Pyar ek Ankaha Ahsaas - 2 in Hindi Love Stories by Anita books and stories PDF | प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 2

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प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 2

हैलो : "आई एम अंश".... अंश शर्मा...!! 

विधि तो बस मुह खोले बिना पलके झपके  उसे देखने लगी। 

उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि वो लड़का जिसके साथ वो रोज इतनी बाते करती हैं वो एकदम से उसके सामने ऐसे आ सकता है ओर वो भी इतनी दूर से.... 

विधि तो अंश को बस देखे जा रही थी क्यों की वो लड़का जिसकी बाते उसे इतनी प्यारी लगती थी उस बातों की वजह से ही उसे अंश से प्यार हुआ था वो सचमुच ही इतना प्यारा था की कोई भी लड़की उसके प्यार मे पड़ जाए... 

उचां लंबा देखने मे स्मार्ट ओर आँखे...आँखे तो ऐसी की कोई भी खो जाए फिर ऐसे इंसान के प्यार में कौन ना पड़े.... 

विधि तो मन मे इतनी खुश थी पर हैरान भी क्यों की अंश जयपुर से था ओर विधि मुंबई से... 

विधि अब भी मुहॅ खोले अंश को देखे ही जा रही थी तभी अंश ने विधि के काँधे को हिलाते हुए कहा... 
"हैलो पहचाना"...मैं अंश...!! 

पर र् र्.... तुम तो जयपुर में...फिर यहाँ कैसे....?? 

हा...!! मगर मै यही मुंबई मे, इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता हूँ, 
IIT Bombay में और वही कॉलेज के पास ही एक फ्लैट मे रेंट से रहता हूँ।


फिर तुमने कभी बताया क्यों नहीं की तुम यही रहते हो छुपाया क्यों। 

अरे,,,मुझे तुम्हें सरप्राईज जो देना था। 
अंश ने हँसते हुए कहा।। 

पहले ही बता देता तो आज ऐसे..इतनी खुशी तुम्हारे चेहरे पर कैसे देखता। 

सच मे विधि अंश को ऐसे सामने देख कर सरप्राईज् तो थी ही...
और खुश भी उतनी ही थी। 
उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी। 
खुश हो भी क्यु नही, आज वो इंसान उसके सामने बैठा था जिसे वो बेहद प्यार करती थी।।  

विधि अंश को देख कर अपने फ्रेंड्स को जैसे भूल ही गयी थी...
जो उसे और अंश को बस देखे जा रहे थे तभी विधि का ध्यान निशा पर गया जो अंश को टकटकी लगाए देखे जा रही थी। 
Oyee...!! "क्या देख रही है ऐसे"...?? 
इतना ना घूर नहीं तो मेरे अंश को नज़र लग जायेगी। 
ओ....हो!! मेरा अंश... 
"वैसे तेरा अंश है ही देखने लायक तो... 
क्यों न देखे कोई...??और मुस्कुराते हुए हाथ से इशारा किया।।👌👌 

निशा की बात सुन कर अंश बोल 
पड़ा हा क्यों नही वैसे भी तुम्हारी दोस्त है तो आज से मेरी भी दोस्त हुई। 
तो उसका भी उतना ही हक़ बनता है जितना तुम्हारा, हैं ना निशा..??
अंश ने निशा से hi-fi करते हुए 
कहा। 

फिर क्या था बस निशा भी अंश की बातों मे आ गयी और दोनों ही बाते
करने लगे बेचारी विधि तो बस देखते
ही रह गयी। थोड़ी देर विधि चुप रही फिर अंश का हाथ पकड़ उसे खिचती हुई कॉलेज के बाहर ले गयी। 

अरे,रे,रे... 
क्या हुआ ?? कुछ तो बोलो... 
पर अंश विधि का इशारा समझ गया था। 
निशा से अंश जो हँस- हँस के बातें कर रहा था यह देख विधि को जलन हो रही थी। 

"क्यों...??कुछ बोलू"...
गुस्से से विधि ने कहा तुम उसके दोस्त हो या मेरे... 
किसे मिलने आये थे मुझसे या उससे
जो उसके साथ चिपक गए।। 

अरे,, वह तुम्हारी दोस्त है और दोस्त को भी खुश रखना चाहिए नहीं तो उसने तुम्हारी बात किसी को बता दी तो.... 
प्रॉब्लम हो जाएगी 
हम्म,, सच कह रहे हो तुम
अब चलो यहाँ से कहीं दूर इन सब से... 
अंश का हाथ फिर से खीचते हुए विधि
ने कहा। 
ओके!! चलो... 
पर मै तो एक अजनबी और अजनबी पर इतना भरोसा नहीं करते। 

कौन कहता है तुम अजनबी हो कितने दिनों से जानती हु तुम्हे और तुम मुझे। 

हा...!! मगर वो फोन पर बातें होतीं थी मिले तो अब ना...
"हा तो"...?? 
तुम्हे कोई प्रॉब्लम हो तो कहो... 
मेरे लिए ना तुम अजनबी हो ना पहली बार तुमसे मिली हु। मै तो रोज तुमसे मिलती हु अंश के पास आकर विधि ने
प्यार से कहा। 

फिर वह दोनों वही कॉलेज के पार्क
मे बैठ गए और बातें करने लगे।। 

अच्छा ये बताओ तुम्हे कैसे पता चला मै यहाँ इस कॉलेज में पढ़ती हूँ।
विधि ने अंश से पूछा। 

"तुम भी ना"...भूल गयी तुमने ही बताया था और मै कई बार यहाँ आकर तुम्हे देख चुका हु दूर से बस कभी पास आकर मिला नहीं।
ओह्ह... सच में...!! 
मतलब मैं ही अब तक अंजान थी सब बातों से और मुझे लगता था तुम वहा इतनी दूर हो मुझसे जयपुर में ।। 

अरे...नाराज क्यों होतीं हो अब तो 
आ गया ना पास और अब हम मिल भी सकते है तो अब कॉल करने की कोई जरूरत नहीं तो फोन की भी....फिर तुम्हारे पापा भी नाराज  नहीं होंगे अब।। 
हा...ये तो है।। 

कुछ देर वही बैठ कर बातें करते रहे, 
फिर कुछ देर बाद विधि ने घड़ी मे देखा तो 5 बज चुके थे। 

चलो अब देर हो गयी घर जाना है मम्मी वेट कर रही होगी और बस भी फिर जल्दी नहीं मिलती। 

ओके बाय...विधि ने कहा ।।
और दोनों कॉलेज के बाहर निकल आए। 

विधि अपने बस स्टॉप की ओर चली गई और अंश, 
ओके... फिर कल मिलते हैं...कह कर  अंश भी अपनी बाईक लेकर चला गया।। 


घर आते ही विधि ने मम्मी से कहा... 
"मम्मी..!! जल्दी खाना लगाओ आज 
बड़ी जोरों की भूख लगी है" और पापा..?? 
पापा नहीं आये अब तक... !! 

नहीं..!! आते ही होंगे तु आज लेट कैसे ..?? रोज तो जल्दी आ जाती 
हैं।
विधि की माँ ने विधि से पूछा। 

हा ...!! आज वो क्लास  थोड़ी 
देर तक थी और दोस्तों के साथ 
बातों मे पता ही नहीं चला और
देर हो गयी.... 

अब और कितने सवाल करोगी आप...?? 
खाना लगाओ मम्मी...भूख से जान 
निकल रही है। 
मम्मी के पास आकर विधि ने प्यार से कहा।। 
अच्छा तु फ्रेश हो तब तक लगा देती हु। 

खाना लगाने तक विधि के पापा भी आ गये। 
Good evening पापा...!! 
विधि ने मुस्कुराते हुए पापा से कहा। 

Good evening बेटा....!! 

आज पापा के बिना ही शुरू हो गए। 
विधि के पापा ने कहा। 

नहीं आपकी ही राह देख रहे हैं। 
विधि ने कहा तो पापा ने मुस्कुराते हुए
कहा... 
ओके... 2 min.  अभी आया। 

फिर सब मिल कर खाने बैठ गए। 

और कैसी चल रही है पढ़ाई?? आज 
मेरा बेटा पापा से नाराज नहीं लग रहा 
है।। 

विधि के पापा ने जब से विधि का
मोबाईल छिना था तब से विधि 
थोड़ी नाराज थी पापा से...तो उतनी 
बात नहीं करती थी। 

मगर आज बात कुछ अलग थी 
उसे तो अब फोन की भी जरूरत 
नहीं थी जिसके साथ बात करनी 
थी वो तो अब उससे मिल कर बात कर सकती थी। 

तो हल्की सी स्माइल देते हुए विधि ने 
कहा.. 
"हा पापा अच्छी चल रही है"...।। 

खाने के बाद पापा और विधि टेलीविजन 
मे मूवी देख रहे थे...मम्मी अपने काम निपटा कर वो भी वही विधि के पापा 
के पास आकर बैठ गयी। 

कुछ देर बाद विधि दोनों को "good night" कह कर अपने रूम में चली गयी।। 

दूसरे दिन विधि जब कॉलेज पहुँची, 
विधि को देख सब फ्रेंड्सन ने मिल कर विधि को घेर लिया। 

विधि को कुछ समझ ही नहीं आ 
रहा था। 
तो वो गुस्से से बोली... 
"क्या है...?? तुम सब लोग ऐसे क्यों... 
वो बोल ही रही थी, 
तभी उधर से निशा आयी और
"वाह...!! क्या आईंटम पटाया है"।। 

What...?? क्या आयटम कौन...?? 

कुछ भी अनापशनाप बके जा रही है। 
विधि गुस्से मे बोली। 

ओके... आयटम नहीं तो माल 😂😂। 
और सब हसने लगे। 
पर विधि गुस्से से लाल हो रही थी 😠। 
तु चल... चल अंदर... 
विधि ने निशा का हाथ पकड़ उसे खीचते क्लास मे ले गयी। 

क्या पागल हो गयी है तु...??
कुछ भी बोले जा रही है वो भी सब के सामने। 
विधि ने निशा को डाटते हुए कहा। 

अरे.... कल जब वो आया तो सब के
सामने ही ना फिर क्या छुपाना। 

पर सच मे...!!! "है बहुत क्यूट ,🤗मेरा तो दिल आ गया उस पर"...हाय....!! 

निशा दिल पर हाथ रखते हुए बोली।।

निशा विधि को और चिढ़ाने लगी... वैसे कहा..?? मिलते है ये... 
क्यूट से आइटम... 
और जोर से हँसने लगी।। 

Oye...!!"अपना दिल अपने पास 
रख" और नजर मत लगा उसे, विधि ने शरमाते हुए कहा। 

और हा...!! वो सिर्फ देखने में क्यूट 
है बाकी तो पुरा गुंडा हैं। 
गुंडा...!! 
निशा ने चौकते हुए कहा। 

हा... गुंडा!! और तु दूर रहना उस से। 

पर तुझे कैसे पता तु तो कल ही मिली ना उसे..निशा ने पूछा। 

हा... पर बात तो दो महीनों से कर रही हु। 

वैसे तु तो अपनी पढ़ाई मे ध्यान देने
वाली और इतना सब कुछ हुआ कब 
और कैसे...??

अब तु इतना मत सोच जो होना है वो 
होता ही है... अब होनी को कौन टाल
सकता हैं।।
और दोनों ही हँसने लगी ।। 

तभी निशा के मोबाईल की रिंग बजी, 
ले...नाम लिया और तेरा हीरो हाजिर... 

मतलब,,विधि ने पूछा, 
मतलब तेरे हीरो का कॉल.... 
निशा हँसते हुए बोली। 

ले बात करनी है या मै पटा लू 😂
फिर से... 
दे इधर...
विधि ने निशा को धक्का दिया और फोन छिन लिया। 

फिर विधि ने कुछ कॉल पर बाते की और निशा का मोबाईल उसके हाथ मे
थमाते हुए.... 
ले.. अपना मोबाईल संभाल.. मै तो चली... 

बाय...!! वो कॉलेज के बाहर वेट कर 
रहा है।। 

अरे...पर, र्....लेक्चर् उसका क्या..?? 
वो तु कर लेना। 

विधि ने हाथ हिलाते हुए कहा और दौड़ते हुए बाहर चली गयी। 

गयी ये लड़की हाथ से...इसे भी लग ही गया वो रोग जिसका कोई इलाज नहीं।। 
खुद से ही बड़बड़ाते हुए निशा क्लास के अंदर चली गई।। 


विधि  दौड़ते हुए बाहर आ गयी। 
अंश वही गेट के पास अपनी बाईक लेकर खड़ा था। 
विधि : अरे.. तुम सुबह सुबह ही आ गये। रात को सोए भी या नहीं। 

अंश : वो बाद मे बताता हूँ तुम पहले बैठो गाड़ी पर। 

विधि : क्यों कहा जाना है और इतनी जल्दी में क्यों हो। 

अंश : तुम्हे भगा कर ले जा रहा हु, 
चलना है ना तो बैठो चुप चाप। 

विधि : अजीब जबरदस्ती हैं। 

अंश : ओके... ठीक है मत आओ। 

विधि : ओके... बाबा गुस्सा मत करो
चल रही हूँ। 

दोनों गाड़ी पर बैठ कर चल दिये। 

कुछ दूर जाने के बाद गाड़ी एक
ढाबे के पास रोक कर... 

अंश : भूख लगी है..? कुछ खाओगी..?? 

विधि : ओह्ह...!!
तो...यहाँ आना था खाना खाने इसीलिए शहर से इतना दूर लेकर आए। 

अंश : नहीं,, खाना हैं क्या तो बोलो
मुझे तो भूख लगी है। 

विधि : हा ...!! विधि थोड़ा नाराज लग रही थी। 

अंश : अब क्या हुआ?? क्यों ऐसा मुह बनाया है। 
विधि : कुछ नहीं। 
अंश : sorry..... 
आओ खाना खाते हैं। 

मुझे पता है तुम क्यों नाराज हो गयी मेरे बिहेवीयर् पे ना.. 

विधि ने बिना कुछ बोले हा में सर हिलाया। 
सॉर्री..!! अब तुम इतने सवाल 
करती हो तो क्या करू मुझ पर विश्वास है ना...?? 

विधि ने फिर से हा में सर हिलाया। 
तो चलो जहा मै ले चलु, और अब
कुछ बोलो यू सर मत हिलाओ। 
नहीं तो लोग समजेगे बेचारी लड़की को इस लड़के ने कितना डरा के रखा है।।


दोनों ढाबे के अंदर आकर बैठ गए और फिर अंश ने विधि को पूछ कर खाना ऑडर किया। 

कुछ देर में दोनों खाना खाकर वहा 
से निकल गए। 

विधि को कुछ समझ नहीं आ रहा 
था ये उसे कहा ले जा रहा है। कुछ पूछ 
भी नहीं सकती थी नहीं तो अंश फिर से गुस्सा हो जायेगा।। 

कुछ दूर आकर अंश ने गाड़ी रोक 
दी जहाँ कुछ पहाड़ी थी। 

विधि : ये कहा ले आये। 
अंश विधि का हाथ पकड़ कर उसे उपर पहाड़ी पर ले गया। 

जिसे देख विधि चौक गयी और मुह पर हाथ रखते हुए... 

विधि : omg...!! Wow..... 
"कितनी beautiful जगह हैं यह"...!! 

उस पहाड़ी से समंदर पुरा दिखायी दे रहा था और जुलाई का महिना था तो उपर आसमान मे बादल छाए थे। 

तो वहा से वह नजारा बड़ा प्यारा और
लुभावना दिख रहा था। विधि तो देख कर खुशी से उछलने लगी थी। 

विधि को खुश देख कर अंश ने कहा, 

मुझे पता था तुम्हे यह सब बहुत
पसन्द है इसीलिए यहाँ लेकर आया। 

"कभी आयी हो यहाँ..??
देखा है यहाँ से वो समन्दर ये सब कुछ"....?? 

विधि ने ना मे सर हिलाया और उछल 
कर अंश के गले लग गयी। 
विधि : थैंक यूं सो मच....!! 

सच में पहली बार आयी हु यहाँ। 
मुंबई मे रह कर भी यहाँ कभी नहीं 
आयी थी पर तुम कब आये और तुम्हे 
कैसे पता। 

अंश : मुझे सब पता है। 
बोलो कोनसी जगह जाना है और 
मै जिस शहर में रहता हूँ वहा तो 
सब कुछ घूम ही लेता हूँ। 
और यह जगह मुझे बहुत अच्छी लगती हैं मुंबई की शोर शराबे से दूर... 
कुछ वक़्त नेचर् के साथ...!! 

अब बारिश में यहाँ पहाड़ो से झरने
भी बहते हैं तब और अच्छा लगता है। 

फिर दोनों वही बैठ गए और बातें करने लगे। 
विधि बहुत खुश थी और अपनी बातों में खोयी थी अंश तो बस कब से उसे ही देखे जा रहा था। 

तभी विधि की नजर अंश पर पड़ी.. 
विधि : क्यों..!!क्या हुआ ऐसे क्यूँ 
देख रहे हो..?? बोर हो रहे हो मेरी बातों से...!! 

अंश : अरे... नहीं, मै तो सुन रहा हु 
तुम्हारी बाते, अच्छी लग रही हैं कहो
तुम क्या कह रही थी। 
अगर बोर होता तो चुप कराना भी आता 
है मुझे 😉ll

विधि : मतलब,, 

अंश : अरे, कुछ नहीं तुम कहो। 

विधि ने अंश की बातों को अनदेखा 
किया और फिर से अपनी बातों में लग
गयी। 

विधि और अंश दोनों अपनी बातों मे
खोये थे। 
तभी जोर से बिजली चमकी, लग 
रहा था जैसे जोरों की बारिश होंने वाली 
है। 

तभी विधि ने वहा से उठते हुए कहा.. 
अंश अब चलो लगता हैं बारिश आने 
वाली है..!! 

अंश ने विधि का हाथ पकड़ कर... 
अंश : रुको ना थोड़ी देर, इतनी जल्दी
नहीं आयेगी। 
यहाँ ये सब नॉर्मल है। 
हर मौसम मे यहाँ ऐसे ही बादलों का डेरा रहता है। 
बैठो थोड़ी देर फिर निकल जायेंगे। 

अंश की बात सुन विधि फिर से 
नीचे बैठ गयी। 
उसका भी मन नहीं हो रहा था 
वहा से जाने का। 

विधि : लो बैठ गयी पर थोड़ी ही देर
नहीं तो घर जाने मे देरी हो जायेगी। 

अंश : ओके... बस कुछ देर। 

विधि : अच्छा ये बताओ तुम्हारे 
घर में कौन कौन है..?? 
मेरे बारे मे तो सब जानते हो कुछ 
तुम भी बताओ। 

अंश : हा... क्यों नहीं पूछो जो पूछना
है। 
वैसे हम दोनों भाई बहन, मॉम डैड बस इतने ही। 




क्रमश:............