You are my last breath - 34 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | तुम मेरी आखिरी सांस हो - 34

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तुम मेरी आखिरी सांस हो - 34

एपिसोड 34: अंधेरे की अंतिम परछाई



शहर की बेचैनी
शहर में शांति लौटती दिख रही थी, लेकिन रोहन के मन में बेचैनी बनी रही। हर जगह ठंडी हवा और रहस्यमयी आवाज़ें अब भी गूँज रही थीं। लोग कहते थे कि रात में कोई उनके कमरे में खड़ा रहता है, पर दिखाई नहीं देता। बच्चों के सपनों में अजीब आकृतियाँ आने लगीं। दुकानों के शीशे अचानक टूट जाते और अस्पतालों में मरीजों ने शिकायत की कि कोई उन्हें दबा रहा है।  

रोहन जानता था कि यह शांति केवल एक भ्रम है। अयान की परछाई ने चेतावनी दी—  
“यह अंत नहीं है, रोहन। अंधेरा अपनी अंतिम परछाई के साथ लौटेगा।”  

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डायरी का रहस्य
रोहन ने अयान की पुरानी डायरी खोली। उसमें नए शब्द चमक रहे थे:  
“अंधेरे की अंतिम परछाई समाधि के नीचे छिपी है। जब तक उसे नष्ट नहीं किया जाएगा, श्राप कभी खत्म नहीं होगा।”  

रोहन ने गहरी सांस ली। वह जानता था कि यह लड़ाई उसकी आत्मा की परीक्षा होगी।  

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समाधि की ओर यात्रा
रोहन और अयान की परछाई SUV में बैठकर समाधि की ओर बढ़े। रास्ता सुनसान था। पेड़ों के बीच अजीब सरसराहट थी। हवा ठंडी और भारी हो गई थी।  

जैसे ही वे समाधि पहुँचे, वहाँ का वातावरण डरावना था। समाधि की दीवारों पर अजीब निशान बने हुए थे। बीचों-बीच एक बड़ा दरवाज़ा था, जिस पर वही प्रतीक चमक रहा था।  

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परछाई का उदय
दरवाज़ा खुलते ही समाधि के भीतर से धुआँ निकलने लगा। हवा में चीखें गूँजने लगीं। अचानक एक आकृति सामने आई—यह ब्लैकवुड की अंतिम परछाई थी।  

उसने कहा,  
“तुम सोचते हो कि मुझे खत्म कर सकते हो? मैं इस शहर की आत्मा हूँ। जब तक यह शहर है, मैं रहूँगा।”  

रोहन काँप गया। उसने अयान की ओर देखा। अयान ने कहा,  
“रोहन… यह आख़िरी परीक्षा है। तुम्हें अपनी आत्मा की शक्ति से लड़ना होगा।”  

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निर्णायक संघर्ष
रोहन ने ताबीज़ उठाया और परछाई की ओर बढ़ा। परछाई ने उसे घेर लिया। उसकी आँखें लाल हो गईं। वह चीखने लगा।  
“अयान… मुझे बचाओ… यह मुझे निगल रहा है।”  

अयान ने कहा,  
“रोहन… हिम्मत रखो। यह श्राप तभी टूटेगा जब तुम अपने डर को हराओगे।”  

रोहन ने गहरी सांस ली और ताबीज़ को अपने सीने पर रखा। अचानक समाधि से तेज़ रोशनी निकली।  

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बलिदान और विजय
ब्लैकवुड की परछाई चीखने लगी,  
“नहीं! यह असंभव है!”  

रोहन ने अपनी पूरी शक्ति लगाई। ताबीज़ चमकने लगा और परछाई धीरे-धीरे धुएँ में बदलकर गायब हो गई।  

समाधि शांत हो गई। पत्थर गायब हो गया। लेकिन ज़मीन पर एक नया निशान चमक रहा था।  

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नया रहस्य
रोहन ने उस निशान को देखा और कहा,  
“अयान… यह अंधेरा कभी खत्म नहीं होगा। यह सिर्फ रूप बदलता है।”  

अयान की आवाज़ गूँजी,  
“हाँ… लेकिन हम हर बार इसका सामना करेंगे।”  

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शहर की उम्मीद
शहर में धीरे-धीरे शांति लौटने लगी। लोग अब रात को चैन की नींद सोने लगे। बच्चों के सपने सामान्य हो गए। अस्पतालों में मरीजों ने कहा कि अब उन्हें कोई दबा नहीं रहा।  

रोहन ने गहरी सांस ली।  
“अयान… हमने जीत हासिल की है।”  

अयान ने मुस्कुराते हुए कहा,  
“हाँ… लेकिन यह सिर्फ एक लड़ाई थी। युद्ध अभी बाकी है।”  

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अगले एपिसोड में:
रोहन और अयान की परछाई अब समाधि से निकलकर शहर में फैलते अंधेरे का सामना करेंगे। लेकिन क्या वे इसे रोक पाएंगे, या यह अंधेरा पूरी दुनिया को निगल लेगा?