल रहे हो।"

आवाज़ सुनते ही कबीर ने अपनी भौहें सिकोड़ीं, लेकिन जब वह मुड़ा, तो सन्न रह गया।उसके सामने एक लड़का और एक लड़की खड़े थे। लड़का लंबा था, उसने महंगे कपड़े पहने हुए थे और करीब बीस साल का लग रहा था। लड़की अठारह-उन्नीस साल की लग रही थी। वह बेहद खूबसूरत थी, उसने एक शानदार ड्रेस पहनी हुई थी, उसके बाल लंबे थे और चेहरा बहुत प्यारा था।

एक पल के लिए, लड़की बस असहज होकर कबीर को घूरती रही। फिर उसने चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा, "कबीर, कितने दिनों बाद मिले!"कबीर का दिल भारी हो गया। वह इस खूबसूरत लड़की को अच्छी तरह जानता था। यह टीना थी, स्कूल के दिनों की उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड।11वीं क्लास में, टीना ने कबीर से ब्रेकअप कर लिया था क्योंकि वह देश के सबसे बड़े बिजनेस टायकून के बेटे को डेट करने लगी थी।

फिर, अपने नए बॉयफ्रेंड के पैसे और रसूख के दम पर, उसने देश के टॉप कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में दाखिला ले लिया था, जो उसका हमेशा से सपना था।उसके बगल में खड़ा लड़का वही अमीर बॉयफ्रेंड, विक्रम सिंघानिया था। विक्रम के पिता करोड़ों के 'सिंघानिया ग्रुप' के चेयरमैन थे, और अफ़वाह थी कि अकेले उनकी प्रॉपर्टी ही हज़ार करोड़ से ज़्यादा की है।

कबीर खामोशी से टीना को देखता रहा। उसके साथ बिताए पलों की यादें आज भी उसे तकलीफ देती थीं। उसके चेहरे पर शांति थी, लेकिन आँखों में एक हल्की सी हलचल साफ देखी जा सकती थी।इस लड़की से अलग हुए सालों बीत चुके थे, लेकिन फिर भी उसके दिल में मिली-जुली भावनाएं थीं। कुछ पल बाद, उसने हल्का सा सिर हिलाया, "हैलो" कहा और जाने के लिए मुड़ गया।

टीना जब कबीर को जाते हुए देख रही थी, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी छा गई।कबीर को इस तरह नज़रअंदाज़ करके जाते देख विक्रम का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वह विक्रम सिंघानिया था, करोड़ों की दौलत का वारिस! उसने इस दो कौड़ी के इंसान से बात करने की पहल की थी, और इस बेवकूफ की इतनी हिम्मत कि वह उसे अनदेखा कर दे?विक्रम को यह अपना भारी अपमान लगा। "रुको!" वह पीछे से चिल्लाया।

कबीर रुका और पीछे मुड़ा। उसने विक्रम की ओर बड़ी बेरुखी से देखा और ऊंची आवाज़ में पूछा, "क्या है?