The last wait in Hindi Love Stories by A Singh books and stories PDF | आखिरी इंतज़ार

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आखिरी इंतज़ार

एक छोटी-सी गुज़ारिश...


अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है जिससे बात बंद है, तो इस कहानी को पढ़ने से पहले उसे एक बार याद ज़रूर कर लीजिए।


क्या पता आपका एक मैसेज, एक कॉल या एक "सॉरी" किसी रिश्ते को बचा ले।


क्योंकि कुछ लोग नाराज़ होकर नहीं जाते,

बस हम उन्हें मनाने में देर कर देते हैं... 💔🥀


💔💔💔💔💔💔💔💔💔 


  आरव और निशा एक-दूसरे से बहुत प्यार करते  थे।


दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं।


लेकिन एक छोटी-सी गलतफहमी ने सब बदल दिया।


एक दिन दोनों में बहुत बड़ा झगड़ा हुआ।


गुस्से में निशा ने कहा,

"आज के बाद मुझे कभी कॉल मत करना।"


आरव ने भी गुस्से में जवाब दिया,

"ठीक है, अब मैं कभी तुम्हें परेशान नहीं करूँगा।"


उस दिन के बाद दोनों अलग हो गए।


दिन बीतते गए।


महीने गुजर गए।


फिर साल भी।


लेकिन सच यह था कि दोनों आज भी एक-दूसरे को भूल नहीं पाए थे।


निशा हर रात उसकी पुरानी तस्वीरें देखती थी।


और आरव हर जन्मदिन पर बिना नाम बताए उसे फूल भिजवा देता था।


एक रात करीब 11 बजे निशा का फोन बजा।


अनजान नंबर था।


उधर से एक लड़की की रोती हुई आवाज़ आई।


"क्या आप निशा बोल रही हैं?"


"जी।"


"मैं आरव की बहन बोल रही हूँ..."


निशा का दिल जोर से धड़कने लगा।


"क्या हुआ आरव को?"


उधर से जवाब आया —


"भैया अस्पताल में हैं...

उन्होंने आपका नाम लिया है।

वो आपसे मिलना चाहते हैं।"


निशा बिना कुछ सोचे अस्पताल की तरफ भागी।


ICU के बाहर पहुँचते ही उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।


आरव मशीनों से जुड़ा हुआ था।


चेहरा कमजोर पड़ चुका था।


लेकिन जैसे ही उसने निशा को देखा,

उसकी आँखों में चमक आ गई।


निशा उसके पास बैठ गई।


हाथ पकड़कर रोते हुए बोली,


"तुम इतने दूर क्यों चले गए मुझसे?"


आरव हल्का-सा मुस्कुराया।


"दूर तो तुम गई थीं..."


दोनों रो पड़े।


कुछ देर बाद आरव ने जेब से एक मुड़ा हुआ कागज़ निकालने का इशारा किया।


निशा ने कागज़ खोला।


उसमें लिखा था —


"अगर कभी हम अलग हो जाएँ,

तो भी मैं तुम्हें आखिरी साँस तक प्यार करूँगा।"


निशा फूट-फूटकर रोने लगी।


वो बार-बार कह रही थी,


"मुझे माफ़ कर दो...

मुझे तुम्हारे पास पहले आ जाना चाहिए था।"


आरव ने काँपते हाथों से उसके आँसू पोंछे।


फिर बहुत धीरे से बोला —


"एक वादा करोगी?"


"हाँ।"


"अगले जन्म में...

मुझे इतना इंतज़ार मत करवाना।"


इतना कहकर उसने निशा का हाथ और कसकर पकड़ लिया।


फिर...


उसकी पकड़ धीरे-धीरे ढीली पड़ गई।


मशीन की आवाज़ एक सीधी लाइन में बदल गई।


निशा चीख पड़ी।


"आरव... उठो...

देखो मैं आ गई हूँ..."


लेकिन इस बार आरव सचमुच बहुत दूर जा चुका था।


आज भी निशा हर साल उसी तारीख को अस्पताल के बाहर जाती है।


वहीं बैठकर एक गुलाब रखती है।


और धीरे से कहती है —


"इस जन्म में देर हो गई आरव...

अगले जन्म में तुम्हें इंतज़ार नहीं करवाऊँगी..."


आरव के जाने के बाद निशा की ज़िंदगी चल तो रही थी,


लेकिन जी नहीं रही थी।


अब उसे रातों से डर लगने लगा था।


क्योंकि दिन में तो लोग साथ होते थे,


पर रात होते ही यादें उसका हाथ पकड़ लेती थीं।


वो अक्सर आरव की पुरानी चैट खोलकर बैठ जाती।


उसके "Good Morning" से लेकर "खाना खाया?" तक के मैसेज पढ़ती रहती।


कई बार रोते-रोते फोन सीने से लगाकर सो जाती।


एक दिन उसकी माँ ने पूछा,


"बेटा, आखिर किसका इंतज़ार करती रहती हो?"


निशा मुस्कुरा दी।


क्योंकि जिस इंसान का इंतज़ार था,


वो अब लौटकर आने वाला नहीं था।


उसने आरव का नंबर आज तक डिलीट नहीं किया।


आज भी जब कोई अनजान नंबर कॉल करता है,


तो एक पल के लिए उसका दिल ज़ोर से धड़क उठता है।


शायद...


इस बार आरव हो।


उसे पता था कि ऐसा कभी नहीं होगा।


फिर भी उम्मीद का एक छोटा-सा दीपक उसके दिल में जलता रहता था।


कभी-कभी वो आईने के सामने खड़ी होकर खुद से पूछती,


"अगर उस रात मैं थोड़ा पहले पहुँच जाती...


तो क्या आज मेरी दुनिया उजड़ी न होती?"


लेकिन हर बार जवाब में सिर्फ़ आँसू मिलते।


लोग कहते हैं कि समय हर ज़ख्म भर देता है।


पर कुछ ज़ख्म ऐसे होते हैं,


जो भरते नहीं,


बस इंसान उन्हें छुपाना सीख जाता है।


निशा भी सीख गई थी मुस्कुराना।


लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे आज भी एक लड़की रोती थी,


जो हर रात आसमान के सबसे चमकीले तारे को देखकर कहती थी—


"सुन रहे हो ना आरव...


आज भी तुमसे उतना ही प्यार करती हूँ।


बस फ़र्क इतना है कि पहले तुम मेरी बात सुन लेते थे,


अब मेरी आवाज़ सिर्फ़ आसमान तक जाती है..."



😔😔😔😔😔😔😔😔


"कुछ कहानियाँ पूरी होकर भी अधूरी रह जाती हैं,

और कुछ इंतज़ार मौत के बाद भी खत्म नहीं होते..."