Mafia's Obsessed Love - 17 in Hindi Love Stories by Priyanka Saini books and stories PDF | Mafia's Obsessed Love - 17

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Mafia's Obsessed Love - 17

उसकी चीख सुन वो तीनों जल्दी से उसकी तरफ देखते है जिसके चेहरे की हवाइयां उड़ी पड़ी थी। जैसे उसने कुछ ऐसा देखा जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकता...

मिहिर, जीवन और शायना हड़बड़ाते हुए अजीत की तरफ देखते है... जो ड्राइविंग शीट पर बिना पलक झपकाए सामने देख रहा था। जीवन अजीत के एक शोल्डर पर हाथ रख उसके गाल को छूते हुए बोला ..." भाई तुझे क्या हुआ यहीं चुड़ैल पिशाचनी के दर्शन हो गए जो तू ऐसे रिएक्शन दे रहा है जैसे... किसी लड़के ने तुझे किस कर दिया हो..।

" बिन बुलाई आफत बकलोल महाराज उधर देख" अजीत जीवन को घूरते हुए दांत पीसकर उसका अपने एक हाथ से जबड़ा पकड़ बिना वार्निंग के सामने घुमा देता है।

" ऐसा भी क्या जो एक दूसरे को काट खाने दौड़... शायना जो अपनी शीट से उठती हुई आगे की तरफ देख बोल रही थी। अब कुछ बोल ही नहीं पाती... 

वेदांश सफेद धोती के साथ ऊपर सफेद बॉडी फिटेड शर्ट जिसके दो बटन खोले हुए छोड़े थे। गले में भारी सी सोने की चैन हाथ में एक्सपेंसिव घड़ी और उंगलियों में सोने की  रिंग्स पहने हुए सामने से चलता आ रहा था।

उसके बाल जो माथे पर पड़े थे.. आज जेल से सेट नहीं थे। बिखरे हुए से हवा में उड़ रहे थे। उसकी पर्सनेलिटी के साथ उसकी वो वॉक.. जिसके आगे अच्छे अच्छे मॉडल फेल हो जाए... सच में कयामत लग रहा था। 

वो चारों बस उसे ही बिना पलक झपकाए देख रहे थे।" भाईसाहब क्या हॉट लग रहे है आज तो मंदिर के पुजारी भी इनके दीवाने हो जाएंगे..  मिहिर ड्राइविंग शीट पर झुका हुआ वेदांश को देखते हुए बोला..।

वेदांश कब उनकी गाड़ी के पास से होता हुआ गुजरा उन्हें कुछ पता ही नहीं चला... मगर.. जैसे.. जैसे वो गुजरा वैसे वैसे उन चारों की निगाह भी उसके साथ चल रही थी। जब वेदांश उनकी कार से आगे निकल गया । तब जाकर कहीं उन चारों को होश आया। वो आपस में खुद को देखते है..  

" मैं कोई सपना देख रहा हूं क्या..?" जीवन बार बार अपनी आंखों को मसलते हुए बोला .. " ये कोई सपना नहीं है मंदबुद्धि " अजीत उसके सिर पर चपत लगाते हुए कहता है।

" लगता है आज सूरज पश्चिम से निकला है.." मिहिर ने शीट पर बैठते हुए कहा..." हम्म शायद " तीनों ने साथ मे उसकी बात पर हामी भरी...

वेदांश अपनी चमचमाती ब्लैक बैंटली के पास खड़ा होता है... उस कार से टेक लगाकर खड़े आकाश और अनव (वेदांश के बेस्ट फ्रेंड) का भी कुछ वही हाल था क्योंकि आज तक किसी ने भी उसे ट्रेडिशनल ड्रेस में नहीं देखा।

वेदांश उन दोनों के पास आकर उन्हें घूरने लगता है क्योंकि वो देख ही कुछ ऐसे रहे थे.. जैसे एलियन देख लिया है .." भाई  आज तू सच में जहर लग रहा है" आकाश उसे बोला... वेदांश जो कार में बैठ चुका था उसने अपनी भारी आवाज में कहा.. " तो खाकर मर जा.." आकाश बुरा सा मुंह बना उसे देखने लगता है... "अरे यार लेट हो रहा है अब आ जा.." अनव ने उससे कहा वो ड्राइविंग शीट पर बैठा आकाश के ही बैठने का इंतजार कर रहा था। ऐसे ही राठौर विला से सभी गाड़ियां एक एक कर मंदिर के लिए निकल जाती है।

इधर... श्री ओर कनु भी अभी अभी मंदिर पहुंची थी। वह चारों तरफ देखती है काफी भीड़ थी। मगर फिर भी सब बहुत ही अनुशासन में खड़े थे क्योंकि आज शिवलिंग पर जलाभिषेक होने वाला था । और ये राठौर फैमिली के सबसे बड़े बेटे के हाथों होना था।

"ये सभी लोग ऐसे क्यों खड़े है" श्री ने चारों तरफ देखते हुए कनु से कहा.. कनु भी चारों तरफ देखते हुए बोली.. वो शिवलिंग पर जलाभिषेक होगा और साथ में हवन भी है और ये पूजा राठौर फैमिली के सबसे बड़े बेटे की कामयाबी में रखवाई गई है...।

"ओहो .. तो ये बात है" श्री ने कहा... जिसपर कनु ने हां में अपना सिर हिला दिया ।

"चलो वहां चलते है देखो वहां पर कुछ बच्चे क्लासिकल डांस कर रहे है। शायद उन्हें तुमने ही सिखाया है" कनु ने मंदिर के दूसरे साइड कॉरिडोर में देखकर चहकते हुए कहा 

तो श्री का भी ध्यान उस तरफ गया। उसके होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान खिल गई। सही कहा था कनु ने ये वही बच्चे थे जिन्हें श्री हर रोज डांस प्रैक्टिस कराती थी।

कितना प्राउड फील होता है जान कोई हमारे को लोगो की तारीफे दुआएं मिले.. बस कुछ यही हाल श्री का था।

कनु जल्दी से श्री का हाथ पकड़ उस तरफ खींचते हुए ले गई। काफी शांति थी यहां पर... जो लोग उनका डांस देख रहे थे वे सभी उस कॉरिडोर से नीचे खड़े थे।

इधर मंदिर में आकर कई सारी गाड़ियां रुकती है। अब सभी इस तरफ आ जाते है क्योंकि राठौर फैमिली आ चुकी थी। सिक्यूरिटी चारों तरफ बढ़ा दी गई। क्योंकि इतनी बड़ी फैमिली जो आई थी।पहली गाड़ी से बाहर निकलते है.. मनीष जी, विधि जी और अजय जी, शिखा जी... वह एक नजर सभी को देखते है आगे मंदिर की तरफ निकल जाते है। वहां बैठे महापंडित जी से कुछ बात करने लगते है।

दूसरी गाड़ी से निकलता है वह शख्स.. यानी कि वेदांश... वेदांश राठौर... नाम ही काफी था। चारों तरफ एक ही पल में शांति छा गई। उसी के साथ बाहर निकलते है अनव और आकाश...

इंडिया के फेमस बिजनेसमेन साथ ही मोस्ट हैंडसम एलिजिबल बैचलर... आह... लड़कियां किया इन्हें देखकर लड़के भी अपनी आंखे सेक रहे थे। न जाने कितनो की आइडल और कितनो के ख्वाइश थे ये... 

"कौन होगी वो... जिसके नसीब में ये हैंडसम हंक होगा" एक लड़की ने वेदांश को देखते हुए कहा... "कोई भी पर तू तो बिल्कुल नहीं होगी " उसकी पास खड़ी दूसरी लड़की ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ..  पहली लड़की उसे देख बुरा मुंह बना लेती है 

अब सभी मंदिर में जा चुके थे यहां आकर मिहिर शायना जीवन चारो बहुत ही खुश थे। तभी अचानक वहां एक कार आती है अब सभी का ध्यान उस तरफ जाता है। जिसमें से सावंत परिवार निकलता है नीना सावंत और विकास सावंत के साथ उनके बच्चे अक्षिता और धर्म सावंत..
अक्षिता कार से निकल सबसे पहले वेदांश की तरफ निकलती है मगर उससे पहले ही उसके फोन रिंग करता है और वो बिना एक नजर अक्षिता को देखे दूसरी तरफ चला जाता है। अक्षिता अपना मुंह बिगाड़ती हुई उसे देखती है और थोड़ी तेज आवाज में कहती है.." हमम.  क्या हर टाइम फोन काम काम... " जायज था वो वहां खड़ी लड़कियों देख जानबूझकर कह रही थी। जो वेदांश को देखकर आहें भर रही थी। 

वह सभी को देख अपना लहंगा संभालते हुए एटीट्यूड से आगे बढ़ जाती है ।

"पता नहीं क्या सोचकर अंकल ने इसे वेदांश के लिया पसंद किया है " आकाश उसे देख एक गहरी सांस भरता हुआ। कहता है ..." बात तो सही " अनव भी उससे अपनी नज़रे फेर बोलता है 

इधर... वेदांश फोन पर बात करता हुआ आगे बढ़ रहा था अचानक वह किसी से टकरा जाता है 

हेलो दोस्तो आज का चैप्टर आपको कैसा लगा आपने कॉमेंट्स के जरिए बताएगा एंड किया में इस स्टोरी का कवर चेंज कर दूं..  plz बताएगा ...