Paraye hue apne - 2 in Hindi Women Focused by Ravnika books and stories PDF | परायें हुए अपने - 2

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परायें हुए अपने - 2

                  ( ससुराल में आगमन )

कुसुम का ससुराल उसके घर से क़रीब 40 किलोमीटर की दूरी पर था जहाँ गाड़ी से पहुँचने में 1 घंटे  से कम वक़्त ही लगता था। कुसुम अपने जेठ से घूँघट करती थी तो उन दोनों के बीच किसी तरह का कोई वार्तालाप नहीं हुआ। कुसुम के मन में बहुत सारे सवाल एक साथ आ रहे थे। 

   उनमे से एक सवाल उसे बार- बार बहुत परेशान कर रहा था कि उसे लेने के लिए अचानक से उसके जेठ क्यू आये अगर आना ही था तो उसके पति आते। फिर वो अपने मन को समझा लेती कि हो सकता हैं वो अपनी माँ के पास हो क्योंकि वो अपनी माँ का बहुत ज़्यादा ही लगाव करता हैं।

क्या पता उन्होंने सोचा हो कि बिना संदेश के मेरा जाना ठीक नहीं और ना जाने डाक से चिट्ठी द्वारा संदेश आने में कितने दिन लग जाते। 

कुसुम अपनी ही सवालो की दुनिया में खोयी हुई थी कि अचानक गाड़ी रुकी तो वो ख़्वाबो की दुनिया से बाहर आयी

वो समझ चुकी थी कि वो अपनी ससुराल पहुँच चुकी हैं। फिर भी वह अपने जेठ की अनुमति का इंतज़ार करने लगी क्योंकि उसने जो दुपट्टा ओढ़ा हुआ था वो बहुत मोटा था और घूँघट करने की वजह से उसे कुछ दिखायी भी नहीं दे रहा था तो वो गाड़ी में ही बैठी रही ।

कुसुम बेटा बच्चे को मुझे दे दो और तुम  उतर जाओ घर आ गया हैं उसके जेठ ने गाड़ी का दरवाज़ा खोलते हुए कहा  

कुसुम ने अपनी गोद वाले बच्चे को जेठ जी को दे दिया और गाड़ी से उतरकर घर के अंदर जाने लगी 

अंदर जाते हुए उसने महसूस किया कि घर की बैठक में बहुत सारे आदमी जमा  हैं  पर ये कोई नयीं बात नहीं थीं क्योंकि उसके ससुराल में आदमियों के बैठने का एक अलग कमरा बना हुआ हैं जिसे गाँवों में बैठक भी कहते हैं  और अक्सर आदमियों का उसके यहाँ आना लगा रहता हैं   पर आज उसे कुछ शांत सा माहोल लगा वो इस बारे में सोच ही रहीं थीं कि अचानक उसे एक पियारी से आवाज़ सुनायी दी मम्मी आप आ गई ये आवाज उसकी साढ़े 4 साल की बेटी की थी जो अपने घर पर अपनी दादी के साथ ही रह गई थी अब तक कुसुम घर के अंदर आ चुकी थी तो उसने अपना घूँघट ऊपर कर लिया  । 

हाँ मेरी बच्ची मैं आ गई हूँ कहते हुए कुसुम ने उसके सिर पर  प्यार से हाथ फिराया और घर में इधर - उधर नज़र दोड़ायी तो महसूस किया कि घर काफ़ी गंदा पड़ा था कही झाड़ू तक नहीं लगी थीं उसे अब बहुत ही अजीब सा महसूस होने लगा था क्योंकि घर बहुत सूना सा था। उसके आने पर उसकी जेठानी या सास बाहर की तरफ़ ना आयी हो उसे लेने आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था ये सब अजीब चीजे महसूस करते हुए उसने साथ चल रही अपनी बेटी से पूछा जिसका नाम नेहा था।

मधु कहाँ हैं बेटी कुसुम ने अपनी बेटी नेहा से पूछा 

मम्मी दीदी को बुख़ार आया हुआ हैं नेहा ने जवाब दिया 

इतना सुनकर उसके पैर घर के अंदर और तेज़ी से पड़ने लगे  

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कुसुम की शादी एक सयुक्त परिवार में क़रीब नौ साल पहले हुई थी । उसके ससुराल में उसकी सास , दो जेठ , दो जेठानी उनके बच्चे , और दो देवर एक देवरानी व चार नन्दे थी उसके एक देवर की शादी दो साल पहले ही हुई थी। कुसुम के ससुर की मर्त्यु क़रीब एक साल पहले ही हो चुकी थी। उसके बड़े जेठ सरकारी कर्मचारी हैं और वो अपने बच्चो और पत्नी को साथ रखते हैं। नन्दों की शादी हो चुकी हैं। उसका पति और छोटा जेठ व बड़ा देवर खेती संभलते हैं   और सबसे छोटा देवर अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहा हैं।

गाँव में कुसुम के ससुराल वालों को एक सम्पन्न परिवार के रूप में जाना जाता हैं। घर के सारे फैसलें छोटा जेठ ही लेता हैं वही घर का मुखिया भी हैं क्योंकि उसका बड़ा जेठ तो बाहर ही रहता हैं।

 कुसुम व उसके पति मुकेश चार बच्चो के माता - पिता हैं और अपने पूरे परिवार के साथ एक अच्छी ज़िंदगी बिता रहे है  । कुसुम व उसके पति को कभी अपने परिवार से अलग होने का ख्याल भी नहीं आता था  । वे दोनों ही परिवार से मिल - जुलकर रहने वाली सोच रखते थे । 

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कुसुम एक सयुक्त परिवार में रहती थी तो उसे कभी अपने बच्चो की देखभाल की ज़्यादा फ़िक्र नहीं थी। इसीलिए उसकी सास के कहने पर वह अपनी दोनों बेटियों को अपने ससुराल ही छोड़ गई थी। और दोनों बेटो को अपने साथ अपने मायके ले गई थीं।ऐसा उसने पहली बार नहीं किया था। अपने छोटे बेटे के जन्म के समय भी उसने अपनी बड़ी बेटी को अपने मायके भेज दिया था । सयुक्त परिवार में यें बातें इतनी बड़ी नहीं मानी जाती सभी बच्चो का एक जैसा ही ख़याल रखा जाता हैं  

अपनी सबसे बड़ी बेटी के बुख़ार की बात सुनकर कुसुम तेज़ी से अंदर की और जा ही रही थीं कि अचानक उसे अपनी सास अपनी तरफ़ ही आती हुई दिखायी दी और साथ में कुछ पड़ोसन भी थी

जिसे देखकर  उसके कदम और तेज हों गये। क्या हुआ हैं माँ जी "उसने लगभग रोते हुए पूछा 

उसकी सास कुछ बोल नहीं पायी बस उसे गले लगाकर रोने लगी  

मेरी मधु को कुछ हुआ हैं क्या उसने रोते हुए पूछा 

कोई कुछ बोल पाता उससे पहले ही मधु आकर कुसुम से लिपटकर रोने लगी जो कि अभी भी बुख़ार से तप रही थी ।मधु के आते ही कई औरते भी अंदर आ चुकी थी जिनमे कुसुम की जेठानी भी थी इतनी सारी औरतो  को देखकर कुसुम समझ गई कि कुछ तो बहुत ग़लत हो चुका हैं अब कुसुम की आँखो के सामने अंधकार छा गया जैसे उसका सब कुछ छीन चुका हो ;