कुछ ज्ञान की बातें 6
महासागर का पानी नीला क्यों
नोट - इस आलेख में कुछ ऐसी प्राकृतिक बातों पर प्रकाश डालने ला प्रयत्न किया गया है जिसे हम अक्सर देखते हैं और उसके बारे में और जानने की जिज्ञासा होती है , इस लेख में पढ़ें महासागर का पानी नीला क्यों…
महासागर ( ocean ) का पानी नीला क्यों दिखता है ?
आपने गौर किया होगा कि अक्सर महासागर हमें नीला ही दिखता है . इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण हैं . इसे लेकर अलग अलग सिद्धांत या विचारधारा है . पहले कहा जाता था कि महासागर नीले आकाश को परावर्तित ( reflect ) करता है इसलिए ब्लू दिखता है . यह आंशिक रूप से सही हो सकता है जब सागर का पानी बिल्कुल स्मूद या शांत रहे और लो एंगल ( lo angle ) से देखा जाय .
वैज्ञानिकों के अनुसार इसके अन्य कारण भी हैं -
गहरे सागर का पानी सूर्य की किरणों में मौजूद ब्लू रंग के शॉर्ट वेवलेंथ को बहुत कम सोखता ( absorb ) है .नीली तरंगों का बिखराव ( scattering ) ज्यादा होता है और ये रिफ्लेक्ट हो कर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं . पानी के अतिरिक्त सागर के जल में अन्य पार्टिकल्स भी ( particles - पदार्थों के सूक्ष्म कण ) होते हैं ,जो ब्लू लाइट को स्कैटर और रिफ्लेक्ट करते हैं . इसलिए अक्सर सागर हमें नीला दिखता है .
कुछ वर्ष पूर्व USGS ( यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ) ने प्लेन से प्रशांत महासागर का फोटो लेकर दिखाया था कि सागर साफ़ नीला है . इसके अतिरिक्त हमारी आँखें नीले रंग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं .
पर यह भी सत्य नहीं है कि सागर का जल हमेशा नीला ही होता है . सागर का रंग कुछ अन्य बातों पर भी निर्भर करता है , जैसे - सागर की गहराई , उसमें मौजूद पार्टिकल्स और सूर्य के प्रकाश की मात्रा कितनी है . इसके अतिरिक्त हमारी आँखें प्रकाश किरणों के जिन वेवलेंथ को देख सकती हैं , इस पर निर्भर करता है . जब किरणें पार्टिकल्स या गैस के अणुओं से गुजरती हैं तब उनका बिखराव और रिफ्लेक्शन इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टिकल्स किस पदार्थ का बना है . ब्लू शॉर्ट वेवलेंथ सागर के नीचे ज्यादा गहराई तक पहुँच सकते हैं क्योंकि पानी के अणुओं द्वारा उनका स्कैटरिंग और रिफ्लेक्शन होते रहता है जबकि लाल रंग के वेवलेंथ ज्यादा एब्जॉर्ब हो जाते हैं . इसलिए हमारी आँखों तक रिफ्लेक्ट होकर ज्यादा ब्लू रंग ही पहुँचता है .
ब्लू के अतिरिक्त सागर अन्य रंगों में भी दिख सकते हैं . कभी यह हरा भी हो सकता है . जब नदियां सागर में मिलती हैं तब उनके द्वारा कभी बहुत ज्यादा वनस्पति ( plant life ) और गाद ( sediments ) सागर में आ जाते हैं . ऐसी स्थिति में ब्लू रंग ज्यादा सोख ( एब्जॉर्ब ) लिया जाता है . प्लांट लाइफ का पीला रंग ब्लू रंग से मिल कर एक नया हरा रंग बनाता है .
कभी सागर का रंग ब्राउन या मिल्की ब्राउन भी हो सकता है . ऐसा अक्सर तूफ़ान के बाद देखा जा सकता है . तूफ़ान सागर की धारा ( current ) के लिए मथनी का काम करते हैं और नदियों द्वारा लाये गए बालू और गाद का मंथन ( churning ) करते हैं . इसलिए कभी सागर का रंग ब्राउन या मिल्की ब्राउन भी हो सकता है .
थोड़ी मात्रा में सागर का जल साफ़ या पारदर्शक क्यों दिखता है - सागर के पानी को थोड़ी मात्रा में ग्लास में रखने पर वह साफ़ दिखता है पर वही पानी सागर में अक्सर नीला दिखता है . गिलास में पानी की मात्रा में अणुओं की संख्या बहुत कम होती है इसलिए किरणों का एब्ज़ोर्प्शन और स्कैटरिंग बहुत कम होता है और लाइट आसानी से पानी के आर पार हो जाता है . सागर तो एक विशाल जल पिंड ( huge body of water ) है .
कुछ सागर तट पर बीच का पानी साफ़ होता है - इसके अनेक कारण हैं -
मोटे और भारी पार्टिकल्स सागर की तली में बैठ जाते हैं और उनका मंथन आसानी से नहीं हो सकता है .
प्लैंकटन ( Plankton ) - जहाँ प्लैंकटन की आबादी कम होगी वहां का पानी कम गंदा होगा . प्लैंकटन अति सूक्ष्म प्लांट और एनिमल के जीवाणु हैं जो स्ट्रांग करंट में तैर नहीं सकते हैं और बहते रहते हैं .
अपवेलिंग ( upwelling ) - अपवेलिंग एक प्राकृतिक क्रिया है जो पृथ्वी के घूमने के कारण होता है . इसमें गहराई से ठंडा और साफ़ पानी सागर की सतह पर आ जाता है .
सागर की धारा - स्ट्रांग कर्रेंट गाद और प्लैंकटन को बहा ले जाता है .
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