Aag aur Therav - 1 in Hindi Short Stories by Alka rahul Aggarwal books and stories PDF | आग और ठहराव - 1

Featured Books
Categories
Share

आग और ठहराव - 1

मुंबई...

एक ऐसा शहर जो कभी नहीं सोता। यहाँ कुछ लोग सपने लेकर आते हैं और कुछ लोगों के सपनों पर राज करते हैं।

अनाया उन्हीं लोगों में से थी जो सपने लेकर आई थी।

सफेद सलवार-कुर्ते में रहने वाली, शांत स्वभाव की, हर किसी की मदद करने वाली अनाया का मानना था कि दुनिया प्यार से जीती जा सकती है।

वहीं दूसरी तरफ था अरमान खान।

मुंबई का सबसे बड़ा बिजनेस टायकून।

लोग कहते थे कि अरमान मुस्कुराता कम है और लोगों को झुकाता ज्यादा है।

जिस उम्र में लोग दोस्त बनाते हैं, उस उम्र में अरमान ने दुश्मनों को हराना सीख लिया था।

उसकी एक आवाज पर करोड़ों का सौदा हो जाता था।

लेकिन उसके दिल तक पहुँचने का रास्ता किसी ने नहीं देखा था।

एक दिन किस्मत ने दोनों को आमने-सामने ला खड़ा किया।

अनाया अपनी NGO के लिए फंड जुटाने एक बड़े बिजनेस इवेंट में पहुँची।

वहीं मुख्य अतिथि था अरमान।

जब अनाया स्टेज पर बच्चों की शिक्षा के बारे में बोल रही थी, तब पूरे हॉल की निगाहें उस पर थीं।

लेकिन अरमान की निगाहें कुछ ज्यादा देर तक उस पर टिकी रहीं।

पहली बार किसी ने उसके सामने बिना डरे अपनी बात रखी थी।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद अरमान उसके पास आया।

"तुम्हें लगता है प्यार से दुनिया बदली जा सकती है?"

अनाया मुस्कुराई।

"कोशिश तो की जा सकती है।"

अरमान हल्का सा हंसा।

"मुंबई में कोशिश नहीं, ताकत चलती है।"

"और हर ताकत एक दिन किसी सच्चे दिल के सामने हार भी जाती है।"

अरमान पहली बार किसी की बात सुनकर चुप हो गया।

उसे अंदाजा नहीं था कि यह लड़की उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा तूफान बनने वाली है।



"जिस लड़की को अरमान कमजोर समझ रहा था, वही अगले दिन उसकी सबसे बड़ी बिजनेस डील रोकने वाली थी..." 🔥

Pehli takkar 

अरमान पूरी रात अनाया के बारे में सोचता रहा।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक साधारण सी लड़की उसकी बातों का इतनी बेखौफी से जवाब कैसे दे सकती है।

सुबह होते ही वह अपने ऑफिस पहुँचा।

मुंबई के सबसे ऊँचे कॉर्पोरेट टॉवर की 45वीं मंजिल पर बने अपने केबिन में बैठा वह करोड़ों की एक डील फाइनल करने वाला था।

यह डील शहर की एक पुरानी बस्ती को तोड़कर वहाँ लग्जरी प्रोजेक्ट बनाने की थी।

अरमान के लिए यह सिर्फ बिजनेस था।

लेकिन उन हजारों परिवारों के लिए उनका घर।

मीटिंग शुरू ही हुई थी कि अचानक दरवाजा खुला।

सबकी नजरें उधर घूम गईं।

दरवाजे पर अनाया खड़ी थी।

"ये प्राइवेट मीटिंग है," एक मैनेजर ने कहा।

लेकिन अनाया बिना डरे अंदर आ गई।

"मुझे सिर्फ पाँच मिनट चाहिए।"

अरमान अपनी कुर्सी पर पीछे झुक गया।

"तुम यहाँ क्या कर रही हो?"

"उन लोगों के लिए आई हूँ जिनकी आवाज तुम तक नहीं पहुँच रही।"

उसने कुछ फाइलें टेबल पर रख दीं।

"जिस जमीन पर तुम प्रोजेक्ट बनाना चाहते हो, वहाँ रहने वाले लोगों को गलत जानकारी देकर बेदखल किया जा रहा है।"

कमरे में सन्नाटा छा गया।

अरमान ने फाइल उठाई।

कुछ देर तक पन्ने पलटता रहा।

उसका चेहरा सख्त हो गया।

"तुम मुझे सिखाओगी कि बिजनेस कैसे किया जाता है?"

अनाया ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,

"नहीं... बस ये याद दिला रही हूँ कि पैसे कमाने और इंसानियत खोने में फर्क होता है।"

अरमान को गुस्सा आ गया।

उसकी पूरी टीम डर के मारे चुप थी।

क्योंकि आज तक किसी ने अरमान खान से इस लहजे में बात नहीं की थी।

"गार्ड!"

अरमान की आवाज गूँजी।

लेकिन अनाया के चेहरे पर डर का नामोनिशान नहीं था।

वह मुस्कुराई।

"सच को बाहर निकाल सकते हो, मिटा नहीं सकते।"

इतना कहकर वह चली गई।

कमरे में फिर खामोशी छा गई।

अरमान खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।

नीचे भागती हुई मुंबई दिखाई दे रही थी।

लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक चेहरा घूम रहा था।

अनाया।

उधर अनाया को नहीं पता था कि उसने किस आदमी को चुनौती दी है।

और इधर अरमान ने फैसला कर लिया था—

या तो यह लड़की उसकी बात मानेगी...

या फिर उसे झुकना पड़ेगा।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

क्योंकि उसी रात अनाया पर हमला होने वाला था...