Kalu ki Pahadi - 5 in Hindi Spiritual Stories by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | कालू की पहाड़ी - 5

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कालू की पहाड़ी - 5





कार्तिक और रूही अपने साथ तीन पवित्र चीज लेकर आए थे, 

एक तो भगवान शंकर का पवित्र त्रिशूल।

दूसरा जब वह मनाली के शिव मंदिर में गए थे तब वहां से भगवान शंकर की जटाओं, में से जो जल नीचे गिर रहा था जो उनके चरणों का पवित्र जल। जल गंगाजल उसे भी अपनी एक बोतल में रखकर लाए थे।
और तीसरी चीज भगवान शंकर के चरणों की पवित्र भस्म।

क्योंकि वह दोनों बहुत ही धार्मिक और संस्कारी परिवार से थे और मैं इस बात को जानते थे। कि जब अच्छाई होती है तो बुराई भी होती है भगवान है, तो शैतान भी है और जो लोग कह रहे हैं वह कोई गलत नहीं, कह रहे होंगे इसमें कुछ ना कुछ सच्चाई तो होगी ही।

पर यह सब जानते हुए भी ना तो वह अपने दोस्तों को यहां आने से रोक पाए और नहीं यहां आकर वह मायावी शैतानी  खाना खाने से।

समय बिता जा रहा था और वह कुछ, नहीं कर पा रहे थे उधर।

मायाजाल का फटना और असली चेहरा


आधी रात का समय था। अचानक, पूरी कोठी की सुनहरी रोशनी नीली पड़ने लगी। 


कार्तिक ने देखा कि जो आलीशान संगमरमर की दीवारें थीं, वे धीरे-धीरे काली पड़ने लगीं और उनमें से गाढ़ा, काला तरल पदार्थ (लहूलुहान कीचड़ जैसा) टपकने लगा।



रूही ने कांपते हुए हाथ से कार्तिक का हाथ पकड़ा। "कार्तिक, देखो! वे घर... वे गायब हो रहे हैं!"


जब दोनों यह सब देखकर, घबरा गए और उन्होंने वह अपने दोस्तों को भी यह सब बताएं और उन्हें उठाकर यहां से बाहर करें।

जैसे ही कार्तिक ने खिड़की के बाहर देखा, उसका दिल दहल गया। जो बगीचे और झरने दिख रहे थे, वे असल में कंकालों के ढेर और कटीली झाड़ियाँ थीं।


वे किसी महल में नहीं, बल्कि पहाड़ी की चोटी पर बनी एक खंडहरनुमा गुफा के मुहाने पर खड़े थे।


तभी डेविड के कमरे से एक दिल दहला देने वाली चीख सुनाई दी।


कालू का आगमन और खूनी खेल


कार्तिक और रूही दौड़कर डेविड के कमरे की ओर बढ़े। वहाँ का नज़ारा देखकर उनकी चीख निकल गई। डेविड ज़मीन पर पड़ा तड़प रहा था, और उसके गले पर किसी ने गहरे नाखून गड़ा दिए थे। 



और मलाइका उसके सामने खड़ी होकर हंस रही थी, और अपने नाखूनों में लगा खून अपनी कोमल जीप से चैट रही थी।


उसके सामने वही 'कुल्हाड़ी वाला साया' खड़ा था।
उस साये का कद सात फीट से ऊपर था। चेहरे की जगह सिर्फ एक काला अंधेरा था, जिसमें दो दहकते हुए अंगारे जैसी आँखें थीं। वह 'कालू' था।



उसने अपनी भारी आवाज़ में कहा, "मीना... यहाँ नहीं है। तुम सब झूठ बोले। अब तुम सब मेरे इस अभिशप्त साम्राज्य के गुलाम बनोगे।"



अचानक, दीपक, मोहित, आरजू और बाकी दोस्त जो उस मायावी खाने को खा चुके थे, अपनी जगह से उठे।


उनकी हरकतें किसी ज़ोंबी (Zombie) जैसी थीं। वे कालू के पीछे लाइन लगाकर खड़े हो गए। उनकी आँखों की पुतलियाँ सफेद हो चुकी थीं।


सिद्ध त्रिशूल और दिव्य रक्षा


कालू पहले तो कार्तिक और रूही के दोस्तों को उसके पीछे खड़ा जाकर हो गए यह, देखकर बहुत जोर से हंसा और फिर अब यह तुम्हारे दोस्त नहीं अब यह मेरे गुलाम है।

और फिर कालू ने अपनी विशाल कुल्हाड़ी उठाई और कार्तिक की तरफ बढ़ा। "तुम दोनों ने मेरा नमक नहीं खाया... तुम अभी भी होश में हो?


तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी पहाड़ी पर पवित्रता लाने की?"


कार्तिक ने तुरंत अपने बैग से वह सिद्ध पीतल का त्रिशूल निकाला। जैसे ही त्रिशूल की चमक उस अंधेरे कमरे में फैली, कालू एक कदम पीछे हटा और तेज़ आवाज़ में गुर्राया।


"रूही! गंगाजल निकालो!" कार्तिक चिल्लाया।
रूही ने कांपते हाथों से गंगाजल की बोतल खोली और अपने और कार्तिक के चारों ओर एक घेरा बना दिया।


जैसे ही कालू ने उस घेरे को पार करने की कोशिश की, ज़मीन से आग की लपटें उठीं। कालू का हाथ झुलस गया और वह दर्द से चीखा। 


उसकी चीख ऐसी थी मानो हज़ारों आत्माएं एक साथ रो रही हों।



कालू जैसे ही उस सुरक्षा घेरे के करीब आया, एक भयानक गर्जना हुई। कार्तिक और रूही द्वारा खींची गई वह लकीर जिसमें गंगाजल, सिद्ध त्रिशूल की शक्ति और महादेव की भस्म समाहित थी, 



अचानक बिजली की तरह कौंधी। जैसे ही कालू का साया उससे फिर टकराया, आग की एक विशाल लपट उठी और उसने कालू को हवा में उछालकर कई फीट दूर पत्थर की चट्टानों पर दे मारा।



कालू का क्रोध अब अपनी सीमाएं लांघ चुका था। उसकी आँखों से दहकता हुआ लावा जैसा लाल प्रकाश निकलने लगा। 



वह ज़मीन से उठा और उसकी आवाज़ किसी फटे हुए नगाड़े की तरह पूरी घाटी में गूँज उठी:


"तुमने मेरे पहाड़ पर मुझसे टकराने की जुर्रत की है! मैं तुम दोनों में से किसी को नहीं छोडूंगा! मुझे मेरी मीना चाहिए... मुझे पता है तुम सब में से कोई न कोई मेरी मीना है! हो सकता है तुम में से ही कोई उसकी रूह को छुपाए बैठा है!"



वह अपनी कुल्हाड़ी ज़मीन पर पटकते हुए पागलों की तरह हँसा और फिर चीखकर बोला:


"और हाँ! तुम में से कोई वह 'आशिक' भी है... वही आशिक जिसने मीना के साथ मिलकर मुझे मारा था! यह प्यार और कुछ नहीं, सिर्फ एक फरेब है, एक धोखा है! तुम जिसे मोहब्बत समझते हो, वह मौत का जाल है!"

उसने कहा मैंने भी बहुत शिद्दत के साथ मोहब्बत की थी मुझे क्या मिला धोखा मौत फरेब तुम्हें, भी मिलेगी वही धोखा वही मौत और फिर और जोर से हंसा।

कालू का साया धीरे-धीरे धुंध में विलीन होने लगा, लेकिन जाने से पहले उसने एक आखिरी खौफनाक चेतावनी दी:


"अभी तो मैं जा रहा हूँ... लेकिन बहुत जल्द वापस आऊँगा तुम सबको पूरी तरह खत्म करने! पर याद रखना, मेरे आने से पहले मेरे ये आठ प्यादे तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।



बच सको तो बच लो कार्तिक और रूही! क्योंकि तुम्हारे इन आठ दोस्तों ने मेरा खाना खाया है, मेरा 'मरण-भोग' किया है... अब ये मेरे गुलाम हैं, मेरे वश में हैं!"



जैसे ही कालू ओझल हुआ, वहाँ एक खौफनाक सन्नाटा पसर गया। लेकिन वह सन्नाटा सिर्फ कुछ ही पलों का था।



अचानक, डेविड, मलाइका, दीपक, आरजू, साहिल, अभिलाषा और बाकी दो दोस्त जो अब तक पत्थर की तरह शांत खड़े थे, एक साथ झटके से हिले। 


उनकी आँखों की पुतलियाँ पूरी तरह सफ़ेद हो चुकी थीं और उनके चेहरों की नसें काली पड़कर उभर आई थीं।


डेविड के मुँह से एक अजीब सी घरघराहट निकली। उसने अपनी मुट्ठियाँ कसीं और उसके नाखूनों से खून रिसने लगा। 


वे आठों दोस्त, जिन्होंने उस मायावी कोठी में कालू का दिया हुआ खाना खाया था, अब इंसानी चेतना खो चुके थे।


वे धीरे-धीरे रेंगते हुए और अजीब तरीके से अपनी गर्दनें मरोड़ते हुए कार्तिक और रूही की ओर बढ़ने लगे। उनके दिमाग में अब सिर्फ एक ही आदेश गूँज रहा था— कालू का आदेश।



"कार्तिक..." रूही ने कांपते हुए त्रिशूल को कस के पकड़ा। "वे हमारे पास आ रहे हैं। उनकी आँखें देखो... उनमें हमारे लिए कोई पहचान नहीं बची है।"



कार्तिक ने देखा कि उसके सबसे पक्के दोस्त अब उसके सबसे बड़े दुश्मन बन चुके थे। उनके कदम किसी शिकारी जानवर की तरह सधे हुए थे।


कालू ने उन्हें अपना हिस्सा बना लिया था। अब उन आठ प्यादों और इन दो बचे हुए दोस्तों के बीच एक ऐसी जंग शुरू होने वाली थी, जहाँ चोट शरीर को नहीं, रूह को पहुँचने वाली थी।