Mafia King - 2 in Hindi Love Stories by Sah Ankita books and stories PDF | Mafia King - 2

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Mafia King - 2

अंकिता डर तो गई थी, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए सर से बात की। उधर, Ranvijay का गुस्सा और बढ़ता जा रहा था। जब अंकिता ने भी पलटकर कड़े शब्दों में कहा, "क्या करोगे तुम? फ़ोन पर खुद को शेर समझते हो, अगर सामने होते तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल करती! मुझे धमकी देने की कोशिश मत करो, ये धमकी उसे देना जो तुमसे डरता हो। मैं तुमसे बिल्कुल नहीं डरती।"

अंकिता को अंदाज़ा भी नहीं था कि वह किससे टकरा रही है—वह साक्षात "Mafia King" था। यह बदतमीजी सुनकर Ranvijay का खून खौल उठा। उसने तुरंत शिवाय को आदेश दिया, "पता लगाओ ये कौन है। एक घंटे के अंदर इसकी पूरी कुंडली मेरे सामने होनी चाहिए।"

कुछ देर बाद, शिवाय ने फाइल लाकर दी और बताया कि वह एक कॉल सेंटर की लड़की है। Ranvijay ने फाइल शिवाय के चेहरे पर फेंक कर मारी और दहाड़ते हुए बोला, "पूरी जानकारी कहाँ है? अगर एक छोटा सा काम नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दो!" शिवाय डरते-डरते बोला, "बॉस, थोड़ा समय दीजिए, पता लगाता हूँ।" Ranvijay ने भारी आवाज़ में चेतावनी दी, "जल्द से जल्द, वरना इस्तीफे के लिए तैयार रहना।" केबिन से बाहर निकलते ही शिवाय गहरी सांसें लेने लगा, "बॉस तो जान ही ले लेते हैं। पता नहीं ये लड़की कौन है, बेचारी का क्या होगा... शादी कौन करेगा इससे?"

उधर अंकिता अपनी दोस्त सानिया और अन्य सहकर्मियों के साथ काम के बाद मजे कर रही थी। रास्ते में गोलगप्पे खाए और सब अपने घर निकल गए। समय बीतता गया। अगले दिन Ranvijay के सबसे बड़े होटल 'द रॉयल फोर्ट्रेस' (The Royal Fortress) की ग्रैंड ओपनिंग थी। वह उसमें इतना व्यस्त था कि उस कॉल सेंटर वाली लड़की को भूल गया। दूसरी तरफ, अंकिता अपने काम में मेहनत कर रही थी क्योंकि उसे उस होटल का पास जीतना था। टारगेट पूरा होते ही उसे पास मिल गया, यह जाने बिना कि उसकी किस्मत उसे कहाँ ले जा रही

अगली शाम, मुंबई के सबसे बड़े होटल 'The Royal Fortress' की ओपनिंग थी। जगमगाती रोशनी और आलीशान महफिल में Ranvijay एक राजा की तरह खड़ा था। उसका परिवार गर्व से फूल रहा था, और मीडिया उसके हर लफ्ज़ को नोट कर रही थी।
उसी भीड़ में अंकिता, अपनी सहेली सानिया के साथ दाखिल हुई। किस्मत उसे उसी जाल में खींच लाई थी जिसे Ranvijay  था। रात गहराते ही सानिया नशे में चूर हो गई। 
रात के 11 बज रहे थे, अंकिता ने घर जाने की जिद की, पर सानिया को होश नहीं था। अंकिता ने कहा, "तुम यहीं रुको, मैं ऑटो लेकर आती हूँ।"
उधर, Ranvijay क्लाइंट्स को विदा कर वापस लौट रहा था। तभी उसके सामने नशे में धुत सानिया लड़खड़ाकर गिरने ही वाली थी कि Ranvijay ने उसे संभाल लिया। वह कभी किसी लड़की को छूता भी नहीं था, लेकिन आज की खुशी में उसने सिर्फ उसे गिरने से बचाया था।

तभी अंकिता वहां पहुंची। उसे गलतफहमी हुई कि कोई लड़का उसकी सहेली का फायदा उठा रहा है। गुस्से में दौड़कर आई और Ranvijay को एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। Ranvijay का चेहरा एक तरफ झुक गया। उसे आज तक किसी ने छूने की हिम्मत नहीं की थी, और अंकिता ने उसे सबके सामने थप्पड़ मारा था!

अंकिता चिल्लाई, "घटिया इंसान! अकेली लड़की का फायदा उठाते हो? समझते क्या हो खुद को?"
Ranvijay का पारा सातवें आसमान पर था। उसने तुरंत अंकिता के बाल पकड़े और खींचते हुए बोला, "तुम्हें तो मैं बताता हूँ!" अंकिता ने चुनौती दी, "क्या बताओगे? मैं पुलिस को कॉल करती हूँ!" Ranvijay जोर से हंसा, "पुलिस? पुलिस भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।" अंकिता ने पूछा, "तो क्या तुम प्राइम मिनिस्टर हो या कोई माफिया?" Ranvijay के चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान आ गई। वह उसे खींचते हुए अपने प्राइवेट रूम में ले गया और बेड पर फेंक दिया। कमरे का दरवाजा बंद होते ही अंकिता की रूह कांप गई—