अगली सुबह अमन की मां उठ गई और कही जाने के लिए तैयार होने लगी वह अमन के कमरे की ओर गई और दरवाजा खोलकर अमन को जगाने लगी।
मां....अमन उठो बेटा आज हमें मंदिर जाना है।
अमन.....आज हमें मंदिर जाना है?
मां......हां उठो और जल्दी से तैयार हो जाओ
अमन जल्दी से तैयार हुआ और अपनी मां के साथ मंदिर की ओर चला गया वे दोनों आपस में बात करते हुए जा रहे थे।
मां......तो अमन तुम्हारे स्कूल का पहला दिन कैसा था?
अमन...... शुरू में तो में थोड़ा डरा हुआ था कुछ लड़कों ने मुझसे दोस्ती नहीं की और अपनी बेंच से भी हटने को कहा पर फिर एक लड़का जिसका नाम राम था उसने मुझे अपनी बेंच में बैठने को कहा और मेरी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया।
मां.....तो राम तुम्हारा पहला दोस्त है
अमन.....हां, पढ़ाई तो ठीक हो होती हैं पर वहां के बच्चे पढ़ाई पर उतना ध्यान नहीं देते उनका मन पढ़ाई को छोड़ किसी और चीज में ही लगा है।
कुछ कदम चलने के बाद वह मंदिर पहुंच गए काफी लोग वहां आए हुए थे अमन और उसकी मां भी पूजा में शामिल हुए पूजा खत्म होने के बाद मां ने कहा
मां.....बेटा यहां मंदिर में एक फूलों की दुकान है में जाकर वहा से फूल और सजावट का कुछ सामान लेकर आती हुं तब तक तू ये कुछ पैसे रख और बाहर किसी जरूरतमंद को दान कर दें और मेरे आने तक वही रहना।
अमन..... ठीक है मां
उसने मां से पैसे लिए और चला गया बाहर पहुंचते ही उसने देखा कि कई भिखारी उस मंदिर के गेट के बगल में बैठे हुए थे अब वह थोड़ा सोचने लगा कि इनमें से सबसे जरूरतमंद कौन है?
वह एक जवान आदमी की ओर बढ़ा पैसे देने के लिए तभी उसने एक बूढ़े व्यक्ति को देखा उसने सोचा इनमें संघर्ष करने की ताकत कम है इन्हें दे देता हूं वह बूढ़े व्यक्ति की ओर बढ़ा फिर उसने देखा एक बूढ़ी महिला जिनका एक पैर नहीं था तो उसने फिर अपने कदम रोके और बूढ़ी महिला की ओर बढ़ा अन्त में उसने देखा एक छोटी बच्ची को जो सड़क पर लोगो से पैसे मांग रही थी भूख की वजह से वह दुबली पतली हो गई थी और उसके चेहरे की चमक भी खो गई थी।
वह उस बच्ची के पास गया उसने बच्ची से उसका नाम पूछा,
अमन....तुम्हारा नाम क्या है?
सुमित्रा.....मेरा नाम सुमित्रा है
अमन.....अच्छा नाम है
सुमित्रा....भैया क्या आपके पास कुछ पैसे है? मुझे बहुत भूख लगी है
अमन.....हां मेरे पास कुछ पैसे है जो में तुम्हारे लिए लाया हूँ
उसने वह पैसे सुमित्रा को दे दिए बच्ची ने उसे शुक्रिया कहा और चली गई वही एक भिखारी उसे देख रहा था उसने उसे बुलाया
अमन....माफ करना बाबा पर मेरे पास अब पैसे नहीं है जो भी थे मैने उस बच्ची को दे दिए
भिखारी.....(हंसते हुए)मैने तुमसे पैसे मांगने के लिए नहीं बुलाया। क्या तुम इस शहर में नए हो
अमन.....हां पर आपको कैसे पता?
भिखारी......पहले कभी तुम्हे देखा नहीं इसलिए पूछा।
अमन उनके पास बैठ गया और मंदिर में जाते लोगो और बाहर के भिखारियों को देख उसके मन में एक विचार आया।
अमन.....आपने एक चीज देखी अंदर मंदिर में पुजारी के दान पेटी में नोट डाले जा रहे हैं लोग बेझिझक पैसे दे रहे हैं पर बाहर बैठे भिखारी को देते समय वही भाव उनके चेहरे पर नहीं होता।
भिखारी.....वो इसलिए क्योंकि उन लोगों को ऐसा लगता है कि भगवान उन्हें कुछ दे सकता है पर एक भिखारी उन्हें क्या ही दे सकेगा इसलिए भगवान के नाम पर मांगने वाला भिखारी भी सिर्फ चिल्लर ही पता है
अमन....आपने सही कहा।
भिखारी.....लोग सोचते हैं पूजा करने से मंदिर आने से और नाम जपने से भगवान उनकी सुनेगा अगर ऐसा होता तो मंदिर का भिखारी अमीर होता क्योंकि वह तुमसे ज्यादा समय उसका नाम लेता है मंदिर के बाहर बैठा होता है अमीर बनना तो छोड़ो उन्हें एक दिन पेट भर खाना भी नहीं मिलता
अमन......बात तो मुझे सही लगी जो भगवान हमे मोह माया से दूर रहना सिखाता है वो खुद उन चीजों की मांग तो नहीं करेगा मुझे लगता है लोगो की सोचने समझने की शक्ति कम हो गई है।
तभी उसकी मां वहां आई
मां.....मैने सारा सामान खरीद लिया है चल अब घर की ओर चलते है
अमन.....हां मां चलो।
घर पहुंचते ही उसे पता चला आज स्कूल की छुट्टी है तो उसने सोचा चलो आज बाहर ही घूम लेता हूं वह अपनी साइकल मे घूमने चला गया
रास्ते में उसे उसका दोस्त राम मिला
राम.....अमन तुम कहा जा रहे हो?
अमन......कुछ नहीं बस आज स्कूल बंद था तो मैने सोचा शहर ही घूम लेता हूं,, वैसे तुम कहा जा रहे हो?
राम.....मैने दुकान से कुछ किताबें ली है पढ़ने के लिए और में अभी घर जा रहा हूं लगता है तुम अकेले बोर हो रहे हो चाहो तो मेरे घर चल सकते हो
अमन.....हां जरूर में चलूंगा
राम उसे अपने घर ले गया और अपने भाई और मम्मी से मिलाया
राम......मम्मी ये अमन मेरा दोस्त है यह मेरी कक्षा में मेरे साथ पढाता है
अमन......नमस्ते आंटी
मम्मी........(मुस्कुराते हुए)बड़ा ही सीधा साधा और संस्कारी लगता है जाओ खेलो
राम.....ये मेरा छोटा भाई है राज
अमन.....ओह रामराज
इस बात पर वह हंसने लगे
उन्होंने पढ़ाई की और फिर खेल रहे थे दोस्तो के साथ समय का पता ही नहीं चला और रात हो गई
अमन.....राम रात हो गई है अब मुझे घर जाना चाहिए।
राम......रात हो गई है आज यही रुक जाओ
मम्मी.....हां बेटा आज यही रुक जाओ
अमन...... शुक्रिया पर वो क्या है कि घर में मां को पता नहीं है कि में यहां रुका हुं घर में वो परेशान हो रहे होंगे आप लोग चिंता मत कीजिए में घर चला जाऊंगा।
अमन घर के लिए निकला
आंटी....सम्भल कर जाना बेटा
राम......बाय अमन
अमन....बाय
अमन जल्दी पेडल करते हुए घर की ओर बढ़ रहा था रास्ते में उसने कुछ लड़कों को शराब पीते हुए देखा
ठीक उससे थोड़ी दूर एक लड़की अकेली खड़ी थी उसने साइकल रोकी और उसने सोचा शायद उसे कुछ मदद चाहिए वह उसके पास गया लड़की थोड़ी डरने लगी
अमन.....मुझसे डरो मत में तो तुम्हारी मदद करने की इच्छा से आया हूं
दिव्या......(डरते हुए)नहीं मुझे मदद की जरूरत नहीं है तुम जाओ
अमन.....मुझसे डरो मत देखो रात बहुत हो गई है इसलिए मुझे तुम्हारी चिंता हो रही है कही तुम्हारे साथ कुछ गलत न हो जाए
दिव्या......पर में तुम्हारा विश्वास क्यों करू?
अमन.....देखो वहां से कुछ लड़के आ रहे हैं मुझे इतना तो समझ आ गया है कि तुम घर जाने के लिए रिक्शे का इंतजार कर रही हो पता नहीं कितना समय लग जाए चाहो तो में तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ सकता हूं
उसने आते हुए लड़कों को देखा उसे डर लगा और वह लड़की अमन के साथ जाने के लिए तैयार हो गई
अमन.....आओ बैठो
लेकिन उसे अभी भी अमन पर पूरा विश्वास नहीं हो रहा था वह घबराई हुई थी अमन समझ गया वह थोड़ी दूर गया और एक बड़ा पत्थर लाकर उस लड़की के हाथ में दे दिया और कहा
अमन......ये लो इस पत्थर को पकड़ो और जब भी तुम्हे ऐसा लगे तुम्हे मुझसे खतरा है ये पत्थर मेरे सिर पर जोर से मार देना ठीक है
वह उसकी साइकल मे बैठी ओर उसके साथ चली गई
अमन.....(मुस्कुराते हुए)देखो मुझे सही रास्ता बताते जाना क्योंकि मैने गलत रास्ता लिया तो तुम तो मेरा सिर फोड़ दोगी वैसे मेरा नाम अमन है तुम्हारा नाम क्या है?
दिव्या चुप रही
अमन......नहीं बताना है कोई बात नहीं
दिव्या...... दिव्या मेरा नाम दिव्या है यहां से राइट ले लो
अमन......हां तो दिव्या इतनी रात को तुम वहां क्यूं थी वो भी अकेली
दिव्या......में ट्यूशन गई थी पर आज वहां काफी देर हो गई यहां से एक और राइट लो
अमन.....मुझे भी आज मेरे दोस्त के साथ टाइम का पता ही नहीं चला हम खेलने में ही लगे हुए थे
दिव्या..... यहां से लेफ्ट ले लो
दिव्या ने वह पत्थर फेंक दिया अमन ने यह देख उससे पूछा
अमन.....क्या हुआ दिव्या? तुमने पत्थर क्यों फेक दिया क्या तुम्हे अब मुझपर विश्वास है?
दिव्या......रोको रोको मेरा घर आ गया
अमन........चलो आखिर तुम्हारा घर मिल ही गया
दिव्या साइकल से उतरी और गेट खोला और अंदर चली गई अमन जा ही रहा था कि दिव्या बाहर आई और कहा
दिव्या......मेरी मदद करने के लिए शुक्रिया
अमन खुश हुआ और घर चला गया घर पहुंचने पर उसकी मां ने कहा इतनी रात को कहा घूम रहे थे उसने मां को सारी बात बताई उसकी मां खुश हुई और अमन से कहा
मां....तुमने ठीक किया बेटा अब चलो हाथ पाओ धो लो और खाना खाने आ जाओ तुम्हारे पापा और में कबसे तुम्हारा इंतजार कर रहे थे रात को सोते समय अमन सोच रहा था आज दिन काफी अच्छा गया।