Begusarai The Dark Syndicate - 2 in Hindi Thriller by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | बेगूसराय द डार्क सिंडिकेट - 2

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बेगूसराय द डार्क सिंडिकेट - 2

जितेंद्र परमार को जैसे ही इस दूसरी घटना की भनक लगती है, वह चीख-चीख कर कैमरे पर हंगामा शुरू कर देता है।
जितेंद्र परमार: "ब्रेकिंग न्यूज़! बेगूसराय अब 'किडनैपिंग कैपिटल' बन चुका है। स्कूल की 10 लड़कियों के बाद अब 3 कामकाजी महिलाएं भी गायब! क्या पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है? या फिर बड़े रसूखदार लोगों को बचाने के लिए गरीब औरतों की बलि चढ़ाई जा रही है?"
वह अपने कैमरामैन को इशारा करता है कि रोते हुए परिजनों के क्लोज-अप शॉट ले। जितेंद्र का मकसद सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि जनता के गुस्से को भड़काना था ताकि पुलिस दबाव में आकर कोई गलती करे।
संध्या सिंह का कड़ा फैसला
संध्या सिंह अपने ऑफिस लौटती हैं और पूरे जिले के पुलिस फोर्स की मीटिंग बुलाती हैं।
संध्या: "हमें इन 13 जिंदगियों को बचाना है। अभिमन्यु, मुझे उस इलाके के हर पुराने अपराधी की लिस्ट चाहिए जो पहले ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) में शामिल रहा हो। और सुनो, जितेंद्र परमार की हर एक्टिविटी पर नजर रखो। उसे ये खबरें पुलिस से पहले कैसे मिल रही हैं? मुझे शक है कि पुलिस के अंदर ही कोई 'खबरी' बैठा है जो उसे और उन अपहरणकर्ताओं को पल-पल की जानकारी दे रहा है।"
सत्ता की हनक और भारी दबाव
संध्या सिंह अपने केबिन में बैठकर उन टायरों के निशान की फॉरेंसिक रिपोर्ट देख रही थीं, तभी उनका पर्सनल फोन बजता है। स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था, लेकिन जो नंबर फ्लैश हो रहा था, उसे देखकर संध्या के माथे पर पसीना आ गया। यह क्षेत्र के ताकतवर सांसद और कैबिनेट मंत्री अनुपम सिरसा का नंबर था।
संध्या ने गहरी सांस ली और फोन उठाया।
संध्या: "जय हिंद, सर।"
अनुपम सिरसा: (दूसरी तरफ से एक भारी और ठंडी आवाज़ में) "संध्या जी, सुना है बेगूसराय में आज बहुत रौनक लगी हुई है? मीडिया वाले तो जैसे आपके पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं।"
संध्या: "सर, 13 अपहरण हुए हैं। स्थिति गंभीर है, हम जांच कर रहे हैं।"
अनुपम सिरसा: (हल्के से हंसते हुए) "जांच... जांच तो आप जरूर कीजिए, वो आपका धर्म है। लेकिन देखिए, बेगूसराय मेरा घर है। मैं नहीं चाहता कि पुलिस की वजह से यहाँ के व्यापारियों और रसूखदार लोगों में डर का माहौल बने। ये जो आप नाकेबंदी कर रही हैं और 'सफेदपोश' लोगों पर शक की सुई घुमा रही हैं, इससे मेरी सरकार की छवि खराब हो रही है।"
संध्या: "सर, जब तक लड़कियां नहीं मिल जातीं, हमें हर संदिग्ध से पूछताछ करनी होगी।"
अनुपम सिरसा: (आवाज़ सख्त करते हुए) "सुनिए कप्तान साहब! काम उतना ही कीजिए जितना जरूरी हो। ये जितेंद्र परमार जो टीवी पर चिल्ला रहा है, उसे शांत कीजिए। और हाँ, उन 'मजदूर औरतों' के पीछे अपनी ताकत बर्बाद मत कीजिए, वो शायद अपनी मर्जी से कहीं गई होंगी। मुझे कल सुबह तक शहर में शांति चाहिए, वरना बेगूसराय की पुलिस लाइन में बहुत से जूनियर ऑफिसर प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे हैं। समझ गई आप?"कॉल कट जाती है।
अभिमन्यु केबिन के बाहर ही खड़ा था। संध्या का उतरा हुआ चेहरा देखकर वह सब समझ गया।
अभिमन्यु: "सिरसा का फोन था? क्या कहा उन्होंने?"
संध्या: (गुस्से में फोन टेबल पर पटकते हुए) "वही जो हर भ्रष्ट सिस्टम करता है। फाइलें बंद करने का इशारा। उन्होंने कहा कि मजदूर महिलाएं अपनी मर्जी से गई होंगी। अभिमन्यु, ये सिर्फ किडनैपिंग नहीं है। इसके पीछे इतनी बड़ी ताकत है कि वो पुलिस को खिलौना समझ रही है।"
अभिमन्यु: "इसका मतलब जितेंद्र परमार भी सिरसा का ही मोहरा है। वो टीवी पर पुलिस को इसलिए कोस रहा है ताकि जनता का ध्यान भटक जाए और असली गुनहगार सुरक्षित रहें।"
अँधेरे का ठिकाना (The Hideout)
कैमरा अब शहर से दूर एक पुराने, बंद पड़े 'कोल्ड स्टोरेज' के अंदर जाता है। चारों तरफ बर्फ की सिल्लियां रखने वाले बड़े-बड़े लोहे के बक्से हैं। वहाँ का तापमान बहुत कम है।
वही 10 लड़कियां और 3 महिलाएं वहाँ जंजीरों से बंधी हुई हैं। वे सब ठिठुर रही हैं और रो रही हैं। उनके सामने एक बड़ा सा एलसीडी टीवी लगा है, जिस पर जितेंद्र परमार की ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही है।
मौत का दूसरा नाम - जेके दुर्रानी (JK Durrani)
कोल्ड स्टोरेज की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में, वह नकाबपोश आदमी लड़कियों को डराने के लिए अपनी बेल्ट निकाल ही रहा था कि अचानक उसकी जेब में रखा फोन वाइब्रेट करने लगा।
जैसे ही उसने स्क्रीन देखी, उसके चेहरे का रंग सफेद पड़ गया। माथे पर ठंडी हवा के बावजूद पसीने की बूंदें चमकने लगीं। स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था, बस एक 'धधकते हुए शेर' का लोगो (Logo) बना हुआ था। यह जेके दुर्रानी का कॉल था।
नकाबपोश: (कांपती आवाज़ में) "जी... जी बॉस?"
जेके दुर्रानी: (फोन के दूसरी तरफ से एक ऐसी आवाज़ जो भारी और एकदम शांत थी, लेकिन उसमें मौत जैसी खामोशी थी) "सुना है बेगूसराय में तुम्हारी वजह से बहुत शोर हो रहा है। मैंने तुम्हें शिकार करने भेजा था, तमाशा करने नहीं।"
नकाबपोश: "माफ कीजिए बॉस, वो पुलिस और मीडिया..."
जेके दुर्रानी: "पुलिस और मीडिया मेरे तलवे चाटते हैं। फिक्र उनकी नहीं है, फिक्र इस बात की है कि तुम 'माल' को समय पर बॉर्डर तक नहीं पहुँचा पाए। याद रखना, अगर सुबह की पहली किरण तक शिपमेंट कंटेनर में नहीं चढ़ा, तो उन लड़कियों की जगह तुम्हारे जिस्म के टुकड़े उसी कोल्ड स्टोरेज में मिलेंगे।"
कॉल कट जाती है। नकाबपोश आदमी घुटनों के बल बैठ जाता है। वह जानता है कि दुर्रानी कोई इंसान नहीं, एक ऐसा साया है जिसे न किसी ने देखा है, न कोई उसके खिलाफ गवाही देने के लिए ज़िंदा बचा है। वह मंत्री अनुपम सिरसा से भी बड़ा खिलाड़ी है।