My Dear Professor - Part 27 in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 27

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 27

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नैना सांसे थामे खडी थी। अमोघ गहरी नजरो से उसे देख रहा था। 

" अमोघ मै..." 

नैना बोलने लगी ही थी कि अमोघ ने बांहो से पकड नैना को खुद से सटा लिया। नैना सिहर उठी । दोनो की बीच दाल के दाने जितनी दूरी नही थी। नैना की सांसे रफ्तार पकडने लगी वही अमोघ..उसकी धडकने नैना साफ सुन सकती थी। वो तेज थी , अस्थिर थी...एकलौता सबूत कि अमोघ भी उसी तरह एफेकटिड है जितनी नैना है। 

" कब तक दूर रहने का.सोचा है आपने नैना ! कब तक ? " , अमोघ नैना के चेहरे की तरफ झुक गया। 

" अमोघ तुम जानते हो.मेरी कंडिशन । मत समय.बर्बाद करो ! "

अमोघ की पकड नैना की बांह.पर कस गई।  इतनी की नैना.समझ जाए..यहा वो गलत है। 
अमोघ ने चेहरा.झुकया और नैना.के गाल पर होठ ठहरा दिए।

" अगर इस.बात पर.मै.आपको किस.कर पनिश करू तो ! " 

" हं?! " , नैना असमंजस की स्थिति मे.जा चुकी थी। अमोघ की छुअन पर उसका सर चकरा रहा था।  

" आप मेरे.प्यार का अपमान नही.कर.सकती ।.किसने कहा आपसे की.मै समय.बर्बाद कर.रहा.हूं। मै अपने साथी का साथ दे रहा.हूं। "
अमोघ गहरी.आवाज मे.बोला।

नैना की आंखे भर आई ।.वो.सिसक पडी।
" कुछ हो.गया.मुझे तो...! "

अमोघ हल्का.सा पिछे हटा । वो नैना के आंसूओ से परेशान हो गया था। उसने अपने दोनो हाथो मे नैना का चेहरा भर लिया। 
" कुछ नही होगा । मै आपको कुछ नही होने दुंगा। जरूरत पडी तो विदेश.ले जाकर इलाज कराना पढा तो करूंगा । यू आर नॉट लिविंग मी ! आई वोंट लेट यू लीव.मी । " 

नैना ने सिसकते हुए दूर जाने की कोशिश करी तो अमोघ ने अपनी पकड कस दी।

" नैना..स्टे ! प्लीज । दिस मोमेंट वोंट कम बैक । क्यो भविष्य के कारण वर्तमान को आंसूओ मे डुबा रही हो। नैना..बेबी आई लव यू। आई विल डू एवरिथिंग टू सेव यू..। जस्ट डोंट..डोंट लिव मी। प्लीज! "

अमोघ अपने घुटनो पर आ गया था। उसके चेहरा आंसूओ से भर गया था। अमोघ की इस तरह देख नैना खुद को रोक.नही पाई।  वो.जमीन पर बैठ उसके साने से लग गई।  
अमोघ ने उसे अपनी बांहो मे कस लिया । 
" आई एम सॉरी ! " नैना बुदबुदाई। 

" कोई बात नही । पर अब जाने की..बात मत करना।.मत कहना की आपके साथ मै.समय बर्बाद कर.रहू हूं। यू आर द मोस्ट इम्पोर्टेंट पार्ट ऑफ माई लाईफ।. डैम इट....यू आर माई लाईफ । एंड आई एम फकिंग डिवोटिड टू माई लाईफ।  "

आमोघ ने कहा और.नैना की आंखे एक एक कर चूम ली। 




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आज एक हफ्ता हो गया था चारू को अमर के पास ट्युशन जाते हुए।  इस बीच उसने अपने स्टडी आर्स बडा दिए थे। जो टॉपिक अमर क्लास मे पढाता और जो एक्स्ट्रा क्लास मु..वो दोनो टॉपिक वो पहले से पढके जाती । हांलाकि पढते समय क्लास मे उसका ध्यान अमर पर ही रहता । 

आड भी अमर पढा रहा था। और चारू हमेशा की तरह लास्ट रो , फस्ट बेंच पर बैठी थी। 

अमर ने बोर्ड पर मार्कर से लिखा ' द ग्रिक ट्रेडिशन ' । वो क्लास की तरफ मुडा और पढाने लगा । 


" तो सबसे पहले प्लाटो के बारे मे बात करते है। प्लाटो वॉज आ इडियलिस्ट मैन ।ही हैज आ विजन ऑफ आ आइडियल वर्ल्ड जिसे यूटोपिया कहा जाता है ।  युटोपिया मतलब एक ऐसा समाज जहा सब समान हो , सबके पास अपनी बात कहने का , सम्मान पाने का अधिकार हो। ऐसी दुनिया जहा कोई भेदभाव ना हो और सबके पास सामान अधिकार हो। हम अपनी भाषा मे बोले..तो प्लाटो राम राज्य की बात करता था। हम इंडियंस भी थो राम राज्य को ऐसा.समय कहते है ना जहा सब खुश है , सामान अधिकार और.सम्मान के साथ जीते है। तो यही आईडिया प्लाटो का था । "

अमर बोलते बोलते चुप हो गया। उसने पूरी क्लास मे.एक सरसरी निगाह डाली । अमर की नजर चारू पर आकर ठहर गई।  वो पैन की कैप चबाते हुए पूरे ध्यान से अमर को देख रही थी। अमर ने सर हिला दिया।

" चलो पढ रही है गंभीरता से ! " , अमर ने मन ही मन सोचा ।  

फिर उसने पुरी क्लास को संबोधित करते हुए सवाल किया , " कोई प्लाटो के वर्कस् बता सकता है ? क्या काम किया था उसने ? " 



तभी शशांक , नव्या , नैना , चारू और बाकि के कुछ दो चार स्टुडेंट ने जवाब देने के लिए हाथ उठा दिए।  

" नव्या यू मे आंसर ! ",

नव्या खडी हो गई।  " प्लाटो राईट ' द रिपब्लिक ' । ही राईट दिस बुक आफ्टर पिलोपोनेशियन वार । एज ही वाज सिपींग आ परफेक्ट स्टेट..विच नाओ वी कॉल युटोपिया । " 

" परफेक्ट ! " , अमर ने कहा और आगे पढाने लगा।


वो अभी पढा ही रहा था कि उहकी नजर चारू पर पडी । वो अपने मुंह मे पेन लिए चबा रही थी। और उहकी नजर अमर पर ही थी। अमर.को ना जाने क्यो एहसास हुआ कि चकरू गुस्से से घूर रही है। उसने अपनी भव उठा दी तो चकरू ने नजरे किताब पर टिका दी।

अमर पढाते हुए चारू की टेबल तक गया और उसके हाथ से पेन छीन कैप समेत खिडकी से बाहर फेंक दिया। चारू मुंह खोले उसे देखती रह गई।  

" गलत आदत है ये । " , अमर.हल्की आवाज मे बोला। चारू ने अपना निचला.होंठ हल्का सा बाहर निकाल लिया। अमर उसे इग्नोर करता हुआ दूसरी तरफ चला गया। 





शाम हो चुकी थी। चारू अमर के घर के दरवाजे पर खडी थी। आज उसने नीला चिकन कारी कुर्ता और जिंस पहनी थी। उसपर गुथे हुए चोटी मे बाल और एक नीला स्वेटर । उसके गाल हल्के लाल थे । ना जाने क्यो वो शर्मा.रही थी।

उसने बैल बजाई तो अमर ने दरवाजा खोला। 

" गुड इवनिंग सर । " , चारू ने विश किया।

अमर ने हां मे सर हिला दिया। चारू अंदर आने लगी की तभी कुछ तेजी आया और उसके पैरो से टकरा गया। चारू लडखडा गई।  वो गिरती की एक हाथ उसकी बांह पर कस गया। चारू की सांसे अटक गई।


ये पहला स्पर्श.था । उनकी पहली छुअन ! क्या किसी छूना मन मे इतनी तरंगे उत्पन्न कर सकता है । क्या किसी का स्पर्श स्वयं को बावरा.कर सकता है । ये क्या हो गया है.मुझे !  


क्रमशः