First Rain, First Love - 3 in Hindi Love Stories by priyanka katiyar books and stories PDF | पहली बारिश, पहला प्यार - 3

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पहली बारिश, पहला प्यार - 3


   शहर उस रात अजीब तरह से शांत था।
बारिश लगातार हो रही थी, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया किसी तूफ़ान के आने का इंतज़ार कर रही हो।
रिया अपनी खिड़की के पास बैठी थी।
टेबल पर आरव की दी हुई छोटी सी कॉफी मग रखी थी… और हाथों में कबीर का पुराना खत।
उसकी जिंदगी अब दो हिस्सों में बँट चुकी थी।
एक हिस्सा वो था जहाँ पहली मोहब्बत अब भी सांस ले रही थी।
और दूसरा वो… जहाँ किसी ने टूटे दिल को फिर से धड़कना सिखाया था।
लेकिन हर कहानी में एक पल ऐसा आता है…
जब इंसान को फैसला करना ही पड़ता है।
और शायद वो रात वही पल थी।
फोन अचानक बजा।
रिया ने काँपते हाथों से फोन उठाया।
दूसरी तरफ आरव था।
उसकी आवाज बहुत धीमी थी।
“रिया… क्या तुम मिल सकती हो?”
बारिश बहुत तेज थी।
रिया जल्दी-जल्दी सड़क पार करती हुई उस पुराने पुल तक पहुँची जहाँ वो और आरव अक्सर मिला करते थे।
वहाँ सिर्फ एक स्ट्रीट लाइट जल रही थी।
और उसके नीचे आरव खड़ा था।
भीगा हुआ।
चुप।
और टूटा हुआ।
रिया धीरे-धीरे उसके पास गई।
“क्या हुआ?”
आरव कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर हल्का सा मुस्कुराया।
“मैं जा रहा हूँ।”
रिया का दिल जैसे अचानक रुक गया।
“क… कहाँ?”
“लंदन।”
बारिश की आवाज अचानक बहुत भारी लगने लगी।
“कब?”
“कल सुबह।”
रिया कुछ बोल ही नहीं पाई।
आरव ने नजरें झुका लीं।
“मुझे यहाँ रहकर हर दिन तुम्हें खोने का डर नहीं झेलना।”
उसकी आवाज काँप रही थी।
“और शायद… कुछ दूरियाँ इंसान को बचा लेती हैं।”
रिया की आँखें भर आईं।
“तुम भाग रहे हो…”
आरव हँस पड़ा… लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे।
“हाँ।
क्योंकि मैं पहली बार किसी से इतना प्यार करने लगा हूँ कि खुद को भूल गया हूँ।”
रिया का दिल दर्द से भर गया।
उसने धीरे से पूछा—
“अगर मैं तुम्हें रुकने को कहूँ तो?”
आरव कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
बारिश उसके चेहरे पर गिर रही थी।
“तो क्या तुम सच में मुझे चुन पाओगी?”
रिया चुप हो गई।
और वही चुप्पी आरव के सारे सवालों का जवाब थी।
उसने हल्के से सिर झुका लिया।
“मैं समझ गया।”
उस रात रिया पूरी तरह टूट गई।
वो घंटों बारिश में चलती रही।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसका दिल क्या चाहता है।
तभी उसका फोन फिर बजा।
कबीर।
रिया ने कॉल उठाई।
“रिया, हमें मिलना होगा।”
कबीर उसी पुराने कैफे में उसका इंतज़ार कर रहा था।
रिया उसके सामने बैठ गई।
कबीर ने उसकी आँखें देखीं और तुरंत समझ गया कि वो रोई है।
“क्या हुआ?”
रिया ने धीरे से कहा—
“आरव जा रहा है।”
कुछ पल खामोशी रही।
फिर कबीर ने पूछा—
“और तुम उसे रोकना चाहती हो?”
रिया की आँखों से आँसू गिर पड़े।
“मुझे नहीं पता…”
कबीर उसे बहुत देर तक देखता रहा।
फिर अचानक मुस्कुराया।
“झूठ।”
रिया ने उसकी तरफ देखा।
कबीर की आँखें नम थीं।
“तुम जानती हो सबसे दर्दनाक चीज क्या होती है?”
रिया चुप रही।
“जब इंसान उस लड़की की आँखों में किसी और के लिए डर देखे… जिसे वो खुद सबसे ज्यादा प्यार करता हो।”
रिया की सांसें भारी होने लगीं।
कबीर धीरे से बोला—
“तुम उससे प्यार करती हो, रिया।”
रिया रो पड़ी।
“लेकिन मैं तुम्हें भी भूल नहीं पाई…”
कबीर मुस्कुराया।
इस बार उसकी मुस्कान में अजीब सा सुकून था।
“पहला प्यार भूलने के लिए नहीं होता।”
उसने धीरे से कहा—
“लेकिन हर पहला प्यार आख़िरी नहीं बनता।”
रिया की आँखों से लगातार आँसू गिर रहे थे।
कबीर ने पहली बार उसका हाथ पकड़ा…
लेकिन इस बार उसे रोकने के लिए नहीं।
छोड़ने के लिए।
“जाओ।”
रिया ने काँपती आवाज में पूछा—
“और तुम?”
कबीर ने नजरें झुका लीं।
“कुछ लोग कहानी में इसलिए आते हैं… ताकि इंसान प्यार पर फिर से विश्वास कर सके।”
उसकी आवाज टूट गई।
“लेकिन मंज़िल कोई और होता है।”
रिया अब खुद को रोक नहीं पाई।
वो रोते हुए कबीर से लिपट गई।
और शायद उसी पल…
दो साल पुराना दर्द आखिरकार खत्म हुआ।
अगली सुबह एयरपोर्ट लोगों से भरा हुआ था।
रिया भागते हुए अंदर आई।
उसकी सांसें तेज थीं।
आँखें लाल।
वो लगातार आरव को ढूँढ रही थी।
तभी उसने उसे देखा।
आरव खिड़की के पास खड़ा था… हाथ में टिकट लिए।
रिया धीरे-धीरे उसके पास गई।
आरव ने उसे देखा और हल्का सा मुस्कुराया।
“तुम आ गई।”
रिया की आँखों से आँसू बहने लगे।
“तुम बिना मिले चले जाते?”
आरव ने नजरें झुका लीं।
“आसान होता।”
रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“और अगर मैं तुम्हें जाने ना दूँ तो?”
आरव की सांस रुक गई।
रिया रोते हुए बोली—
“मैंने बहुत कोशिश की समझने की कि मेरा दिल कहाँ है…”
उसकी आवाज काँप रही थी।
“और हर बार जवाब तुम्हारे पास आकर रुक गया।”
आरव की आँखें भर आईं।
रिया मुस्कुराई… आँसुओं के बीच।
“कबीर मेरी सबसे खूबसूरत याद था…”
उसने धीरे से कहा—
“लेकिन तुम… मेरा घर हो।”
आरव अब खुद को रोक नहीं पाया।
उसने तुरंत रिया को गले लगा लिया।
एयरपोर्ट की भीड़, अनाउंसमेंट्स, आवाजें… सब धीरे-धीरे गायब हो गईं।
बस दो लोग बचे थे…
जो आखिरकार एक-दूसरे तक पहुँच गए थे।
कुछ देर बाद आरव ने धीमे से पूछा—
“अगर फिर कभी तुम्हारा दिल टूट गया तो?”
रिया हल्का सा हँसी।
“तो इस बार तुम कहीं मत जाना।”
आरव ने उसके माथे को छुआ।
“कभी नहीं।”
कुछ महीनों बाद।
बारिश फिर उसी शहर पर गिर रही थी।
रिया अपनी खिड़की के पास बैठी थी।
लेकिन इस बार वो अकेली नहीं थी।
आरव उसके पास बैठा कॉफी बना रहा था।
रिया मुस्कुराई।
उसे अचानक एहसास हुआ—
कुछ लोग जिंदगी में तूफ़ान बनकर आते हैं…
और कुछ लोग घर बन जाते हैं।
कबीर उसकी अधूरी कहानी था।
लेकिन आरव… उसका हमेशा था।
और शायद यही प्यार का सबसे खूबसूरत सच है—
हर वो इंसान जिसे हम दिल से चाहते हैं, हमारी किस्मत नहीं होता।
लेकिन जो इंसान हर दर्द के बाद भी हमारा हाथ नहीं छोड़ता…
असल में वही हमारा घर होता है।
✧ Final Quote ✧
“कुछ लोग हमारी जिंदगी में बारिश बनकर आते हैं…
और कुछ लोग वही छत बन जाते हैं जिसके नीचे दिल आखिरकार सुकून से जीना सीखता है…”