Kushal - 1 in Hindi Drama by Karan Meena books and stories PDF | कुशाल (TK Tycoon) - 1

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कुशाल (TK Tycoon) - 1

कुशाल (TK Tycoon)
[यह कहानी है एक ऐसे अच्छे लड़के की, जो गरीबी में पला। माता-पिता के होते हुए भी वह अनाथ रहा और आगे चलकर उसने खुद का एक बहुत बड़ा बिजनेस एम्पायर (व्यापारिक साम्राज्य) खड़ा कर दिया। आज उसका नाम बहुत ही इज्जत और बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उसकी एक अनोखी कहानी है, और यही वह बात है जो आम लोगों को उससे जोड़ती है; जिससे लोगों को भी अपनी भावनाओं का सम्मान मिलता है।]

मुख्य पात्र (मेन लीड):- कुशाल, जो आज के जमाने का एक गरीब लड़का है। वह कुछ पैसे कमाकर अपना पेट पालने की कोशिश करता है। वह पहले एक अनाथ आश्रम में रहता था, पर जब उसकी उम्र 16 साल की हो गई, तो वहीं से उसे इस दुनियादारी के बीच भेज दिया गया। वहाँ उसका समय ठीक-ठाक गुजरा, पर जब वह वहाँ से बाहर आया, तो धीरे-धीरे दुनिया की सब बातें समझ गया। वह अभी सड़क के किनारे फुटपाथ पर रहता है और कोशिश कर रहा है कि उसे कॉलेज के हॉस्टल का कोई कमरा मिल जाए। कुशाल अभी एक कारखाने में काम करता है, लेकिन कारखाने में काम कम होने की वजह से वह आधे समय फ्री ही रहता है। इस बीच वह नई नौकरी ढूंढता रहता है ताकि उसे कोई और काम मिल जाए और उसका गुजारा हो सके। बचे हुए समय में वह कॉलेज चला जाता है।

आज के दिन भी कुशाल कॉलेज जा रहा था। आज उसके पास कारखाने में कोई काम नहीं था, इसलिए वह कॉलेज की लाइब्रेरी में बैठकर किताबें पढ़ने का मन बना रहा था। वह अपने टेंट से जल्दी-जल्दी निकल जाता है और ट्रैफिक की भीड़-भाड़ में लोगों के बीच तेज कदमों से चलने लगता है। उसे अपने फुटपाथ वाले घर से कॉलेज जाने में पूरे 45 मिनट लग जाते हैं। वह वहाँ पैदल ही जाता है, क्योंकि ऑटो या बस में जाने की उसकी जेब इजाजत नहीं देती। उसका यह भी मानना है कि पैदल चलने से रास्ते का तजुर्बा मिलता है और साथ ही मॉर्निंग वॉक भी हो जाती है। कुशाल चला ही जा रहा था कि रास्ते में उसे एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। वह बुजुर्ग सड़क के किनारे खड़े होकर गाड़ियों के रुकने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन गाड़ियाँ इतनी तेज थीं कि एक जाती तो दूसरी फिर से आ जाती। वह बूढ़ा आदमी एक पैर आगे बढ़ाता और सड़क से नीचे उतरता, पर जैसे ही दूसरी गाड़ी आती, वह डरकर दो कदम वापस पीछे खींच लेता।
कुशाल ने चलते-चलते देखा कि वहाँ की ट्रैफिक लाइट खराब है, इसलिए लोग बिना रुके दनादन गाड़ियाँ निकाले जा रहे हैं।

कुशाल (अपने आप से):- "आजकल के लोगों में तो थोड़ी देर का सब्र भी नहीं है। बेचारे बूढ़े बाबा! कोई बात नहीं कुशाल, यह काम भी तुझे ही करना होगा। सर जी, लेट्स गो (चलिए चलते हैं)!"

इतना कहकर कुशाल उस बूढ़े व्यक्ति की ओर बढ़ने लगा। जब कुशाल उस बुजुर्ग से कुछ ही दूरी पर था, तभी उसने देखा कि उसकी ही उम्र की एक लड़की उस बूढ़े आदमी के पास आई। उसने उनके हाथ से भारी थेला ले लिया और उसे अपने एक हाथ में थाम लिया। फिर दूसरे हाथ से उस बूढ़े आदमी का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क पार कराने लगी।

यह सब देखकर कुशाल एक खंभे के पास रुक गया और वहीं से देखने लगा। वह लड़की काले रंग की ड्रेस (ब्लैक ड्रेस) में थी, इसलिए कुशाल की नजरें उसी पर टिक गईं। लड़की के लंबे बालों की वजह से उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए कुशाल उसका चेहरा देखने के लिए थोड़ा उत्सुक था। पर जैसे ही उस लड़की ने बूढ़े व्यक्ति को सड़क पार कराई और उनका थैला उन्हें लौटाया, ठीक उसी वक्त एक रिक्शा उस लड़की के आगे आकर रुका। वह लड़की तुरंत उसी रिक्शे में बैठ गई और रिक्शा आगे निकल गया।

कुशाल (अपने आप से):- "चलो यार, अब दिल छोटा मत कर। कुछ तो अच्छा हुआ, कम से कम उन बूढ़े बाबा का काम तो बन गया।"

इसके बाद कुशाल जल्दी-जल्दी कॉलेज की ओर निकल गया। कुशाल जिस कॉलेज में पढ़ता था, वह शहर का नंबर 2 कॉलेज था। कुशाल का एडमिशन वहाँ उसकी टॉप रैंकिंग के हिसाब से ही हो पाया था, क्योंकि उसके 12वीं में बहुत अच्छे मार्क्स आए थे। कुशाल पढ़ाई में हमेशा अव्वल था। उसकी परिस्थितियाँ भले ही खराब थीं, पर वह जैसे-तैसे सब मैनेज कर लेता था।
इस साल कुशाल का फर्स्ट सेमेस्टर का एग्जाम (परीक्षा) हो चुका था, जिसमें कुशाल की रैंक टॉप 3 में आई थी। कुछ समय बाद वह कॉलेज पहुँच जाता है। वह वॉशरूम होकर सीधे लाइब्रेरी जाता है और वहाँ से दो किताबें लेकर अपनी क्लास में चला जाता है। 

क्लासरूम में लगभग सभी बच्चे आ चुके थे। कुशाल भी चुपचाप क्लास में गया और बेंचों के बगल से सीधा निकलकर, सबसे पीछे वाली रो (लाइन) की सीट पर अकेला जाकर बैठ गया। आगे की बेंचों पर 4-5 लड़के और 3-4 लड़कियाँ आपस में बातें कर रहे थे। वे सब एक ग्रुप बनाकर गप्पें लड़ा रहे थे। ये वे स्टूडेंट्स थे जिन्हें पढ़ाई से ज्यादा केवल डिग्रियों से मतलब था—अमीर बाप के बच्चे जो थे! उनमें से कुछ लड़के मिडिल क्लास के थे जो उनके दोस्त बन गए थे, और कुछ लड़कियाँ भी रॉयल और मिडिल क्लास की थीं। कुशाल उनसे बात नहीं करता था, क्योंकि अगर वह बात करने जाता, तो उन अमीर बच्चों का 'हाई स्टैंडर्ड' नीचे गिर जाता और वे लोग कुशाल के लिए कोई न कोई मुसीबत खड़ी कर देते। इसलिए वह हमेशा चुप ही रहता था।
जब कुशाल चुपचाप बैठकर आज का लेसन (पाठ) याद कर रहा था, तभी आगे बातें कर रहे लड़कों के ग्रुप में से एक लड़के की नजर कुशाल पर पड़ी। वह तंज कसते हुए बोला:

राजेश (कुशाल से):- "अरे देखो तो, कौन आकर बैठा है! कुशाल भाई साहब, कॉलेज के टॉप 3 रेंकर!"
यह सुनकर कुशाल ने किताब से नजरें हटाईं और धीरे से ऊपर की ओर देखा। क्लास के सारे लोग उसे ऐसी कातिलाना निगाहों से घूर रहे थे, मानो कुशाल ने टॉप 3 में आकर कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो। कुशाल अनजान निगाहों से उन्हें थोड़ा-थोड़ा देखने लगा। तभी उस ग्रुप में से एक और लड़का बोला।

एक लड़का (कुशाल का मजाक उड़ाते हुए):- "क्यों कुशाल सर? आज आप बड़ी जल्दी आ गए? रोज तो लेट आते हो और कभी-कभी तो कॉलेज ही नहीं आते! और यह टॉप रैंक भी लाइब्रेरी की बुक्स से पढ़कर ले आते हो? बड़े कमाल के इंसान हो यार तुम भी! कहीं ऐसा तो नहीं है कि तुमने कॉलेज के ऑफिस में झाड़ू लगाने का काम चालू कर दिया हो, और मौका पाकर ऑफिस से क्वेश्चन पेपर ही उड़ा लिया करते हो? क्या राज है, हमें भी तो बताओ!"

यह सुनकर पूरी क्लास में बैठे स्टूडेंट जोर-जोर से हंस पड़े। कुशाल तो मानो शर्म के मारे पानी-पानी हो गया। अब कुशाल बोले तो क्या बोले, क्योंकि उसकी गरीबी का मजाक पूरी क्लास के सामने सरेआम बन चुका था।

• क्या कुशाल इन लड़कों को अपनी पढ़ाई से जवाब देगा?
 • या रास्ते में मिली काली ड्रेस वाली लड़की से उसकी दोबारा मुलाकात कॉलेज में ही होगी?