First Love - 1 in Hindi Short Stories by Sah Ankita books and stories PDF | First Love - 1

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First Love - 1

खामोश मुलाकात
"जिंदगी में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब कोई शख्स पहली नजर में ही दिल के तार छेड़ देता है। मेरे साथ भी आज कुछ वैसा ही हुआ। आज मैंने उसे देखा... उसके घर में मेरा पहला दिन था, और दिल की धड़कनें थोड़ी तेज़ थीं।
वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा मेरे ख्यालों में होता था—सांवला रंग, लंबा कद और एक गहरी खामोशी। लोग कहते हैं बोलना एक हुनर है, पर मुझे तो मनीष का यह 'कम बोलना' ही सबसे प्यारा लगा। एक दिलचस्प मंज़र तब हुआ जब वह आईने के सामने खड़ा अपने आप को निहार रहा था। उधर मनीष खुद को देख रहा था, और इधर रोशनी की नज़रें उस पर टिकी थीं। मेरे ज़ेहन में बस एक ही सवाल घूम रहा था—आखिर मैं उसे इतनी शिद्दत से क्यों देख रही हूँ? पर जवाब साफ़ था: वह मुझे पसंद आ गया है, सच में।
रोशनी बेचैन थी मनीष से बात करने को, पर वह अपनी ही दुनिया में मगन था। उसके भाई-बंधु तो हर वक्त वहीं मंडराते रहते हैं, पर पता नहीं क्यों जिसकी मुझे तलाश थी, वही नज़रों से दूर था। खैर, थोड़ी देर बाद वह सामने तो आया, मगर फासला अब भी बहुत था। रोशनी ने कोशिश तो की, थोड़े इशारे किए, कुछ बातें भी कीं, मगर अफ़सोस... वो मनीष जनाब कुछ समझ ही नहीं पाए।"
आज हमारी मुलाकात का तीसरा दिन है। हम सब मिलकर लूडो खेल रहे थे। खेल के बीच में एक ऐसा मौका आया जब मेरी गोटी पर मुसीबत थी, लेकिन मनीष ने बड़े धैर्य और नर्म-दिली से मुझे बचा लिया। उसने मेरी गोटी नहीं काटी! उसके भाई उसे छेड़ने लगे कि ये तो खुलेआम चीटिंग है। उस समय मेरे दिल में बहुत खुशी हो रही थी, पर मुझे अपने चेहरे पर गंभीरता बनाए रखनी थी। मेरा दिल कह रहा था कि ऐसे संकेत मत दो, कहीं मेरा दिल तुम पर पूरी तरह फ़िदा न हो जाए।
सुबह का दृश्य और भी खास था। मनीष ने बड़े शांत भाव से मेरे लिए दातून का इंतज़ाम किया। हालाँकि उसकी बहन ने दूसरे भाई से कहा था, पर मनीष ने ध्यान नहीं दिया और खुद मेरे लिए ये काम किया। आखिर क्यों? क्या वजह थी उसकी? मैं फिर से उसकी इस छुपी हुई ममता की तारीफ़ करने लगी। क्या जो एहसास मेरे अंदर है, वही मनीष के दिल में भी है? शायद हाँ... और ये 'शायद' बड़ा ही रहस्यमयी है।
लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब मनीष ने झूठ का सहारा लिया। उसने मुझसे कहा कि उसकी बहन मुझे बुला रही है, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं उसके भाई (मनीष) के पास न बैठूँ। जब मैंने सच पता किया तो चला कि बहन ने मुझे नहीं बुलाया था। जब मैंने मनीष से इस झूठ का कारण पूछा, तो उसने पूरे हक़ से कहा—'मेरे भाई के पास मत जाना'। इतनी सी बात ने मेरे मन में कई सवाल खड़े कर दिए। क्या ये उसकी चिंता थी या कोई छुपी हुई जलन?"हम तो काफ़ी ज़्यादा खुश थे... लेकिन दिल की इस ख़ुशी को हमेशा बनाए रखने की चाहत में, मैंने भी एक कदम आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया। मनीष से बात करने के लिए मैं बहाने ढूँढने लगी, क्योंकि मुझे एहसास हो गया था कि हमारे पास वक़्त बहुत कम है।
हर पल, हर घड़ी मेरी नज़रें बस मनीष को ही तलाशती थीं। उसे देखते ही मेरे चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान अपने आप तैर आती थी, जिसे मैं चाहकर भी नहीं छुपा पाती थी। शायद यही वो पल था जब मैं पूरी तरह से समझ गई थी कि मुझे उससे पहली नज़र का प्यार हो गया है
धीरे-धीरे रात ढलने लगी थी और डाइनिंग टेबल पर सब खाना खा रहे थे। मैं उसके भाई के बगल में बैठी थी, लेकिन मेरी नज़रें हर पल बस मनीष को ही ढूँढ रही थीं। जब भी वो अपनी जगह पर बैठता, मेरा ध्यान वहीं टिक जाता। मैंने हिम्मत जुटाकर उसके भाई से साफ कह दिया—'मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी, मुझे तो बस मनीष से बात करनी है।' मेरी साफ़गोई के बावजूद मनीष समझ ही नहीं पा रहा था कि मेरे दिल में उसके लिए क्या चल रहा है। उस वक्त डाइनिंग टेबल पर हम सिर्फ खाना नहीं खा रहे थे, बल्कि मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हो रही थी। उस पल ने सब कुछ साफ कर दिया था—मैं पूरी तरह कन्फर्म हो चुकी थी कि मुझे सच में मनीष से मोहब्बत हो गई
है।"

मनीष और रोशनी की इस अनकही दास्तान में आगे क्या मोड़ आएगा, यह जानने के लिए मेरे साथ जुड़े रहें और कहानी पढ़ते रहें।"