Elena — Childhood
Elena आठ साल की एक मासूम लड़की थी।
नादान, साफ दिल वाली, और हमेशा खिलखिलाकर हँसने वाली।
वो अपने दोनों भाइयों और परिवार के साथ रहती थी।
हर दिन खुशी से स्कूल जाती, अपने छोटे भाइयों का हाथ पकड़कर उन्हें वापस घर लाती।
उस समय तक उसकी दुनिया बहुत खूबसूरत थी।
लेकिन फिर एक रात सब बदल गया।
उस रात सभी घरवाले साथ बैठे बातें कर रहे थे कि अचानक लाइट चली गई।
लाइट जाना कोई बड़ी बात नहीं थी…
लेकिन उसके बाद जो हुआ, वो Elena ने कभी सोचा भी नहीं था।
वो phone की torch जलाकर अपनी बड़ी माँ के घर चली गई।
कुछ देर बाद जब वो वापस लौटी, तब उसे नहीं पता था कि जिस इंसान पर उसे सबसे ज़्यादा भरोसा था…
वही उसके दिल में पहला डर छोड़ने वाला है।
जैसे ही Elena वापस घर आई, उसके पिता ने उसे प्यार से गोद में उठा लिया।
उस पल Elena बहुत खुश थी…
क्योंकि उसे हमेशा अपने पिता का प्यार चाहिए था।
लेकिन फिर एक छोटी सी बात ने सब बदल दिया।
Elena ने बिना पूछे phone ले लिया था।
बस इसी बात पर उसके पिता ने उसे ज़ोर से जमीन पर फेंक दिया।
कुछ seconds के लिए उसकी साँसें रुक गईं।
जब तक उसकी माँ उसके पास पहुँची…
वो बेहोश होकर जमीन पर पड़ी थी।
शायद वही उसकी जिंदगी का पहला trauma था।
और Elena आज तक नहीं समझ पाई—
उसकी गलती क्या थी?
बिना पूछे phone ले जाना…
या अपने पिता पर भरोसा करना?
उस रात के बाद Elena बदलने लगी थी।
वो अब भी हँसती थी…
अब भी अपने भाइयों के साथ खेलती थी…
लेकिन कहीं न कहीं उसके अंदर एक छोटा सा डर जन्म ले चुका था।
एक ऐसा डर,
जो हर बार उसके पिता के पास आते ही चुपचाप उसकी साँसें रोक देता।
आठ साल की Elena ये समझने की कोशिश करती थी कि आखिर उसने इतना बड़ा क्या कर दिया था।
कई रातों तक वो अपनी माँ के पास लेटे-लेटे बस छत को देखती रहती।
उसकी आँखें भारी होतीं…
पर नींद नहीं आती।
उस दिन के बाद उसने एक चीज़ सीख ली थी—
“हर बात पूछकर करनी चाहिए…
वरना लोग नाराज़ हो जाते हैं।”
धीरे-धीरे उसने खुद को बदलना शुरू कर दिया।
अब वो किसी चीज़ को हाथ लगाने से पहले कई बार सोचती।
बार-बार पूछती।
और अगर कोई जवाब न दे…
तो चुपचाप पीछे हट जाती।
लेकिन उसके अंदर की वो छोटी बच्ची अभी भी अपने पिता से प्यार करती थी।
क्योंकि बच्चे दर्द जल्दी नहीं समझते…
वो बस प्यार ढूँढते रहते हैं।
एक दिन स्कूल से लौटते वक्त उसके छोटे भाई ने उसका हाथ पकड़कर पूछा—
“दीदी, अगर हम गलती करें तो क्या पापा हमें छोड़ देंगे?”
Elena कुछ seconds चुप रही।
फिर उसने हल्का सा मुस्कुराकर कहा—
“नहीं पागल…
parents अपने बच्चों को नहीं छोड़ते।”
लेकिन ये कहते वक्त पहली बार उसकी अपनी आवाज़ काँपी थी।
लेकिन उसने अपने भाइयों को अपने पिता का वो रूप अपने भाइयों को नहीं देखने दिया जो उसने देखा था. कुछ दिनों बाद सब कुछ ठीक होने लगा था या फिर कुछ बड़ा हादसा उसके या उसकी माँ के साथ होने वाला था. क्योंकि Elena के पिता शराब के नशे में उसकी मां को मारते थे. उसकी मां वो सब चुप चाप सब कुछ सह रही थी ,लेकिन कब तक आखिर कब तक??? ..