Chapter 1 — पहली बारिश, पहला प्यार
शाम धीरे-धीरे शहर पर उतर रही थी।
आसमान बादलों से भरा था और बारिश की छोटी बूंदें खिड़कियों पर ऐसे गिर रही थीं जैसे कोई पुराना गीत चुपचाप बज रहा हो।
रिया लाइब्रेरी की सबसे आखिरी टेबल पर बैठी थी।
उसके सामने खुली किताब काफी देर से उसी पेज पर रुकी हुई थी।
असल में वो पढ़ नहीं रही थी… बस बारिश देख रही थी।
उसे बारिश हमेशा से पसंद थी।
क्योंकि बारिश में दुनिया थोड़ी धीमी हो जाती है।
और दर्द… थोड़ा कम महसूस होता है।
तभी किसी ने उसकी टेबल पर गर्म कॉफी रखी।
“तुम हर बार यहाँ अकेली क्यों बैठती हो?”
रिया ने नजर उठाई।
सामने एक लड़का खड़ा था।
हल्की मुस्कान।
थोड़े बिखरे बाल।
और आँखें… जो अजीब तरह से सुकून देती थीं।
“तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?”
रिया ने ठंडे स्वर में कहा।
लड़का हँस पड़ा।
“फर्क नहीं पड़ता… बस जानना चाहता था।”
“क्यों?”
“क्योंकि शायद मैं भी अकेला हूँ।”
रिया कुछ पल उसे देखती रही।
फिर पहली बार उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
“रिया।”
“आरव।”
उसने हाथ बढ़ाया।
और शायद वहीं से उनकी कहानी शुरू हुई।
उस दिन के बाद आरव अक्सर लाइब्रेरी आने लगा।
कभी किताब लेने के बहाने… कभी सिर्फ उसे देखने के लिए।
रिया धीरे-धीरे बदल रही थी।
अब उसे सुबहें थोड़ी अच्छी लगने लगी थीं।
कॉफी पहले से ज्यादा मीठी लगने लगी थी।
और बारिश… पहले से ज्यादा खूबसूरत।
एक शाम दोनों कॉलेज की छत पर बैठे थे।
ठंडी हवा चल रही थी।
आरव ने अचानक पूछा—
“अगर किसी दिन मैं तुम्हारी जिंदगी से चला जाऊँ तो?”
रिया ने तुरंत जवाब नहीं दिया।
उसने आसमान की तरफ देखा और धीमे से बोली—
“कुछ लोग चले जाने के बाद भी नहीं जाते।”
आरव बस उसे देखता रह गया।
उस पल उसे एहसास हुआ…
वो रिया से प्यार करने लगा है।
लेकिन कहानियाँ कभी इतनी आसान नहीं होतीं।
कॉलेज फेस्ट की रात थी।
चारों तरफ लाइट्स, संगीत और बारिश की खुशबू फैली हुई थी।
रिया अकेली खड़ी भीगते आसमान को देख रही थी जब पीछे से एक आवाज आई—
“तुम अब भी बारिश में खो जाती हो…”
रिया का दिल अचानक रुक सा गया।
वो आवाज…
जिसे वो हजार बार भूलना चाहती थी।
कबीर।
उसका पहला प्यार।
वही लड़का जिसने दो साल पहले बिना कुछ कहे उसे छोड़ दिया था।
रिया की आँखें भर आईं।
“तुम वापस क्यों आए हो?”
उसने कांपती आवाज में पूछा।
कबीर उसकी तरफ धीरे-धीरे बढ़ा।
“क्योंकि मैं तुम्हें कभी भूल नहीं पाया।”
बारिश और तेज हो गई।
रिया कुछ बोल नहीं पाई।
उसी समय दूर खड़ा आरव सब देख रहा था।
उसने पहली बार रिया की आँखों में वो दर्द देखा… जो शायद उसके लिए कभी नहीं था।
उस रात तीन लोग बारिश में खड़े थे—
एक जिसे पुराना प्यार वापस चाहिए था…
एक जो नया प्यार खोने से डर रहा था…
और एक लड़की… जिसका दिल दो अधूरी कहानियों के बीच फँस गया था।
रिया पूरी रात सो नहीं पाई।
एक तरफ आरव था…
जो उसकी टूटी हुई मुस्कानों को जोड़ रहा था।
और दूसरी तरफ कबीर…
जो उसकी सबसे खूबसूरत याद बन चुका था।
बारिश खिड़की पर लगातार गिरती रही।
और रिया बस एक ही बात सोचती रही—
“क्या पहला प्यार सच में कभी खत्म होता है…
या वो हमेशा दिल के किसी कोने में जिंदा रहता है?”
✧ Quote ✧
“कुछ लोग हमारी जिंदगी में देर से आते हैं…
लेकिन इतना प्यार दे जाते हैं कि पुराने ज़ख्म भी उनसे छुप नहीं पाते।”
Some times tears like rain.