Objection, Ms. Singhania! - 3 in Hindi Crime Stories by Aarushi Singh Rajput books and stories PDF | Objection, Ms. Singhania! - 3

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Objection, Ms. Singhania! - 3

रात के लगभग साढ़े नौ बज रहे थे।

मुंबई की चमचमाती सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं।

एक काली Mercedes हाईवे पर तेज़ रफ्तार से दौड़ी चली जा रही थी।

कार के अंदर हल्का-सा अंग्रेज़ी गाना चल रहा था।

अचानक मोबाइल की रिंगटोन गूँजी।

कार की स्क्रीन पर नाम फ्लैश हुआ—

Riya Calling...

ड्राइव कर रहे लड़के ने ब्लूटूथ के ज़रिए कॉल रिसीव की।

"Hi."

दूसरी तरफ से उत्साहित आवाज़ आई,

"Sir, कहाँ हैं आप? Everyone is waiting for you."

लड़के के होंठों पर मुस्कान आ गई।

"First of all... congratulations."

"Mumbai ki pehli jeet mubarak ho."

"Congratulations, Sir!" रिया खुशी से बोली।

"You are the best. I knew you would do it."

लड़के ने हल्की हँसी के साथ कहा,

"Okay... I'm on my way."

इतना कहकर उसने कॉल काट दी।

उसने एक्सीलेरेटर थोड़ा और दबाया।

कुछ ही देर बाद कार Hotel Blue Paradise के पार्किंग एरिया में आकर रुकी।

अंदर आज एक शानदार पार्टी चल रही थी।

Singhania Group की सफलता का जश्न।

हॉल रोशनी से जगमगा रहा था।

देश के बड़े बिज़नेसमैन, नामी वकील, मीडिया और कई मशहूर हस्तियाँ वहाँ मौजूद थीं।

स्टेज पर Rajveer Singhania अपनी पूरी फैमिली के साथ खड़े थे।

कैमरों की फ्लैश लगातार चमक रही थीं।

"Sir... this side!"

"One more picture!"

उसी समय पार्किंग से वही लड़का अंदर की तरफ बढ़ा।

उसने ब्लैक सूट पहना हुआ था।

हाथ जेब में थे।

चेहरे पर वही बेफिक्र मुस्कान।

जैसे ही वह सीढ़ियाँ चढ़ रहा था...

अचानक सामने से आती एक लड़की से उसकी टक्कर हो गई।

लड़की का संतुलन बिगड़ गया।

लेकिन गिरने से पहले ही लड़के ने उसकी कमर थाम ली।

दोनों की नज़रें मिलीं।

कुछ पल के लिए समय जैसे थम गया।

लड़के ने शरारती मुस्कान के साथ कहा,

"Baby... you know I like it slow."

लड़की ने बिना घबराए खुद को उससे अलग किया।

वह कोई और नहीं...

आराध्या सिंघानिया थी।

उसने अपने चेहरे के भावों पर काबू रखते हुए पूछा,

"वापस कब आए?"

लड़के ने कंधे उचकाए।

"That doesn't matter."

फिर थोड़ा झुककर मुस्कुराया।

"I think what matters is... I'm back."

वह और करीब आ गया।

"शायद... तुम्हारा प्यार मुझे वापस खींच लाया।"

आराध्या हल्का-सा मुस्कुराई।

मगर वह मुस्कान सिर्फ़ दिखावे की थी।

"मेरा प्यार...?"

फिर उसने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,

"या Ruhi का?"

वह बिना रुके आगे बोली,

"या Aditya का?"

"या फिर... Heena का?"

वह जैसे पुराने हिसाब खोलती जा रही थी।

"उम्म..."

उसने सोचने का नाटक किया।

"वो कौन थी जिसे मैंने तुम्हारे bedroom में पकड़ा था...?"

"Preeti...?"

फिर खुद ही सिर हिलाया।

"नहीं... Kriti."

"Preeti तो उसकी बहन थी।"

Vihaan बस उसे देखता रह गया।

दोनों चलते-चलते वाइन काउंटर तक पहुँच गए।

दोनों ने अपने-अपने ग्लास उठा लिए।

वाइन की एक घूँट लेते हुए Vihaan मुस्कुराया।

"Sarcastic Aaradhya..."

"लगता है आज Court में दिन अच्छा नहीं गया।"

आराध्या ने भी वाइन की एक छोटी-सी sip ली।

फिर उसकी तरफ देखकर बोली,

"ओह, Vihaan..."

"हम दोनों एक-दूसरे को इतना अच्छे से जानते हैं..."

"तो क्यों न शादी ही कर लें?"

"वैसे भी..."

"मैंने तो हमारे बच्चों के नाम तक सोच रखे थे।"

Vihaan बिना देर किए मुस्कुराया।

"Of course..."

"Ansh और Anshika."

"यही नाम रखे थे ना?"

कुछ पल की खामोशी छा गई।

Vihaan की मुस्कान धीरे-धीरे फीकी पड़ गई।

"मैं कुछ नहीं भूला, Aaru..."

"तुम ही भूल गई हो।"

आराध्या की आँखें हल्की-सी नम हो गईं।

लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया।

"भूली नहीं हूँ..."

"भुलाना सीख रही हूँ।"

"Because..."

"You left me no choice."

Vihaan ने गहरी साँस ली।

"Come on, Aaru..."

"We were kids."

"दो साल हो गए।"

"मैं Delhi office संभाल रहा हूँ।"

"Rajveer Sir भी मुझसे खुश हैं।"

"Can't we start afresh?"

"Like a clean slate?"

आराध्या की आँखों में तैरते आँसू अब साफ दिखाई दे रहे थे।

उसने मुस्कुराने की कोशिश की।

लेकिन मुस्कुरा नहीं पाई।

धीरे से बोली,

"Too little..."

"...too late, Vihaan."

इतना कहकर उसने अपना वाइन ग्लास टेबल पर रखा...

और बिना पीछे देखे वहाँ से चली गई।

Vihaan बस उसे जाते हुए देखता रह गया।

वह कुछ कहना चाहता था...

लेकिन शब्द उसके पास भी नहीं बचे थे।

तभी स्टेज पर खड़े Rajveer Singhania की आवाज़ पूरे हॉल में गूँज उठी।

सभी की नज़रें उनकी तरफ उठ गईं।

कैमरामैन ने रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।

Rajveer ने मुस्कुराते हुए कहा,

"Forty-five years... actually, it feels like yesterday."

"But what a journey it has been."

"The journey from the docks of Mazgaon to Malabar Hill... was never easy."

उन्होंने एक पल रुककर अपनी फैमिली और कर्मचारियों की तरफ देखा।

"Any success is impossible without a supportive family and brilliant employees."

"आज मैं अपनी family... और अपनी पूरी team का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।"

"उन्होंने कभी भी मेरे सपनों की उड़ान को रुकने नहीं दिया।"

हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।