Mout se Bhagti Dulhan in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | मौत से भागती दुल्हन - 6

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मौत से भागती दुल्हन - 6

वर्तमान समय…विक्रांत शर्मा गुस्से में पागल हो चुका था।उसकी study room पूरी तरह बिखर चुकी थी। टेबल उलटी पड़ी थी। काँच के टुकड़े पूरे floor पर फैले थे। दीवार पर लगी painting तक टूट चुकी थी। लेकिन उसका गुस्सा शांत नहीं हो रहा था।

वो बोला - 
नामुमकिन…!

उसने दहाड़ते हुए whiskey की bottle दीवार पर दे मारी।
धड़ाम!!!
उसके आदमी डर के मारे सिर झुकाकर खड़े थे। किसी की हिम्मत नहीं थी उसकी आँखों में देखने की। विक्रांत की साँसें भारी हो रही थीं।

उसके दिमाग में बार-बार वही नाम गूँज रहा था—
किशिराज।

वो खुद से बड़बड़ाया -
वो वापस नहीं आ सकता…मैंने उसे मरते हुए देखा था…

उसकी आँखों में पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था। क्योंकि दुनिया में सिर्फ़ एक इंसान था…जिससे विक्रांत शर्मा डरता था। और वो था—किशिराज सिंह चौहान।

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तभी उसका खास आदमी धीरे से बोला—
Boss…शायद कोई आपका mind game खेल रहा है…

विक्रांत ने पलटकर उसे देखा। बस एक नज़र। और अगले ही पल—
धाँय!!!
गोली सीधे उस आदमी के पैर में लगी। वो दर्द से चीख पड़ा। बाकी लोग काँप गए। विक्रांत धीरे-धीरे उसके पास गया। फिर झुककर उसका collar पकड़ लिया।

वो बोला - 
किशिराज कोई खेल नहीं था…

उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी।

वो बोला - 
वो अकेला आदमी था…जिसने मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझे खत्म करने की बात की थी।

कमरे में खामोशी छा गई। तभी—
टिक…Study room की सारी lights अपने आप बंद हो गईं।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

एक आदमी डरकर चिल्लाया -
कौन है?!

और उसी पल…Room के बड़े LED screen पर अचानक static आने लगी।
खड़खड़खड़…फिर screen अपने आप on हो गई।
सबकी साँसें रुक गईं। Screen पर एक काली hoodie पहने आदमी खड़ा था। चेहरा अंधेरे में छिपा हुआ।
सिर्फ़ उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी—
भारी… शांत… और खतरनाक।

Screen वाला आदमी बोला- 
कैसा है विक्रांत?

विक्रांत का चेहरा सख्त पड़ गया। उसने screen को घूरा।

वो बोला - 
कौन हो तुम?

उस आदमी ने हल्का सा हँसकर कहा—
इतनी जल्दी भूल गया?
पुल से नीचे गिराने के बाद भी मैं बच गया…

पूरा कमरा सन्न रह गया। विक्रांत की मुट्ठियाँ कस गईं।

वो बोला - 
किशिराज…

Screen वाला आदमी धीरे से आगे बढ़ा।लेकिन उसका चेहरा अब भी shadow में था।

Screen वाला आदमी बोला - 
शादी की तैयारी अच्छी चल रही है।
बस दूल्हा बदलने वाला है।

विक्रांत पागलों की तरह दहाड़ा—
शुभिका मेरी है!!

Screen पर कुछ सेकंड खामोशी रही।

फिर उस आदमी की आवाज़ आई—
गलती वहीं कर रहा है…तू उसे अपनी समझ रहा है।

और तभी Screen पर अचानक शुभिका के कमरे का live footage चलने लगा। वो अपने कमरे में अकेली बैठी थी…मतलब कोई विक्रांत के घर के अंदर तक पहुँच चुका था।

शादी का दिन आ चुका था। पूरा ठाकुर हवेली रोशनी से जगमगा रही थी। बाहर बैंड-बाजे की आवाज़ें गूँज रही थीं। विक्रांत शर्मा की बारात किसी राजा की तरह आने वाली थी। लेकिन दुल्हन के कमरे में…सन्नाटा था।

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शुभिका आईने के सामने बैठी थी। लाल रंग का भारी bridal lehenga…गले में भारी jewellery…माथे पर मांग टीका…लेकिन उसकी आँखें बिल्कुल बेजान थीं। जैसे वो दुल्हन नहीं…
बलि चढ़ने जा रही हो। उसके हाथ काँप रहे थे।
मेहँदी में लिखा नाम—
Kishiraj
अब भी हल्का-हल्का दिखाई दे रहा था।।तभी कमरे का दरवाज़ा तेजी से खुला। उसकी माँ अंदर आईं। उनका चेहरा डरा हुआ था।
आँखें लाल थीं… जैसे बहुत रोई हों।

वो बोलीं - 
शुभी…

उन्होंने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया।

वो बोलीं - 
बेटा… तू यहाँ से भाग जा।

शुभिका चौंक गई।

शुभिका बोली - 
क्या?

माँ ने काँपते हाथों से उसका चेहरा पकड़ा।

वो बोलीं - 
पीछे वाले दरवाज़े से निकल जा…अभी… इसी वक्त…

शुभिका की आँखें भर आईं।

शुभिका बोली - 
नहीं मम्मी…मैं आप दोनों को छोड़कर नहीं जा सकती…

उसकी आवाज़ टूट गई।

वो बोली - 
वो लोग आपको मार देंगे…

तभी पीछे से ठाकुर साहब अंदर आए। आज पहली बार उनकी आँखों में डर नहीं…सिर्फ़ अपने बेटी के लिए दर्द था।

उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा—
हम भी तेरे साथ भाग रहे हैं बेटा…

शुभिका ने shock में उन्हें देखा।

वो बोली - 
सच…?

ठाकुर साहब ने सिर हिलाया।

वो बोले - 
अब और नहीं…मरेंगे तो साथ मरेंगे… लेकिन तुझे उस दरिंदे के हवाले नहीं करेंगे।

शुभिका रो पड़ी।

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कुछ मिनट बाद तीनों चुपचाप पीछे वाले पुराने रास्ते की तरफ बढ़ रहे थे। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी। घर के सारे guards सामने की तैयारी में लगे थे। पीछे वाला हिस्सा लगभग सुनसान था। शुभिका का दिल तेजी से धड़क रहा था। बस कुछ कदम और…और वो आज़ाद हो जाएगी। ठाकुर साहब ने धीरे से पुराना लकड़ी का दरवाज़ा खोला। बाहर अंधेरी सड़क दिखाई दी।

वो बोले - 
जा बेटा…

माँ की आँखों से आँसू बह रहे थे।

मां बोलीं - 
भाग जा…

शुभिका पलटी और बोली - 
लेकिन आप दोनों—

अचानक—

धक्का!!!
उसकी माँ और पापा ने उसे बाहर धकेल दिया। और अगले ही पल धड़ाम!!!
दरवाज़ा अंदर से बंद हो गया।

वो चिल्लाई -
मम्मी!!

शुभिका घबराकर दरवाज़ा पीटने लगी।

वो बोली - 
दरवाज़ा खोलो!!

अंदर से उसकी माँ की रोती हुई आवाज़ आई—
तू भाग जा बेटा…

ठाकुर साहब बोले—
कहीं बहुत दूर चली जा…आज अगर तू रुक गई…

उनकी आवाज़ भर्रा गई।

वो बोले - 
तो वो तुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा…

शुभिका फूट-फूटकर रोने लगी।

वो बोली - 
मैं आपको छोड़कर नहीं जाऊँगी!!

लेकिन तभी सामने सड़क पर कई black SUVs की headlights जल उठीं। शुभिका का दिल रुक गया। धीरे-धीरे पहली SUV का दरवाज़ा खुला। काले जूतों की आवाज़ बारिश में गूँजी।
टक… टक… टक…और अंधेरे से बाहर आया—
विक्रांत शर्मा। उसके हाथ में gun थी। और होंठों पर धीमी मुस्कान।

वो बोला - 
भागकर कहाँ जाओगी, शुभिका…?

शुभिका ने मौका देखते ही विक्रांत के आदमियों को चकमा दिया…
और बस…भाग निकली।

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वर्तमान समय…सड़क पर सुबह की हल्की रोशनी फैल चुकी थी।
लेकिन माहौल अब भी खतरनाक था। शुभिका बिना रुके भाग रही थी। उसके पैर दर्द से काँप रहे थे…साँसें टूट रही थीं…लेकिन वो रुक नहीं सकती थी।

पीछे से आवाज़ें गूँज रही थीं—
उधर है!! पकड़ो उसे!!

काले गाड़ियों के टायर सड़क पर चीख रहे थे। धूल उड़ रही थी…
और हर पल दूरी कम हो रही थी।

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शुभिका ने पीछे मुड़कर देखा। उसकी आँखों में डर था…लेकिन अब हार नहीं थी।

वो बोली - 
नहीं…

उसने खुद से कहा -
मैं अब नहीं रुकूँगी…

और वो सड़क छोड़कर सीधे जंगल की तरफ भाग गई।

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जंगल घना था। ऊँचे पेड़…गीली मिट्टी…और चारों तरफ सन्नाटा।
शुभिका की साड़ी पेड़ों में उलझ रही थी…काँटे उसकी skin को खरोंच रहे थे…लेकिन वो लगातार आगे बढ़ रही थी। पीछे गाड़ियों की आवाज़ धीरे-धीरे कम होने लगी…पर अब खतरा और भी बड़ा था क्योंकि जंगल में रास्ता नहीं था…और वो अकेली थी।

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शुभिका रुककर एक पेड़ के पीछे छिप गई। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। साँसें इतनी तेज़ थीं कि उसे खुद सुनाई दे रही थीं।

वो बोली - 
कहाँ जाऊँ…

उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे। लेकिन तभी झाड़ियों में हलचल हुई।
खर्रर्र…शुभिका ने तुरंत मुँह पर हाथ रख लिया। उसकी साँस रुक गई। और अगले ही पल…किसी के कदमों की आवाज़ उसके बिल्कुल पास आने लगी।
टक… टक… टक…शुभिका की आँखें फैल गईं।
वो समझ गई उसे ढूंढ लिया गया है।

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और तभी…पेड़ के पीछे से किसी की परछाई दिखी। बहुत करीब…
बहुत धीरे…और जैसे ही वो सामने आया शुभिका की चीख गले में ही अटक गई…क्योंकि सामने खड़ा इंसान…उसके लिए नया नहीं था। लेकिन उसका चेहरा अब तक रहस्य बना हुआ था।

और जंगल में उसकी धीमी आवाज़ गूँजी—
भाग क्यों रही हो, शुभिका…

To be continued…