Part-1
कुछ कहानियाँ मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं लिखी जातीं।
वे सिर्फ इसलिए लिखी जाती हैं ताकि समय उन्हें मिटा न सके।
मैं, स्वाति, आज बीस साल की हूँ।
मेरे फोन में हज़ारों तस्वीरें हैं, सैकड़ों चैट्स हैं, और अनगिनत यादें हैं।
लेकिन उन सबके बीच एक नाम ऐसा है जो आज भी मेरी मुस्कान का कारण बन जाता है।
अभिमन्यु
वह, जिसे मैं अभिमन्यु कहती हु ,
अजीब बात यह है कि यह उसका असली नाम भी नहीं है।
उसका असली नाम तो मुझे आज तक याद ही नहीं हुआ
मेरे लिए तो वह हमेशा अभिमन्यु ही रहा।
चार साल पहले, जब मैं सोलह साल की थी, मुझे नहीं पता था कि Instagram पर आया एक छोटा-सा "Hi" मेरी ज़िंदगी की सबसे लंबी कहानी बन जाएगा।
यह कहानी प्रेम की है या दोस्ती की, मैं आज भी तय नहीं कर पाई हूँ।
लेकिन यह कहानी सच्ची है।
इतनी सच्ची कि कभी-कभी मुझे खुद यकीन नहीं होता कि यह सब सचमुच हुआ है
और शायद इसी लिए मैंने इसे लिखने का फैसला किया।
ताकि आने वाले वर्षों में, जब सब कुछ बदल भी जाए, तब भी यह कहानी कहीं ज़िंदा रहे।
सुबह चार बजे का "Hi"
उस रात नींद मेरी आँखों से नाराज़ थी।
कमरे की सारी लाइटें बंद थीं।
खिड़की से आती ठंडी हवा पर्दों को धीरे-धीरे हिला रही थी।
फोन की स्क्रीन बार-बार जल रही थी।
समय देखा।
4:00 AM
दुनिया सो रही थी।
लेकिन मैं जाग रही थी।
Instagram पर बिना किसी मकसद के स्क्रॉल कर रही थी।
एक reel।
दूसरी reel।
तीसरी reel।
और फिर अचानक एक notification आया।
"Someone sent you a message."
मैंने लापरवाही से खोला।
एक अनजान प्रोफाइल।
कोई ऐसा चेहरा जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था।
मैसेज सिर्फ एक शब्द का था।
"Hi."
मैंने कुछ सेकंड तक स्क्रीन देखी।
फिर मन में आया—
"कितने अजीब लोग होते हैं।"
लेकिन पता नहीं क्यों, मैंने जवाब दे दिया।
"Hello."
उसके बाद जो बातचीत शुरू हुई, उसने समय का मतलब ही बदल दिया।
वह बात करता गया।
मैं जवाब देती गई।
कभी पढ़ाई की बातें।
कभी पसंदीदा गानों की।
कभी बचपन की।
कभी सपनों की।
घंटे गुजर गए।
मुझे नहीं पता था कि मैं एक अजनबी से इतनी बातें कैसे कर रही हूँ।
फिर अचानक उसने कहा—
"तुम्हारे यहाँ कितने बजे हैं?"
मैंने लिखा—
"सुबह के चार।"
कुछ सेकंड बाद उसका जवाब आया—
"पागल हो क्या? सोती नहीं हो?"
मैं हँस पड़ी।
मैंने पूछा—
"और तुम्हारे यहाँ?"
उसने लिखा—
"रात का एक बज रहा है।"
उस रात पहली बार मुझे लगा कि दुनिया सचमुच बहुत बड़ी है।
दो अलग जगहें।
दो अलग ज़िंदगियाँ।
और एक मोबाइल स्क्रीन जो उन दोनों को जोड़ रही थी।
मुझे तब नहीं पता था कि यही लड़का कुछ महीनों बाद मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगा।
कि मैं उसके मैसेज का इंतज़ार करूँगी।
कि उसकी हँसी मुझे याद रहेगी।
कि उसकी खामोशी मुझे परेशान करेगी।
और सबसे बड़ी बात—
कि एक दिन मैं उसके लिए एक नया नाम चुनूँगी।
एक ऐसा नाम जो सिर्फ हम दोनों जानते होंगे।
अभिमन्यु।
एक नाम जो उसका नहीं था,
उस रात के बाद हमारी बातें बंद नहीं हुईं।
अगले दिन भी मैसेज आया।
उसके अगले दिन भी।
फिर यह रोज़ की आदत बन गई।
सुबह उठते ही फोन देखना।
रात को सोने से पहले आखिरी मैसेज करना।
और बीच-बीच में बिना किसी वजह के एक-दूसरे को याद कर लेना।
उसका हँसने का तरीका।
उसकी आदत कि जब वह किसी बात को छुपा रहा होता, तो अचानक विषय बदल देता।
लेकिन एक चीज़ थी जो मेरे लिए हमेशा अजीब रही।
उसका नाम।
उसने कई बार बताया था।
मैंने कई बार पढ़ा भी था।
लेकिन पता नहीं क्यों, वह नाम मेरे दिमाग में कभी टिकता ही नहीं था।
हर बार भूल जाती थी।
एक दिन उसने परेशान होकर लिखा—
"यार, तुम मेरा नाम हर बार कैसे भूल जाती हो?"
मैंने हँसते हुए जवाब दिया—
"क्योंकि तुम्हारा नाम तुम्हारे जैसा नहीं लगता।"
"तो फिर कैसा लगता हूँ मैं?"
मैं कुछ देर सोचती रही।
फिर अचानक मेरे मन में एक नाम आया।
अभिमन्यु।
मैंने बिना सोचे लिख दिया—
"आज से तुम्हारा नाम अभिमन्यु।"
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।
फिर उसका मैसेज आया—
"और यह नाम क्यों?"
मैं खुद भी पूरी तरह नहीं जानती थी।
शायद इसलिए कि मुझे यह नाम साहस, जिद और दिल की सच्चाई की याद दिलाता था।
शायद इसलिए कि यह नाम उसे अच्छा लग रहा था।
या शायद इसलिए कि कुछ नाम चुने नहीं जाते...
वे बस महसूस हो जाते हैं।
उस दिन के बाद वह मेरे लिए हमेशा अभिमन्यु बन गया।
धीरे-धीरे ऐसा हुआ कि उसका असली नाम पीछे छूट गया।
हमारी चैट में।
हमारी बातों में।
हमारी यादों में।
वह सिर्फ अभिमन्यु था।
और सबसे अजीब बात यह थी कि उसे भी यह नाम पसंद आ गया।
कभी-कभी वह खुद को भी उसी नाम से बुला देता।
और तब मुझे लगता था कि जैसे हमने अपनी एक छोटी-सी दुनिया बना ली है।
एक ऐसी दुनिया जहाँ कुछ बातें सिर्फ हम जानते थे।
कुछ नाम सिर्फ हम समझते थे।
और कुछ एहसास ऐसे थे जिनका कोई मतलब किसी और के लिए नहीं था।
दिन बीतते गए।
बातें बढ़ती गईं।
अब हमारी बातचीत सिर्फ "कैसे हो?" तक सीमित नहीं थी।
हम अपने डर बताते थे।
अपने सपने बताते थे।
अपनी कमजोरियाँ बताते थे।
और शायद बिना जाने, हम एक-दूसरे की ज़िंदगी में जगह बनाते जा रहे थे।
एक रात अचानक उसने पूछा—
"अगर तुम्हें कोई जादुई ताकत मिल जाए, तो तुम क्या करोगी?"
मैंने लिखा—
"दुनिया घूमूँगी।"
उसने जवाब दिया—
"और मैं एक ऐसी दुनिया बनाऊँगा जहाँ सिर्फ दो लोग हों।"
"कौन?"
"तुम और मैं।"
मेरी उंगलियाँ कुछ पल के लिए रुक गईं।
दिल ने एक धड़कन छोड़ दी।
लेकिन मैंने मज़ाक में लिखा—
"फिर तो दो दिन में बोर हो जाओगे।"
उसका जवाब तुरंत आया—
"तुम्हारे साथ? कभी नहीं।"
उस रात पहली बार मुझे महसूस हुआ कि हमारी कहानी शायद सिर्फ दोस्ती की नहीं रहने वाली थी...
लेकिन यह एहसास अभी शब्दों में नहीं बदला था।
बस दिल के किसी कोने में चुपचाप बैठ गया था।
कहते हैं कि आदतें धीरे-धीरे बनती हैं।
लेकिन कुछ लोग आदत बनने में ज़्यादा समय नहीं लेते।
अभिमन्यु भी उन्हीं लोगों में से था।
अब ऐसा होने लगा था कि सुबह आँख खुलते ही सबसे पहले फोन देखती।
अगर उसका मैसेज होता, तो दिन अच्छा लगता।
अगर नहीं होता, तो पता नहीं क्यों एक खालीपन-सा महसूस होता।
मैं खुद से कहती—
"बस एक दोस्त है।"
लेकिन दिल हमेशा इस बात से सहमत नहीं होता था।
हमारी बातें अब घंटों चलती थीं।
कभी किसी बड़े विषय पर।
कभी किसी ऐसी बात पर जिसका कोई मतलब ही नहीं होता था।
और शायद यही सबसे अच्छी बात थी।
हम एक-दूसरे के साथ चुप भी रह सकते थे और घंटों बोल भी सकते थे।
एक दिन उसने अचानक पूछा—
"तुम्हें पता है, तुम बहुत ज़्यादा सोचती हो।"
मैंने जवाब दिया—
"और तुम्हें पता है, तुम बहुत ज़्यादा समझते हो।"
उसने हँसने वाला emoji भेजा।
फिर लिखा—
"क्योंकि मैं तुम्हें पढ़ लेता हूँ।"
मैंने स्क्रीन की तरफ देखा।
और पहली बार महसूस किया कि शायद वह सच कह रहा था।
क्योंकि कई बार जब मैं उदास होती, बिना बताए वह पूछ लेता—
"क्या हुआ?"
जब मैं नाराज़ होती, वह पहचान लेता।
जब मैं खुश होती, वह महसूस कर लेता।
और यह बात मुझे कभी-कभी डराती भी थी।
क्योंकि किसी का आपको इतनी अच्छी तरह समझ लेना बहुत खूबसूरत भी होता है...
और थोड़ा खतरनाक भी।
दिन बीतते गए।
महीने गुजरने लगे।
और हमारी बातचीत में भविष्य आने लगा।
अभिमन्यु अक्सर अजीब सवाल पूछता।
"अगर मैं शादी करूँ तो कैसी लड़की होनी चाहिए?"
"अगर वह ज़्यादा बात करे तो?"
"अगर वह कम बात करे तो?"
मैं हर सवाल का जवाब देती।
पूरी ईमानदारी से।
मुझे नहीं पता था कि इन सवालों के पीछे एक ऐसा सच छिपा है जो मेरी दुनिया को हिला देगा।
उस समय मुझे लगता था कि वह बस भविष्य के बारे में सोच रहा है।
मैं नहीं जानती थी कि उसका भविष्य पहले से ही किसी और के साथ जुड़ा हुआ है।
लेकिन उन दिनों...