Beete Na Raina Part - 8 in Hindi Women Focused by Neeraj Sharma books and stories PDF | बीते न रैना भाग - 8

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बीते न रैना भाग - 8

-------------समय ------------- 

वही वक़्त कि लहरें जो अक्सर दिमाग़ मे उठती है। ग्रेवाल एक दम से सोच ने लगा," कया बलजीत को कल का कुछ भी मालम नहीं, कया बता कर नहीं गया होगा, तीन बच्चो का बाप " ग्रेवाल घर मे था। ऊपर छत पर था, साथ कोई नहीं, अकेला.... बलजीत सिंह कहा चला गया, इतनी दुनिया बड़ी... बच्चा तो है नहीं... आ जायेगा। किसी कश्मक्ष मे ग्रेवाल..... आज कलाज का लेक्चर था... नागरिक शास्त्र का... पूजीवाद और रुपया गण्ड मे हो तो कैसे कोई मार्किट मे लगाए। ये किसी कि पैसे की उथल पुथल समेटना हर कोई कर सकता है... किसी का नहीं... कठिन है मित्र। चलो पीरिड कमबहत था कोई दो बजे के करीब... यूनिवर्सिटी लेवल के मामले मे 👍कुछ कया कहे। ग्रेवाल जाने। तभी दरवाजा खड़का... ग्रेवाल ने कहा-- "खुला है भाई " अंदर था एक स्टूडेंट, नाम था जोन, " "सर मै जोन हु... आप का स्टूडेंट। "  बोला ग्रेवाल --" कया करने आये हो, डिअर जोन। " 

                          "  ---सर ये सविक्स घटिया सी आज फिर फेल हुगा मै सर "  "--आने जाने मै यूनिवांरसटी को कोई फर्क नहीं पड़ता... न भी पढ़ो गे, तो पूजी पति तो यही रहेगा.... कया चाहते हो "-----सर बोरिंग है सब्जेक्ट " हसते हुए ग्रेवाल ने कहा.... " मत आते यही भी तुम, और वहा भी, मौज मस्ती करो, कल का कल देखेंगे। " 

"-------नहीं सर कोई खास काम के लिए आया हु...." अनमने ढंग से कहा ग्रेवाल ने। " एक शक्श मिला रात को, पिया हुआ था, मेरे पास ही है शायद आज हो, वो भी कमबख्त पढ़ाता था! नाम आपकी स्ट्रीट का ही लिया... कहता था किसी ने उसको किसी ने एक गुमनाम जगहा पे इतनी शराब पिला कर लुड़का दिया... ज़ब होश आये तो, कुत्ते मुँह चाट रहे थे, कैसा कयो था उसके साथ।" ------" गंभीर मुद्रा मे पुलिस स्टेशन रिपोट की। " ग्रेवाल ने कहा। 

                                  --------" सर उसकी एडनटी देखि " एक दम से मे चकरा सा गया। आपको उसके साथ मेने कही बार देखा है " ---- "वो  कौन था?" ग्रेवाल ने कहा। "वो बलजीत सिंह थे, बस ---सर" 

"ओह नो ---- कैसे हो गया, कल तो वो अजायबघर जा रहे थे शायद " पर दोनों चुप थे। 

"अब कहा पर होंगे".... उसने वही अंगूठे वाली चप्पल पहनी और साथ मे  कुंडा मार कर निकल पड़ा। पता किया तो पता चला " पुलिस उठा कर ले गयी थी " वो दोने पुलिस थाने पहुंचे।

वहा पर पहले ही कुछ जान पहचान के साथ थे। हरमन प्रधान ने जोर से छुड़ा लिया था..... एक मास्टर पर आरोप बलात्कार का पाते शर्म आनी चाहिए। बस फिर कया... " मुंशी जी रेप का मामला कया है। " 

जर्नीलिस्ट आगे खडे थे... गलतफैमी थी, और कुछ नहीं। " छोड़ो भी बात को " रविदर ने कहा। " कयो छोड़ो.... जवाब चाहिए मुझे, इस लड़की का  रेप फिर किसने किया..... " पुलिस को इतना हो चूका था, हाथ गलत पड़ गया। " ------" इसका मतलब ये नहीं, कोई आगे पीछे नहीं तो कोई केस डाल दो... " ग्रेवाल का चेहरा भख रहा था। अदालत तक छोड़ो गा नहीं... हम शिक्षा कया देंगे बच्चो को, s. H. O. सहाब कया मास्टर के पास कोई लड़की भेजेगा...

-------------" एक बार फिर से सोरी फील करते है सर "

"बहुत खूब ----- कितनी मुश्किल से पढ़ लिख कर हम  डिग्री लेते है... पुलिस ने चार मिनट मे ऐसी तैसी फेर दी।" 

"जनाब इनको जो भी है, इसे ले जाओ... आज कुछ होगा " सब सहम गए। S. H. O. साहब बोला कड़क आवाज मे " ग्रेवाल जी आप चाहते कया है। " ग्रेवाल उनसे भी जेयादा गुसे मे बोला " आख़र कया समझते हो तुम लोग, सोरी से सब मिट जाता है। " अदालत मे हतक दावा कटेंगे.... मिस्टर। " 

फिर कया सब तहश गुस्से मे चल पड़े। बलजीत कौर को कुछ पता नहीं था। वो तो भागी भागी आयी... एक दम से सहमी हुई।