bebashi ki had in Hindi Thriller by vishnupriya pandit books and stories PDF | हैरानी - Ateet ki Yaadein - 20

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 20

Episode - 20 (बेबसी की हद)


कुछ दिन बीत गए रिया एक जिंदा लाश बन चुकी थी , न आंखों में आसूं थे , न जुबा पर कोई शब्द । तभी घर के बाहर कार रुकने की आवाज आई उसके पिता (मिस्टर दीक्षित) आए थे । रिया की बुझती हुई आंखों में एक चमक आई , " पापा मुझे यहां से ले जाएंगे!" 


लेकिन वह नहीं जानती थी कि बाहर ड्राइंग रूम में खेल रचा जा चुका था । गौरव और उसकी मां ने बड़ी चालाकी से झूठे आसू बहा कर रिया के पिता के कान भर दिए थे । 

"पापा जी मैं रिया से बहुत प्यार करता हूं, लेकिन रिया ..... है कि समझती ही नहीं , आज भी उसी आर्यन के सपने देखती है । यह कहती है कि काश ... मैं उससे शादी न करता तो वह खुश रहती । बताओ पापा जी यह क्या बात हुई, मै तो उसके चरित्र पर उंगली न उठे इसलिए बारात वापस नहीं की और ऐसी लड़की से शादी कर ली जो शादी वाले दिन अपने कमरे से गायब हो गई और घर के मुख्य दरवाजे से ऐसी हालत में आई कि लोग तरह - तरह की बाते बनाने लगे। पर ... मैने लोगों की बाते सुन कर भी एक बार अपने बारे में नहीं सोचा। लेकिन वह तो मुझे अपना पति ही नहीं मानती , और तो और मेरे सामने वह गैर मर्द का नाम लेती है । उसे मेरी नहीं तो कम से कम मेरे खानदान की मर्यादा का तो लिहाज करना चाहिए।" 

जब रिया लड़खड़ाते हुए बाहर आई और अपने पिता के गले लगकर रोना चाहा, तो उसके पिता ने उसे बांहों में भरने के बजाय झटक दिया । उनकी आंखों में ममता नहीं, बल्कि घृणा थी ।

"बस रिया ! और शर्मिंदा मत कर मुझे ," पिता की आवाज पत्थर जैसी सख़्त थी । " गौरव जैसा एक नेक इंसान मिला है तुझे । फिर भी तू उसकी इज्जत नहीं करती , जिसने तेरी बदचलनी के बाद भी तुझे अपनाया। तुझे उसकी कदर नहीं , तू आज भी उस मरे हुए आर्यन के पीछे पागल है ? तुझे शर्म नहीं आती कि अपने पति के सामने किसी गैर मर्द का नाम लेती है, धिक्कार है मुझ पर कि मैने तुझे जन्म दिया । " 

रिया ने गिड़गिड़ाते हुए कहा , " पापा , मेरी बात सुनिए ... यह सच नहीं है ! ये मुझसे प्यार नहीं बल्कि नफरत करता है मारता है मुझे , पापा मुझे अपने साथ घर ले चलिए ! " 

पर गौरव ने तुरंत बीच में आकर रिया का हाथ ऐसे पकड़ा जैसे उसे संभाल रहा हो , पर असल में वह उसकी कलाई मरोड़ रहा था । उसने भारी आवाज में कहा- " पापा जी, इसे आराम की जरूरत है शायद यह सदमे में है।" 

मिस्टर दीक्षित बिना रिया की तरफ देखे मुड़ गए ।" रिया जब तू एक अच्छी संस्कारी पत्नी बन जाएगी , तभी मैं तेरी सकल देखूंगा , गौरव बेटा इसका ख्याल रखना ।" 

दरवाजा बंद हुआ और रिया के पापा चले गए । घर के अंदर सन्नाटा छा गया । गौरव ने रिया को दीवार से सटाया और उसके कान में धीरे से फुसफुसाया, " सुना तुमने ? अब तुम्हारा बाप भी तुम्हारी सकल तभी देखेगा जब तुम एक अच्छी पत्नी बनोगी । इसलिए अगर तुम चाहती हो कि तुम अपने बाप से मिलो तो पहले मेरी पत्नी बनके रहो समझ रही हो न तुम .... मेरी पत्नी, " वह रिया पर गंदी नजर डालते हुए मुस्कुराया।

रिया का शरीर कांपने लगा । वह खुद को संभालते हुए कमरे में गई और आईने के सामने खड़ी होकर फूट - फूट कर रोने लगी "मैने आज सब कुछ खो दिया मेरे पास अब कोई मेरा अपना नहीं बचा।" रिया मन ही मन चीखी" आर्यन! मुझे माफ कर दो। मेरी एक कड़वी जुबान ने तुम्हे मुझसे छीन लिया। आज अगर तुम होते तो, ये गौरव, ये दरिंदगी, ये नर्क ... कुछ भी न होता । तुम मुझे कभी इस हालत में नहीं छोड़ते , जैसे मेरे पापा मुझे छोड़ के चले गए । उन्होंने अपनी बेटी पर भरोसा नहीं किया उस झूठे गौरव की बात मानी।"

उसने आईने में अपनी हालत देखी - गले, चेहरे , हाथों पर गौरव के दिए हुए जख्मों के निशान, आंखों में आर्यन के खोने का गम, पिता की नजरो में गिरना । रिया के पास कोई सहारा नहीं था वह इस दुनिया में अकेली पड़ चुकी थी क्योंकि न माता - पिता का प्यार , न आर्यन और नाही गौरव का साथ क्योंकि वह तो हैवान बन चुका था ।
रिया ने जीने की आरजू छोड़ दी उसने अपने आप को खत्म करने का फैसला किया । कमरे में चारों तरफ सन्नाटा था , ऐसा सन्नाटा जो काट खाने को दौड़ रहा था । रिया ने अपनी दर्द भरी आंखों से उस फंखे को देखा जो छत से लटका हुआ था उसके लिए अब मौत , जिंदगी से कही ज्यादा हसीन लग रही थी।

उसने लड़खड़ाते कदमों से अपनी अलमारी से अपनी सबसे मजबूत साड़ी निकाली। कुर्सी को पंखे के नीचे लगाया साड़ी का फंदा बनाया और उस पंखे से लटका दिया । उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे पर दिल में अजीब सा सुकून था - कि अब कोई दर्द नहीं होगा , कोई गौरव नहीं होगा । 
जैसे ही उसने अपना गला फंदे में डालने के लिए कदम उठाया, कमरे का दरवाजा धड़ाम से खुला, रिया चौक गई ।

"रिया!" गौरव की दहाड़ गूंजी। 

इससे पहले कि रिया कुर्सी से पैर हटाती, गौरव ने उसे हवा में ही दबोच लिया और साड़ी के फंदे को चीरते हुए उसे झटके से बिस्तर पर धकेल दिया । रिया का सिर बेड के कोने से टकराया, पर वह फौरन उठने की कोशिश करने लगी । गौरव ने अपनी पूरी ताकत से उसे बिस्तर पर वापस पटका और उसके दोनों हाथो को कसकर उसके सिर के ऊपर ले जाकर एक हाथ से पकड़ लिया । 

वह रिया के ऊपर झुक गया , उसके चेहरे के इतना करीब की उसकी तेज चलती गर्म सांसे रिया के गालों को झुलसा रही थी ।
गौरव ने अपने दूसरे हाथ से रिया का मुंह कस कर पकड़ा और अपने सामने किया उसकी आँखें रिया की आंखों से टकरा रही थी । "इतनी आसानी से? इतनी आसानी से तुम मुझे छोड़ कर चली जाओगी ?" गौरव की आवाज में पागलपन था । 

रिया तड़पी, उसने अपना चेहरा गौरव से दूर करने की कोशिश की और चिल्लाई, " छोड़ो मुझे ! मुझे मरने दो ! मै खुद को कभी तुम्हे नहीं सौपुंगी, चाहे कुछ भी हो जाए आर्यन के बिना मेरे पास जीने की कोई वजह नहीं बची है तुमने मेरे परिवार से मुझे दूर कर दिया , अब मैं नहीं जिऊंगी, तुम मेरी रूह को नहीं छू सकते , इसलिए मैं मर कर आजाद हो जाऊंगी !"

गौरव की पकड़ और मजबूज हो गई , रिया की कलाइयां पीली पड़ने लगीं । वह धीरे से मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान जिससे शैतान भी डर जाए ।
"मरना चाहती हो ? शौक से मरो । लेकिन याद रखना रिया , जिस पल तुम्हारी जान निकलेगी, उसी पल मै तुम्हारे प्यारे पापा और मां के पास जाऊंगा । और यकीन करो, उन्हें मै इतनी बेरहमी से मारूंगा कि मौत भी उनके लिए तरसेगी । पहले उनकी उंगलियां काटूंगा , फिर उनकी आँखें..... और सब कुछ तुम ऊपर स्वर्ग से बैठ कर देखना ।" 

रिया का पूरा शरीर कांप उठा । उसकी चीख उसके गले में फंस गई । " नहीं .... तुम ऐसा नहीं करोगे । वो तुम्हारे भी कुछ लगते है ..." 

"वो मेरे कुछ नहीं लगते! " गौरव चिल्लाया।"

क्या रिया गौरव से खुद को बचा पाएगी ? क्या वह अपने मां - पापा के पास लौट पाएगी ? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर बताएं ।
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