"सुबह के 7:00 बजे थे। मुंबई के एक बस्ती सीता विहार के खोली नंबर 16 से आवाज आ रहे थी।.....माही आज पूरी सब्जी पैक कर देना बेटा।"
"माही...... जी मामा जी।"
".....माही मैं पोहा खाऊंगी।"
" माही...... ठीक है रिमझिम।"
".....माही खाने में दाल चावल, रोटी और पालक के सब्जी बना देना।"
" माही...... जी मामी।"
" और सबसे लास्ट में आवाज आई। घर की सबसे बड़ी सावित्री देवी की....... कोई सांस तो ले लेने दो उस बेचारी को। सुबह 5:00 बजे से उठकर काम में लगी हुई है। बाकी सब सिर्फ खाना ही जानते हो। वह बोल ही रहे थे। तभी किचन से हाथ में चाय का कप लिए निकली हमारी माही।"
" ग्रे कलर की प्रिंटेड सलवार कुर्ती दुपट्टा को एक कंधे में डालकर कमर पर कसकर बांध रखी थी और अपनी मीडियम साइज बालों की चोटी की हुई माथे पर छोटी सी बिंदी हाथों में कांच के कुछ चूड़ियां पैरों में पायल और होठ पर बड़ा सा स्माइल लिए बहुत प्यारी लग रही थी हमारी माही। माही का पूरा नाम महिमा सेन ! उसके पापा धीरज सेन और मां दीप्ति पटेल 10 साल पहले ही गुजर गए थे। एक एक्सीडेंट में। इसके बाद उसके मामा दीपक पटेल उसको अपने साथ मुंबई ले आए। यहां उसके मामा दीपक पटेल, मामी चारू लता उनकी बेटी रिमझिम जो माही की बेस्ट फ्रेंड भी है और नानी सावित्री देवी रहती है।"
" माही दिखने में बहुत सुंदर है। दूध सी सफेद रंग 5 फीट 5 इंच हाइट छोटा सा गोल चेहरा जैसे कोई फुर्सत से बनाया हो और सबसे अट्रैक्टिव उसकी काली गहरी आंखें जिसमें हर कोई डूब जाना पसंद करेगा। तीखी लंबी नाक और गुलाब की पंखुड़ी जैसे गुलाबी होठ।उसकी आवाज बहुत ही प्यारी सी और उससे भी ज्यादा प्यारा उसका बोलने का शलीका।"
" माही अपनी नानी को चाय देते हुए बोली......... नानी आप ना ज्यादा सोचो मत मैं सारा काम कर लूंगी। कोई प्रोब्लम नहीं है मुझे।"
" नानी....... कैसे ना सोचूं बेटा? 11 साल की थी तू जब दीपू तुझे कोलकाता से लेकर आया था और तब से तू ही घर का सारा काम करती है, और तुम्हारी मामी सिर्फ बैठी-बैठी फैलती जा रही है। सिर्फ एक ही काम है उसके पास तुम्हारे ऊपर चिल्लाना।"
" माही .......नहीं नानी ऐसे मत बोलिए। अगर मामा मामी और आप नहीं होते तो पता नहीं मेरे साथ क्या होता। मेरे काका और काकी मां तो मुझे बेच देते कोलकाता के उस बदनाम गली में। सिर्फ आप लोगों के वजह से मैं इज्जत की जिंदगी गुजार पा रही हूं। और देखिए भले ही दिन में पढ़ने ना जा पाऊँ पर रात के स्कूल और कॉलेज में पढ़कर BA तो पास कर लीना। "
"नानी .......हां बेटा! और वह भी इतने अच्छे नंबर से ईश्वर करे तुझे कहीं अच्छी नौकरी मिल जाए। "
"माही........ हां नानी !आज मामा जी से बात करनी है नौकरी के बारे में वह मेरी और रिमझिम की फ्रेंड है ना बिनी! उसके भाई जिस रेस्टोरेंट पर काम करते हैं वहां कुक की जरूरत है मैं सोच रही हूं वहां जाकर देख लूं।
"दीपक पटेल माही के मामा अपना सफेद यूनिफार्म पहने हुए बोले....... तुम्हें नौकरी करने की जरूरत नहीं है माही! मैं कमा तो रहा हूं और इतना तो कमा लेता हूं कि पांच लोगों को संभाल सकूं।"
" अंदर से माही की मामी चिल्लाती हुई बोली....... हां हां जैसे महीनों लाखों कमा रहे हो। ₹00 तनख्वाह पाते हो। उसमें कैसे घर संभालती हूं मैं जानती हूं। ऊपर से घर में दो-दो जवान लड़की बैठे हुए हैं। ₹4 और आ जाएंगे तो क्या बुराई है उसमें? "
"दीपक....... चारू तुम समझो यह मुंबई है। यहां बाहर जाकर काम करना सेफ नहीं है।"
" चारुलता....... आप समझिए यह मुंबई है। यहां एक-एक पल का हिसाब रहता है। और फिर माही अगर दो पैसे कमा भी लेगी तो क्या बुराई है? ले दे के घर में कुछ पैसे बचेंगे। फिर माही के पास आकर बोली..... माही तू यह नौकरी कर लेना। मुझे कोई एतराज नहीं है।"
" माही...... जी मामी! आज ही बिनी के भाई से बात करूंगी।"
"दीपक जी गुस्से में........ माही मुझे मेरा डिब्बा दे दो। अनिरुद्ध साहब को लेट आने वाले लोग पसंद नहीं।"
"माही........ जी मामा जी बोलकर किचन में चली गई। दीपक जी अपने मां सावित्री देवी के पैर छुए और माही के हाथ से डिब्बा लेकर बाहर चले गए। माही के मामा मुंबई शहर के एक बड़े आदमी अनिरुद्ध सिंह ठाकुर के यहां गाड़ी के ड्राइवर हैं। पिछले 15 सालों से उनके यहां सुबह से लेकर शाम तक वह ड्राइवर की नौकरी करते हैं।"
"मामा के जाने के बाद माही आकर मामी को नाश्ता देते हुए बोली....... मामी! वह रेस्टोरेंट जाने के लिए ऑटो का भाड़ा चाहिए।"
"चारुलता ........मनहूस कर्मजली सुबह-सुबह कोई पैसे मांगता है क्या?"
" माही....... मामी! ट्यूशन से जो पैसे आए थे सब आपको दे दिए थे।"
" चारुलता...... पता है पता है मुझे सिर्फ ₹2000 दिए थे। मैं यह बोल रही हूं जब पढ़ाती हो इतने बच्चों को तो इतने कम पैसे क्यों लेती हो। "
"माही ........मामी बस्ती के बच्चे हैं कहां से ज्यादा पैसे दे पाएंगे । "
"चारुलता....... इस बार सबको बोल देना और अपना फीस बढ़ा देना ठीक है । "
"माही सब सुनकर चुप रही । रिमझिम आई और बोली..... और कितना पैसा चाहिए तुम्हें। देखना एक दिन जब मैं फिल्मों में काम करूंगी ना तो ऐसे, पास में रखे टोकरी से फूलों को ऊपर फेंकते हुए बोली तुम्हारे ऊपर पैसे बरसाऊंगी। "
"चारुलता .......ए रिमझिम सपनों के दुनिया से बाहर आ और यह क्या किया तुमने यह सब फूल खर्च कर दिए अब निकल जा मेरे सामने से नहीं तो बहुत मार खायेगी।"
आगे की कहानी जानने के लिए पढें भाग........2