रुद्र प्रताप सिंह... इस नाम से पूरा शहर काँपता था। बिजनेस की दुनिया का एक ऐसा बेताज बादशाह, जिसके एक इशारे पर अच्छे-अच्छों की किस्मत बदल जाती थी। रुद्र जितना अमीर था, उतना ही खूंखार और जिद्दी भी। उसकी डिक्शनरी में 'हार' और 'माफ़ी' जैसे शब्दों के लिए कोई जगह नहीं थी। आज तक जिसने भी रुद्र के रास्ते में आने की हिम्मत की, वह या तो पूरी तरह बर्बाद हो गया या फिर हमेशा के लिए गायब हो गया। लोग उसे दिलरुबा और बेरहम दोनों कहते थे, क्योंकि उसका चेहरा जितना हैंडसम था, उसका गुस्सा उतना ही खतरनाक था।
कल रात रुद्र के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने उसकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया। वह अपनी चमचमाती ब्लैक कार से एक सुनसान रास्ते से गुज़र रहा था, जहाँ शहर की एक पुरानी और डरावनी हवेली थी। अचानक, कार के सामने एक साया आया। रुद्र ने तेज़ी से ब्रेक मारा। टायर ज़ोर की आवाज़ के साथ सड़क पर घिसट गए।
सामने चाँद की रोशनी में एक लड़की खड़ी थी। उसने गहरे नीले रंग की एक बेहद खूबसूरत पोशाक पहनी हुई थी। उसकी आँखें जादुई थीं—एकदम गहरी और शांत, लेकिन उन आँखों में बदले की एक ऐसी आग चमक रही थी जिसे रुद्र पहली ही नज़रमें पहचान गया। वह कोई साधारण लड़की नहीं लग रही थी, उसकी चाल में एक महारानी जैसा घमंड और रहस्य था। रुद्र कार से बाहर निकला, लेकिन पलक झपकते ही वह लड़की उस घने सन्नाटे और धुंध में कहीं गायब हो गई।
"कौन थी वह? इस शहर में किसी की इतनी हिम्मत कि मेरी कार के आगे आ जाए?" रुद्र आज अपने आलीशान केबिन में बैठा यही सोच रहा था। उसने अपने सबसे भरोसेमंद बॉडीगार्ड विक्रम को बुलाया।
"सर, आपने जिस लड़की का हुलिया बताया था, हमने पूरे शहर में उसका पता लगाने की कोशिश की। लेकिन अजीब बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड या सीसीटीवी कैमरों में उसकी कोई इंफॉर्मेशन नहीं मिली। ऐसा लगता है जैसे उसका कोई पास्ट (भूतकाल) है ही नहीं। वह हवा की तरह आई और गायब हो गई," विक्रम ने डरते हुए सिर झुकाकर कहा।
रुद्र ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ काँच का ग्लास ज़ोर से टेबल पर पटका। ग्लास के टुकड़े-टुकड़े हो गए और उसके हाथ से खून की एक पतली लकीर बहने लगी, लेकिन रुद्र के चेहरे पर दर्द की एक शिकन तक नहीं आई। उसने अपनी खूंखार आँखों से देखते हुए ठंडे लहजे में कहा, "इस शहर में ऐसी कोई चीज़ नहीं है, जिसे रुद्र प्रताप सिंह ढूँढना चाहे और वह न मिले। वह मेरी दुश्मन की तरफ से भेजी गई कोई चाल है या खुद मेरी कोई पुरानी दुश्मन... मुझे नहीं पता। लेकिन जो भी है... वह मेरी ज़िंदगी का सबसे दिलचस्प और खतरनाक रहस्य बन चुकी है। उसे ढूँढो, चाहे पाताल से ही क्यों न निकालना पड़े!"
उसी रात, जब घड़ी में ठीक बारह बजे, रुद्र अपने ऑफिस के केबिन में बैठा कुछ ज़रूरी डील्स की फाइल्स चेक कर रहा था। अचानक, पूरे ऑफिस की लाइट्स गुल हो गई। चारों तरफ घाना अंधेरा छा गया। रुद्र ने एक सेकंड भी गंवाए बिना अपनी दराज से गन निकाली और अलर्ट पोजीशन में खड़ा हो गया। उसे समझ आ गया था कि कोई उसकी जान लेने आया है।
तभी केबिन की बड़ी सी काँच की खिड़की के पास एक साया उभरा। चाँद की हल्की सी रोशनी जब खिड़की से अंदर आई, तो रुद्र की आँखें फटी की फटी रह गईं। वहाँ वही नीली पोशाक चमक रही थी। वह 'मिस्टीरियस क्वीन' थी। वह खामोशी से केबिन के अंदर दाखिल हुई।
"रुद्र प्रताप सिंह... बहुत घमंड है न तुम्हें अपनी इस बेशुमार दौलत, इस ताकत और इस गन पर?" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक, मीठापन और साथ ही एक गहरा खौफ था।
रुद्र ने तुरंत गन का निशाना उसकी तरफ तान दिया, लेकिन उसकी उूँगली ट्रिगर दबाने से पहले ही रुक गई। अपनी पूरी ज़िंदगी में पहली बार रुद्र का दिल किसी को देखकर इतनी तेज़ी से धड़का था। नफ़रत, गुस्सा और एक अजीब सा आकर्षण (Attraction) का तूफान उसके अंदर उठा, जिससे वह खुद अनजान था। वह लड़की मौत बनकर आई थी, लेकिन लग रही थी अप्सरा जैसी।
"कौन हो तुम? और मुझसे क्या दुश्मनी है तुम्हारी? यहाँ क्या चाहती हो?" रुद्र ने अपनी कड़क और भारी आवाज़ में पूछा।
लड़की धीरे से मुस्कुराई, उसकी वो जादुई मुस्कान अंधेरे में और भी रहस्यमयी लग रही थी। वह बिना डरे रुद्र के बिल्कुल करीब आ गई, इतनी करीब कि रुद्र उसकी साँसों की गर्माहट महसूस कर सकता था। उसकी आँखों में सीधे देखते हुए उसने कहा, "मैं तुम्हारी बर्बादी का वो खूबसूरत जाल हूँ रुद्र... जिससे तुम चाहकर भी कभी बाहर नहीं निकल पाओगे। तुमने कितनों की दुनिया उजाड़ी है, अब तुम्हारी बारी है। खेल तो अब शुरू हुआ है, माय डियर एनिमी।"
इससे पहले कि रुद्र उसे पकड़ पाता या कोई एक्शन लेता, लड़की ने फुर्ती से फर्श पर एक स्मोक बम (धुआँ पैदा करने वाला बम) फेंका। पूरे कमरे में घना सफेद धुआँ फैल गया और रुद्र को खाँसते हुए पीछे हटना पड़ा। जब दो मिनट बाद धुआँ छँटा और लाइट्स वापस आईं, तो वह लड़की वहाँ से जा चुकी थी। लेकिन रुद्र की टेबल पर एक गहरा लाल गुलाब का फूल रखा था—जिसकी पंखुड़ियों पर किसी नुकीली चीज़ से खुरचकर लिखा था: "जल्द मिलेंगे, रुद्र...