Objection, Ms. Singhania! - 2 in Hindi Crime Stories by Aarushi Singh Rajput books and stories PDF | Objection, Ms. Singhania! - 2

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Objection, Ms. Singhania! - 2

कोर्टरूम में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था।

सभी की निगाहें जज की तरफ थीं।

जज ने अपनी फाइल बंद करते हुए कहा,

"Mr. Singhania, any more defence witnesses?"

अपनी सीट से उठते हुए राजवीर सिंघानिया ने शांत स्वर में कहा,

"Your Honour, Miss Priya Sharma would like to prove her innocence herself."

फिर उन्होंने अपनी बगल में बैठी युवा वकील की तरफ देखा।

"Furthermore, Your Honour, I would like to request the court to kindly allow my colleague, Aaradhya Singhania, to examine Miss Priya Sharma."

जज ने सिर हिलाया।

"Permission granted."

इतना सुनते ही आराध्या अपनी सीट से उठ खड़ी हुई।

सफेद शर्ट, ब्लैक ट्राउज़र, उसके ऊपर काला एडवोकेट कोट और बालों की सधी हुई पोनीटेल।

उसके चेहरे पर आत्मविश्वास दिखाने की कोशिश थी, लेकिन अंदर कहीं न कहीं घबराहट भी थी।

वह धीरे-धीरे चलते हुए विटनेस बॉक्स के सामने पहुँची।

कुछ क्षणों तक उसने प्रिया को ध्यान से देखा।

फिर गहरी साँस लेकर बोली,

"Miss Priya Sharma, आपकी और Rohan की relationship की शुरुआत कैसे हुई थी?"

विटनेस बॉक्स में खड़ी प्रिया ने एक बार पूरे कोर्टरूम की तरफ देखा।

फिर अपनी नज़रें झुकाते हुए धीमे स्वर में कहा,

"हम एक-दूसरे से प्यार करते थे... बहुत प्यार। कई साल तक हम साथ रहे।"

उसकी आवाज़ भर्रा गई।

कुछ सेकंड तक वह चुप रही।

आराध्या ने नरम स्वर में पूछा,

"फिर क्या हुआ?"

प्रिया ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखें आँसुओं से भर चुकी थीं।

"नशा... नशा सब कुछ बदल देता है।"

"Rohan भी बदल गया था। कभी-कभी तो उसे खुद नहीं पता होता था कि वह क्या कर रहा है।"

कोर्टरूम में हलचल होने लगी।

आराध्या ने एक नज़र चारों तरफ डाली और फिर अपना अगला सवाल पूछा।

"15 September की रात क्या हुआ था, Miss Sharma?"

यह सुनते ही प्रिया के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसने काँपते हुए हाथों को कसकर पकड़ लिया।

"उस दिन Rohan का birthday था। मैंने उसके लिए बहुत सारी arrangements की थीं।"

"रात बारह बजे cake cut करने के बाद हम दोनों bedroom में गए।"

उसकी आँखों में कुछ पुरानी यादें तैर गईं।

"वह बहुत खुश था... उसने मुझे kiss भी किया।"

"मुझे लगा सब ठीक हो गया है।"

एक पल के लिए वह रुकी।

फिर उसकी आवाज़ टूट गई।

"लेकिन अचानक वह बदल गया..."

"उसने मुझे मारना शुरू कर दिया।"

"बेल्ट से... बार-बार..."

कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया।

"जब मेरी हालत खराब हो गई तो उसने मुझे कमरे से बाहर balcony में बंद कर दिया।"

प्रिया रोते हुए बोली,

"मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।"

"मैं किसी तरह वहाँ से निकली और भागकर backyard में पहुँच गई..."

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

"लेकिन वह वहाँ भी आ गया।"

इतना कहकर वह फूट-फूटकर रोने लगी।

कोर्टरूम में बैठे लोग आपस में बातें करने लगे।

कई लोगों के चेहरे पर सहानुभूति थी।

आराध्या वहीं खड़ी रह गई।

उसके हाथ में पकड़ी फाइल धीरे-धीरे नीचे झुक गई।

उसकी नज़र प्रिया के आँसुओं पर टिक गई।

फिर अनायास ही उसकी नज़र राजवीर सिंघानिया पर गई।

राजवीर उसे इशारे से आगे सवाल पूछने के लिए कह रहे थे।

लेकिन आराध्या के लिए यह आसान नहीं था।

उसके सामने एक टूटी हुई औरत खड़ी थी।

और वह उससे और सवाल नहीं कर पा रही थी।

कुछ क्षणों तक पूरा कोर्टरूम उसकी तरफ देखता रहा।

फिर उसने गहरी साँस ली।

और जज की तरफ देखकर बोली,

"No further questions, Your Honour."

यह सुनते ही राजवीर सिंघानिया का चेहरा सख्त हो गया।

उन्होंने आँखें बंद कर गहरी साँस ली और निराशा में अपना हाथ माथे पर रख लिया।

दूसरी तरफ विपक्ष के वकीलों के चेहरे खिल उठे।

कोर्टरूम में फुसफुसाहट शुरू हो गई।

कुछ देर बाद जज ने अगली hearing की तारीख घोषित कर दी।

"Court adjourned."

कोर्ट से वापस लौटते समय कार के अंदर अजीब-सी खामोशी थी।

आराध्या ड्राइव कर रही थी।

वह बार-बार अपने पिता की तरफ देख रही थी।

लेकिन राजवीर पूरे रास्ते चुप बैठे रहे।

आखिरकार उन्होंने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा,

"I should have known."

कुछ सेकंड बाद उनकी ठंडी आवाज़ फिर गूँजी।

"You're weak... just like your mother."

आराध्या का हाथ स्टीयरिंग पर कस गया।

राजवीर बिना उसकी तरफ देखे बोले,

"Priya was about to break, Aaradhya."

"बस थोड़ा और दबाव डालती..."

"I am sure she would've told us everything."

अब आराध्या खुद को रोक नहीं पाई

उसने तुरंत कहा,

"Dad... माँ को बीच में मत लाइए।"

कार में फिर सन्नाटा छा गया।

कुछ पल बाद राजवीर ने गहरी साँस ली।

इस बार उन्होंने उसकी तरफ देखा।

उनकी आँखों में सख्ती थी।

"It's because I'm not soft."

फिर उन्होंने धीमे लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा,


Hey दोस्तों! ❤️

मैं हमेशा से एक ऐसी lawyer-based story लिखना चाहती थी जिसमें court, mystery, emotions, family drama और relationships का एक अलग ही mix हो। इसी सोच से "OBJECTION, MS. SINGHANIA!" की शुरुआत हुई है।

इस कहानी में कुछ घटनाएँ काल्पनिक हैं, जबकि कुछ भावनाएँ और परिस्थितियाँ हमें असल ज़िंदगी से जुड़ी हुई महसूस हो सकती हैं। मैंने इसे बिल्कुल एक novel की तरह लिखने की कोशिश की है ताकि आप कहानी के साथ जुड़ सकें और हर किरदार को महसूस कर सकें।

अगर आपको कहानी पसंद आ रही है, तो please मुझे अपना review ज़रूर दीजिए। आपके comments पढ़कर मुझे पता चलता है कि मैं कहाँ अच्छा लिख रही हूँ, कहाँ सुधार की ज़रूरत है, और आगे आपको कहानी में क्या देखना पसंद आएगा।

और हाँ, अगर आपको यह कहानी अच्छी लग रही है तो मुझे follow करना मत भूलिएगा। आपका support ही मुझे आगे लिखने की motivation देता है। 💖

फिलहाल के लिए इतना ही...

Milte hain next chapter mein! ⚖️📖✨

 Aarushi ✍️💕

"She was."