My different world in Hindi Motivational Stories by Vijay Erry books and stories PDF | मेरी अलग दुनिया

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मेरी अलग दुनिया

मेरी  अलग दुनियाएक प्रेरणादायक हिन्दी कहानीलेखक: विजय शर्मा Erry"तुम्हारी दुनिया सबसे अलग है!"यह बात गाँव के लोग अक्सर मानव से कहते थे। कोई मज़ाक उड़ाता, कोई पागल कहता, तो कोई सपनों का व्यापारी।लेकिन मानव केवल मुस्कुरा देता।वह जानता था कि हर महान बदलाव पहले किसी के मन में जन्म लेता है। जिस दुनिया को लोग कल्पना समझते हैं, वही किसी दिन हकीकत बन जाती है।पहला अध्याय – सपनों का कमरापंजाब के एक छोटे-से गाँव में रहने वाला मानव साधारण परिवार का लड़का था। उसके पिता किसान थे और माँ गृहिणी।घर में कोई अमीरी नहीं थी, लेकिन मानव का कमरा सबसे अमीर था।दीवारों पर उसने अपने हाथों से लिख रखा था—"जहाँ सोच खत्म होती है, वहीं मेरी दुनिया शुरू होती है।"एक दीवार पर भारत का नक्शा था।दूसरी पर महान लोगों की तस्वीरें।तीसरी पर उसके अपने सपनों की सूची—हर बच्चे को शिक्षा।हर गाँव में पुस्तकालय।हर घर में पेड़।भ्रष्टाचार मुक्त भारत।इंसानियत सबसे बड़ा धर्म।उसकी छोटी बहन मुस्कुराकर पूछती—"भैया, क्या सचमुच ऐसी दुनिया बन सकती है?"मानव हँसकर कहता—"अगर पहले मन में बन सकती है, तो धरती पर भी बन सकती है।"दूसरा अध्याय – लोगों की हँसीएक दिन गाँव की चौपाल पर चर्चा चल रही थी।एक व्यक्ति बोला—"मानव, तू हर समय किताबों और सपनों में खोया रहता है।"दूसरा हँस पड़ा—"लगता है अपनी अलग दुनिया में रहता है।"तीसरा बोला—"असल दुनिया देख। यहाँ ईमानदारी से कुछ नहीं मिलता।"मानव शांत स्वर में बोला—"मैं असली दुनिया देख रहा हूँ। लेकिन मैं उसे बदलने की कोशिश भी कर रहा हूँ।"लोग फिर हँस पड़े।उसे दुख तो हुआ, पर उसने अपने मन का दीपक बुझने नहीं दिया।तीसरा अध्याय – रहस्यमयी दरवाज़ाउस रात मानव देर तक लिखता रहा।थककर जैसे ही सोया, उसे लगा कि उसके कमरे की दीवार चमकने लगी है।धीरे-धीरे वहाँ एक सुनहरा दरवाज़ा बन गया।दरवाज़े के ऊपर लिखा था—"मेरी एक अलग दुनिया में आपका स्वागत है।"मानव ने काँपते हाथों से दरवाज़ा खोला।अंदर का दृश्य देखकर उसकी आँखें फैल गईं।पेड़ों पर रंग-बिरंगे पक्षी गा रहे थे।नदियाँ बिल्कुल साफ थीं।कोई भूखा नहीं था।हर चेहरे पर मुस्कान थी।चौथा अध्याय – सपनों का नगरएक बच्चा दौड़कर आया।"स्वागत है!"मानव ने पूछा—"तुम कौन हो?"बच्चा मुस्कुराया—"मैं तुम्हारे सपनों का पहला नागरिक हूँ।"थोड़ी दूर स्कूल था।वहाँ अमीर और गरीब सब साथ पढ़ रहे थे।एक शिक्षक ने कहा—"यहाँ अंकों से नहीं, अच्छे कर्मों से पहचान होती है।"आगे अस्पताल था।वहाँ इलाज बिल्कुल मुफ्त था।एक डॉक्टर बोला—"बीमारी से पहले इंसान का मन ठीक करना जरूरी है।"मानव भावुक हो गया।पाँचवाँ अध्याय – प्रेम का बाज़ारआगे एक सुंदर बाज़ार था।लेकिन वहाँ कोई पैसे नहीं ले रहा था।एक दुकानदार बोला—"यहाँ दया देकर सम्मान मिलता है।"दूसरा बोला—"यहाँ मुस्कान सबसे बड़ी मुद्रा है।"एक बच्ची ने मानव को फूल देते हुए कहा—"यहाँ कोई किसी से नफरत नहीं करता।"मानव की आँखें नम हो गईं।छठा अध्याय – समय का आईनाएक वृद्ध संत उसे एक विशाल आईने के पास ले गए।उन्होंने कहा—"इसमें अपना भविष्य देखो।"मानव ने देखा—वह मंच पर कविता सुना रहा था।लाखों लोग सुन रहे थे।उसकी कहानियाँ बच्चों को प्रेरित कर रही थीं।उसके लेख देश में बदलाव ला रहे थे।मानव ने आश्चर्य से पूछा—"क्या यह सच होगा?"संत मुस्कुराए—"अगर तुम अपने सपनों पर विश्वास रखोगे, तो अवश्य।"सातवाँ अध्याय – डर का राक्षसतभी आकाश काला हो गया।एक विशाल राक्षस प्रकट हुआ।उसका नाम था—"डर।"वह बोला—"लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँगे।""तुम असफल हो जाओगे।""तुम्हारे सपने कभी पूरे नहीं होंगे।"मानव कुछ पल काँपा।तभी उसे माँ की आवाज़ सुनाई दी—"बेटा, भगवान ने इंसान को डरने के लिए नहीं, आगे बढ़ने के लिए बनाया है।"मानव ने साहस जुटाकर कहा—"मैं हार नहीं मानूँगा।"इतना कहते ही डर का राक्षस धुएँ में बदल गया।आठवाँ अध्याय – लौटनाअचानक तेज़ प्रकाश फैला।मानव की आँख खुल गई।वह अपने कमरे में था।सुबह हो चुकी थी।क्या वह केवल सपना था?तभी उसकी मेज़ पर एक सफेद पंख पड़ा था।उसने मुस्कुराकर उसे अपनी डायरी में रख लिया।नौवाँ अध्याय – नई शुरुआतउस दिन से मानव ने शिकायत छोड़कर काम शुरू किया।उसने गाँव के बच्चों को मुफ्त पढ़ाना शुरू किया।हर रविवार पुस्तक पढ़ने की बैठक होने लगी।पेड़ लगाए गए।सफाई अभियान शुरू हुआ।धीरे-धीरे वही लोग, जो उसका मज़ाक उड़ाते थे, उसकी मदद करने लगे।दसवाँ अध्याय – बदलती दुनियाकुछ वर्षों बाद गाँव बदल चुका था।हर घर में पुस्तकें थीं।लोग मिलकर त्योहार मनाते थे।बच्चे मोबाइल से अधिक पुस्तकें पढ़ने लगे।एक पत्रकार ने पूछा—"मानव जी, आपने यह सब कैसे कर दिखाया?"मानव मुस्कुराया।"मैंने दुनिया बदलने की कोशिश नहीं की। पहले अपने मन की दुनिया बदली।"अंतिम संदेशरात को मानव फिर अपने कमरे में बैठा था।उसने दीवार पर एक नई पंक्ति लिखी—"हर इंसान के भीतर एक अलग दुनिया होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग उसे सपना समझकर भूल जाते हैं, और कुछ उसे सच बनाने के लिए पूरी ज़िंदगी लगा देते हैं।"खिड़की से आती हवा ने उसकी डायरी के पन्ने पलट दिए।वही सफेद पंख मुस्कुरा रहा था।मानव ने आकाश की ओर देखा और धीरे से कहा—"मेरी अलग दुनिया अब केवल मेरी नहीं रही। अब यह उन सबकी है जो प्रेम, सत्य, ज्ञान और इंसानियत में विश्वास रखते हैं।"और सच यही है—दुनिया बदलने वाले लोग पहले अपनी सोच की दुनिया बदलते हैं।समाप्त।