Row Agent - 1 - 30 in Hindi Detective stories by bhagwat singh naruka books and stories PDF | रॉ एजेंट सीजन 1 - 30

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रॉ एजेंट सीजन 1 - 30

अजय सिंह वहा से जल्दी निकल जाता है ,, और वो लड़की सेव फिर से आने जाने वालों को बेचने लगती है अजय सिंह के जाते ही उसकी शॉप पर कई नए ग्राहक आ जाते है )

उधर अजय सिंह गाडी लेकर जैसे ही मेन गेट पर पहुंचा तो वहा पर वही गार्ड खडा था मोहमद पप्पू जिसने अजय सिंह को उसके पिता के आने की ख़बर दी,, उसको देख कर अजय सिंह ने गाड़ी रोकी,,,,, उसको देख कर वो गार्ड हल्के से मुस्कुरा दिया दो गार्ड जो थोडा दूर खड़े थे ,वो बातो में लगे हुए थे ।
अजय सिंह ____तुम तो आज छुट्टी पर थे , लेकिन फिर वापिस क्यू आए,,।
गार्ड ____ हा छुट्टी पर ही था , लेकिन जो खास मेहमान आने वाले थे ,वो चले गए तो सोचा सारा दिन घर क्या करुगा,तो चला आया ड्यूटी पर ,, आप बताओ आपका दिन कैसा रहा बाहर का,,।
अजय सिंह ____(इधर उधर देखते हुए बोला) तू आज छुट्टी करो,,, और जल्दी मेरे कमरे मैं आओ।
गार्ड ___जी जनाब,, आप चलिए मैं आता हूं,,
(अजय सिंह गाडी लेकर अन्दर चला जाता है उसको जाते देख दोनो गार्ड उसको सलाम करते है , और वो मोहमद पप्पू गार्ड अपना हथियार उन दोनो को भुला कर दे देता है )
गार्ड ____ देखो आज मैं छुट्टी पर हु जनाब ने बोला है कुछ काम वो करके आता हू और कल मिलते है फिर ,,, अच्छा अल्लाह अफीज,,



अजय सिंह का रुम _______
अजय सिंह अपने रुम में जाता है और साथ लेकर गए बैग को एक तरफ फेकता है और अपने कपड़े जल्दी से बदलता है ,तब तक वहा वो गार्ड आ जाता है ,,, क्या मैं अंदर आ सकता हु,,
अजय सिंह ____(सामने कुर्सी लगी हुई उस पर आराम से बैठ जाता है ) हा,, आओ,, बैठो,,
(दोनो आमने सामने बैठ जाते है ,) तो ये बताओ पहले की तुम्हारा असली नाम क्या है ??
गार्ड ____ (चेहरे पर हलकी सी मुस्कान लेते हुए) नाम,,,, नाम का तो ये है मिस्टर ips अजय सिंह जी की,,, मुझे खुद नही पता की मेरा असली नाम क्या है और आखरी बार कब मैने अपना खुद का असली नाम लिया हो या किसी को बताया हो ,,, हर बार नया मिशन तो नाम भी नया,,, नेपाल गया तो वहा उनके जैसा नाम ,, भूटान गया तो वहा वही नाम,, बैंकॉक गया वहा उनके जैसा नाम , मतलब की धरती के हर देश में रहा हू,तो अब आप बताओ मेरा नाम असली में कहा याद रहेगा,,।
अजय सिंह ____ तो मैं किस नाम से भुला सकता हु,,,,,
गार्ड मोहम्मद पप्पू ____ वही,, जिस नाम ये यहां जानते है मुझे,, मोहम्मद पप्पू??
अजय सिंह ____लेकिन ये कुछ अजीब नही ,,,नाम पप्पु ,,, इस नाम से जोक बहुत बनते है अपने देश में पता है ना,,।
मोहम्मद पप्पू ___(हंसते हुए) पता है ,, खास कर ये पप्पु जब से पॉपुलर हुआ है जब से , राहुल गांधी,, कुछ भी उल्टा सीधा बोल देते थे।
(दोनो एक साथ हंसने लग जाते है , फिर एक पल शान्त होते है अजय सिंह खड़ा होता है )

हवेली का गेस्ट रूम – रात 11 बजे, बाहर सन्नाटा
अजय सिंह उर्फ उस्मान अपने कमरे में टहल रहा है। दरवाजे पर हल्की दस्तक होती है। अजय चौकन्ना होकर दरवाजा खोलता है। सामने मोहम्मद पप्पू खड़ा है, रॉ का डीप स्लीपर एजेंट। उसके चेहरे पर थकान और सालों का दर्द साफ दिखता है।

अजय सिंह: दरवाजा खोलते हुए, चारों तरफ देखकर  
आओ पप्पू भाई, अंदर आ जाओ। कोई देखा तो नहीं? यासीन के आदमी आजकल हवेली के चूहे भी गिन रहे हैं। बैठो...क्या लोगे? ठंडा या गर्म? या फिर... आवाज़ धीमी करके ...इंग्लिश बोतल? टेंशन कम हो जाएगी।

मोहम्मद पप्पू – रॉ एजेंट: फीकी हंसी हंसता है, सिर हिलाता है  
नहीं उस्मान साहब...माफ करना, अजय सिंह जी। पानी बस। इसके अलावा कुछ नहीं। इस धरती पर 9 साल से हूं। यहां की हवा में नफरत है, पानी में धोखा है। बस पानी ही एक चीज़ है जो हलक से नीचे उतरती है बिना शक किए। शराब पी ली तो नींद आ जाएगी, और नींद इस काम में मौत है।

अजय चुपचाप उठता है, जग से पानी गिलास में डालता है और पप्पू को देता है। पप्पू एक सांस में पूरा गिलास खाली कर देता है।

अजय सिंह: सामने कुर्सी पर बैठते हुए  
हम कई बार मिले पप्पू भाई। तुमने मेरी सलामती की दुआ की, मैंने तुम्हारा शुक्रिया किया। लेकिन तुमने कभी बताया नहीं कि तुम्हारा और हमारा एक ही मिशन है। कि तुम भी उसी तिरंगे की कसम खाए हो जिसकी मैंने खाई है। क्यों छुपाया इतने दिन?

मोहम्मद पप्पू: गिलास टेबल पर रखता है, आंखें बंद करके गहरी सांस लेता है  
कैसे बताता आपको अजय जी? आप तो नए नए हो यहां पर। आपकी आंखों में अभी भी दिल्ली की चमक बाकी है। और हां, आपका तो ये पहला मिशन है ना? पहला मिशन आदमी को हीरो बना देता है। लेकिन मैं...मैं तो कई सालों से इस अंधेरे में काम कर रहा हूं। जब से 26/11 का मुंबई हमला हुआ, तभी से। तब से आज तक, बस इंतजार। इंतजार कि कोई आएगा, कोई कंधा देगा। लेकिन अकेला आदमी कर भी क्या सकता है अजय सिंह जी?

पप्पू की आवाज़ भर्रा जाती है। वो रुकता है, खुद को संभालता है।

मोहम्मद पप्पू: आगे बोलता है, आवाज़ में कड़वाहट  
मुझे तो कई बार लगता है कि हमारी सरकार ही गलत थी पहले। जो काम हमें दिया है, वो हमें करने दिया जाए। लेकिन हर बार कोई ना कोई नेता, मंत्री, ब्यूरोक्रेट हमारे काम में उंगली कर देता था। 'अरे रुक जाओ', 'अभी नहीं', 'डिप्लोमेसी खराब हो जाएगी'। अरे डिप्लोमेसी गई तेल लेने। मेरे कई साथी तो इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। अनवर भाई, शर्मा जी, नज़ीर...सब। और कई कराची की जेलों में पड़े सड़ रहे हैं। कोट लखपत, मच्छ जेल, सेंट्रल जेल हैदराबाद...वहां हमारे 30-35 भाई बंद हैं। कोई तो था अजय जी, कोई अपना ही था जो हमारी रॉ एजेंट की ख़बर यहां ISI और पाक फौज को बेचता था। और हमारे एजेंट एक-एक करके पकड़े जाते थे, टॉर्चर होते थे, मारे जाते थे।

अजय अवाक रह जाता है। वो उठकर पप्पू के पास जाता है।

अजय सिंह: विश्वास नहीं हो रहा  
गद्दार? हमारे बीच में? ये कैसे हो सकता है पप्पू भाई?

मोहम्मद पप्पू: आंसू अब गालों पर आ गए हैं  
हां अजय जी। मेरी भी जानकारी लीक की गई थी 2014 में। यासीन मलिक मेरे पीछे पड़ गया था। बस पकड़ने ही वाला था। लेकिन सही समय पर आपके पिता...विक्रम सूद सर ने मुझे ऐसी जगह भेज दिया...बलूचिस्तान के पहाड़ों में। 6 महीने एक गुफा में रहा। वहीं से मैं 2015 में वापस आया, वो भी आपके पिता के कहने पर। उन्होंने कहा, 'पप्पू, अभी मरने का वक्त नहीं आया। तुझे उस्मान का इंतजार करना है'। अपनी मातृभूमि को देखे कई वर्ष बीत गए अजय जी। धौलपुर की मिट्टी की खुशबू क्या होती है, भूल गया हूं।

अजय से रहा नहीं जाता। वो खड़ा होता है और पप्पू को गले लगा लेता है। दोनों की आंखें नम हैं।

अजय सिंह: गला रुंधा हुआ  
शांत दोस्त, शांत। तेरा इंतजार खत्म हुआ। मैं आ गया हूं। और अब बहुत जल्दी ही हम भारत जाएंगे। सबको लेकर जाएंगे। तेरे साथियों को, तुझे, और इस मिशन की जीत को। वादा रहा।

मोहम्मद पप्पू: अलग होकर, आंसू पोंछते हुए  
अब तो मुझे उम्मीद है अजय जी। मोदी जी जब से आए हैं, तब से एक उम्मीद की किरण नज़र आई है। 2014 से पहले...मैने तो सोच ही लिया था अब तो यहीं दफन होना है। किसी गुमनाम कब्र में, 'ना नाम, ना निशान'। लेकिन अब...अब लगता है कि दिल्ली में कोई तो है जो हमारी सुनता है। जो कहता है 'घर में घुसकर मारेंगे'।

अजय सिंह: मुट्ठी भींचकर  
उम्मीद पर ही दुनिया कायम है पप्पू भाई। और अब देखना हम मिलकर कैसे एक-एक हमारे एजेंटों को यहां से निकाल कर ले जाएंगे। कोट लखपत की एक-एक बैरक खाली कराएंगे। और जिस काम के लिए मैं और विजय यहां आए हैं, वो भी करके जाना है। वो अब्बू कासिम का सर्वर, वो सोशल मीडिया का जाल...सब खत्म करेंगे। वैसे ये बताओ, यहां की जेलों में कितने एजेंट होंगे हमारे?

मोहम्मद पप्पू: उंगलियों पर गिनता है  
यही कोई 30 से 35 लोग पक्के वाले। रॉ, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस के। और कुछ ऐसे भी हैं जिनकी कोई गलती नहीं। बेचारे मछुआरे, गलती से बॉर्डर पार कर गए। सरकार ने अपने फायदे के लिए उनका मिसयूज किया, फिर भूल गई। और हां, कुछ ऐसे भी एजेंट हमारे जो अकेले हैं, डीप कवर में। उनको तुम्हारी बहुत जरूरत है। हम सब साथ मिलकर एक ताकत बन सकते हैं अजय जी। यासीन मलिक अकेले से नहीं टूटेगा।

अजय सिंह: जोश में खड़ा हो जाता है  
चलो देर आए दुरुस्त आए पप्पू भाई। अब मुझे तुम्हारी और उन देश प्रेमियों की जरूरत है। आज से हम एक टीम हैं। तू मेरा लेफ्ट हैंड, विजय राइट हैंड। और मैं...मैं इस जंग का चेहरा बनूंगा।

मोहम्मद पप्पू: सीना चौड़ा करके  
ज़रूर अजय सिंह जी। हम तो कब से इस दिन का इंतजार कर रहे हैं। और हां, ये सच है कि 2014 के बाद से हमें ये उम्मीद हो गई कि अब हम अकेले नहीं रहने वाले। मैं पीएम साहब का दिल से शुक्रिया करता हूं। उन्होंने हमें आवाज़ दी है। और हां, जब से तुमने और तुम्हारे साथी ने जो अब्बू कासिम और उस कमांडर पर हमला किया, तब से तो हम आप दोनों के इस कायल हो गए। वो एक करारा तमाचा है ISI संगठन के आकाओं के गाल पर। पूरी कराची में चर्चा है कि 'उस्मान' ने चीफ के घर में घुसकर गोली खाई और जिंदा बच गया।

अजय सिंह: शर्म से मुस्कुराता है  
बहुत बहुत शुक्रिया आपका पप्पू भाई। तुम्हारे जैसे लोग असली हीरो हो। मैं तो बस मोहरा हूं। अब हम दो दिन बाद मिलकर आगे का प्लान रेडी करेंगे, क्योंकि दो दिन बाद विजय डोभाल भी आ जाएगा। तब तक तुम कुछ नए सबूत इकट्ठे करो। यासीन के सर्वर रूम के ब्लूप्रिंट, गार्ड की ड्यूटी का चार्ट, कुछ भी। तब तक मैं भी कुछ प्लान बनाता हूं। यौम-ए-दुआ वाली रात...वही हमारी 'डी-डे' होगी।

मोहम्मद पप्पू: उठते हुए, सलाम करता है  
अच्छा तो मैं चलता हूं अजय जी। आप आराम करो। कोई चीज की जरूरत हो तो याद करना। ये मेरा नंबर है। जेब से एक कार्ड निकालकर देता है इस पर 'मोहम्मद पप्पू – इलेक्ट्रिशियन' लिखा है। यही मेरी कवर है।

पप्पू दरवाजे की तरफ बढ़ता है। अजय पीछे से आवाज़ देता है।

अजय सिंह:  
लेकिन तुमने बताया नहीं पप्पू भाई...तुम्हारा घर कहां पर है? धौलपुर में कहां? कभी आऊंगा फ्री होकर, तुम्हारी मां के हाथ का चूरमा खाने।

पप्पू रुकता है। हल्का सा घूमता है। उसकी आंखों में एक समंदर का दर्द है। आवाज़ बहुत धीमी है।

मोहम्मद पप्पू:  
राजस्थान के धौलपुर जिले में गांव है छोटा सा...बसेड़ी के पास। नाम है 'पुरा का नगला'। अब तो शायद बहुत बदल गया होगा। वहां एक बूढ़ी मां होगी, अगर जिंदा हुई तो। 9 साल से उसकी आवाज़ नहीं सुनी।

इतना कहते हुए वो तेज़ी से बाहर निकल जाता है, जैसे आंसू छुपा रहा हो। अजय दरवाजे पर एक मिनट सुन्न खड़ा रहता है। 'पुरा का नगला'...नाम सुनते ही उसके दिल में कुछ टूटता है।

वो धीरे से दरवाजा बंद करता है, पलटता है और अपने बैग से वही लिफाफा निकालता है जो उसके पिता दे गए थे। कुर्सी पर बैठकर कांपते हाथों से उसे खोलता है। लिफाफे के ऊपर लिखा है: 'जब सब खत्म हो जाए, तब पढ़ना'।

अजय सिंह: मन ही मन, लिफाफा देखते हुए  
पापा...आप क्या छुपा रहे हो मुझसे? पप्पू भाई 9 साल से अपनी मां से नहीं मिला। मैं 28 साल से...कहीं मैं भी तो किसी से नहीं बिछड़ा हुआ? यौम-ए-दुआ...उस रात सिर्फ मिशन खत्म नहीं होगा। शायद मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई भी सामने आएगी।

अजय लिफाफा एक तरफ रख देता है। उसे खोलने की हिम्मत नहीं होती। बाहर अज़ान की आवाज़ आ रही है। अजय खिड़की से कराची की रोशनियों को देखता है। उसकी आंखों में अब सिर्फ मिशन नहीं, अपने अतीत का एक अनसुलझा सवाल भी तैर रहा है।

Next episode upcoming 

लेखक:भगवत सिंह नरूका ✍️