"माही उन फूलों से अच्छे-अच्छे बुक्के बनाकर देती है। फिर उसके मामी वह सारे बुक्के लेकर दुकान में देती है। इससे भी कुछ पैसे आ जाते हैं। सारा काम माही करती है। पर क्रेडिट चारुलाता जी ले जाती है।"
"रिमझिम........ अरे मेरी प्यारी आई मुझे पता है तुम दूसरे फूल ले आओगी। आए मेरे मेकअप का सारा सामान खत्म हो गए हैं। मुझे ₹1500 चाहिए था।"
" चारुलता....... पैसे नहीं है मेरे पास।"
" रिमझिम...... ठीक है। फिर ना मैं सुंदर दिखूंगी और ना ही कोई अमीर लड़का मुझे देखेगा और ना ही तेरी अमीर दामाद करने की शौक पूरी होगी। वैसे मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। इस बस्ती के कई सारे लड़के मेरे पीछे पड़े हुए हैं।"
" चारुलता .......अरे अरे शुभ शुभ बोल रिमझिम यह कैसी बहकी बहकी बात कर रही हो? मेरे सपने पूरे होने के लिए तुझे खूबसूरत दिखना बहुत जरूरी है।"
"रिमझिम........ अच्छा ! फिर दो ₹1500।"
" चारुलता अपना बटुआ निकालती है और उसमें से पैसे निकालकर ₹1500 रिमझिम को दिए और ₹100 माही को देकर बोली...... यह ले और बस में चले जाना। "
"माही ₹100 लिए और मुस्कुराहट के साथ बोली........थैंक्स मामी। "
"चारुलता........ ठीक है ठीक है! जा और जल्दी आ जाना।"
" माही...... ठीक है। मामी मैं आकर बुक्के बना दूंगी। आप दुकान पर बोल देना। शाम को सारे बुक्के मिल जाएंगे।"
" चारुलता....... ठीक है। ठीक है जल्दी आना। और हां सुन तू चाहे कहीं भी काम कर पर घर के काम से तुझे छुट्टी नहीं मिलेगी।"
" माही चेहरे पर स्माइल लिए बोली....... जी मामी!"
"चारुलता फूल खरीदने के लिए बाहर चली गई और माही अपने रूम में।"
"यह घर माही के नानी यानी सावित्री देवी का है। यहां दो छोटे-छोटे कमरे हैं। एक किचन, एक छोटा सा डाइनिंग हाल और एक बाथरूम कम टॉयलेट है। दीपक जी और चारुलता एक कमरे में रहते हैं। माही और रिमझिम एक कमरे में और जो छोटा सा डाइनिंग हाल है उसमें एक सिंगल बेड रखा है जिसपे सावित्री देवी सोती हैं। रिमझिम और माही के दो अलग-अलग बेड है। घर छोटा है पर हर सामान तरीके से रखा हुआ है और सब कुछ बहुत साफ सुथरा है। "
"माही हमेशा घर के काम में बिजी रहती है। रोज शाम को कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है पर बस्ती के बच्चे हैं इसलिए जो जितना मर्जी पैसे दे देते हैं। माही कभी किसी को कुछ बोलती नहीं है।"
" माही ...... रिमझिम तू चलेगी मेरे साथ।"
" रिमझिम........ बिल्कुल! इसीलिए तो आई से पैसे निकाले। "
"माही .......मतलब रिमझिम मतलब माय डियर सिस्टर। यह पैसे मैं हम दोनों के लिए लाई हूं।"
" माही अपनी बड़ी आंखों को और बड़ी करके बोली........तुझे अपना मेकअप सामान नहीं लेना है।"
" रिमझिम........ नहीं मेरे पास है। मेकअप के सारे सामान है। वो आई तुम्हें पैसे नहीं दे रही थी जबकि यह पैसे तेरे मेहनत के हैं।"
" माही........ बुरी बात रिमझिम! ऐसे झूठ बोलकर तूने ठीक नहीं किया।"
" रिमझिम....... वह सत्यावादी राजा हरिश्चंद्र हैं क्या! यह कलयुग है और यहां अपना हक भी छीन कर लेना होता है।"
" माही...... मैं नहीं मानती यह सबको जो अपना है वह मिलकर ही रहेगा और मुझे मेरे ईश्वर पर पूरा भरोसा है। वह मेरे साथ हमेशा अच्छा ही करेंगे।"
" रिमझिम.......कैसे कर लेती है तू माही !"
"माही ........क्या?"
" रिमझिम बोली......... बातें फिर पोहा थोड़ा सा मुंह में लेकर बोली और खाना भी। "
"माही खिलखिला कर हंसती। रिमझिम थोड़ा सा पोहा माही के मुंह में रखकर बोली.......तू भी खा ले। "
"सावित्री जी दरवाजे के बाहर खड़ी होकर दोनों को देखा और दोनों के बलाइया लेकर बोलीं....... साथ में जाना और जल्दी आना। "
"रिमझिम........ जी दादी!
"माही....... ठीक है नानी! अपना ख्याल रखना और बप्पा से दुआ करना कि मुझे नौकरी मिल जाए।"
".....ठाकुर मेंशन यहां पर रहते हैं मुंबई के जानेमाने बिजनेसमैन अनिरुद्ध सिंह ठाकुर और उनके परिवार के कुछ लोग! तो चलते इन लोगों से भी मिल लेते हैं। घर में सबसे बड़ी है दुर्गा देवी। उनके बड़े बेटे अनिरुद्ध सिंह ठाकुर। अनिरुद्ध जी के पत्नी संजना सिंह 24 साल पहले बेटे को जन्म देने के बाद ऊपर चले गए। अनिरुद्ध सिंह जी का इकलौता बेटा है अभिम्यु सिंह ठाकुर। दुर्गा देवी के छोटे बेटे अभिषेक सिंह ठाकुर, अभिषेक जी के वाइफ शोभा सिंह। उनके बेटे आदित्य सिंह ठाकुर और दो बेटी मिताली और मिस्टी। यह सारे लोग ठाकुर मेंशन पर रहते हैं। "
"आज यहां कुछ ज्यादा है। चहल-पहल है। सब इधर से उधर भाग रहे थे। अनिरुद्ध जी.......... अभिषेक मीडिया वाले आ गए क्या?"
" अभिषेक .......जी भाई साहब सब लोग आ गए हैं।"
" अनिरुद्ध जी .......मां पूजा हो गए आपके। "
"दुर्गा देवी....... हां बेटा। "
"तभी मेंशन से थोड़े दूर पर एक बहुत बड़ा फील्ड था जो ठाकुर साहब के प्रॉपर्टी के अंदर ही आता है। उसमें एक प्राइवेट जेट आकर लैंड हुआ। जेट के आवाज सुनकर सिंह फैमिली के सब मेंबर मेंशन के बालकनी पर गए। जेट पहुंचने के पहले से ही चार बड़ी-बड़ी गाड़ी वही फील्ड पर खड़ा था। गाड़ी के साथ छह बॉडीगार्ड और चार ऑफिस के स्टाफ भी थे। जेट का डोर खुला और उसमें से बाहर आए हमारे हीरो अभिम्यु सिंह ठाकुर। वाइट कॉलर के कोट सूट में वह किसी हीरो से कम नहीं लग रहे थे। देखने में ऐसा कि हर लड़की दीवानी हो जाए। उनके चेहरे का तेज ही काफी है लोगों को जलाने के लिए। हमेशा फेस पर एक अलग सा रबाब रहता है इनका। हर लड़की हो या औरत इनको देखकर ठंडी आहें जरूर भरते हैं। और सबसे ज्यादा अट्रैक्टिव है इनके नीले आंखें जिसमें एक नशा है और हर लड़की इनके करीब होना चाहती है। पर अभी को आज तक किसी में इंटरेस्ट ही नहीं हुआ।"
" जेट से उतरने के बाद अभिम्यु का मैनेजर जल्दी से जाकर गाड़ी का बैक डोर ओपन किया। अभिम्यु........सिद्धार्थ अगर तुम बूढ़े हो गए हो तो मैं तुम्हारे जगह दूसरा मैनेजर अपॉइंट कर दूंगा।"
आगे की कहानी जानने के लिए पढें भाग......... 3