Modern Sadhu - 2 in Hindi Spiritual Stories by nirala ji books and stories PDF | मॉडर्न साधु - 2

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मॉडर्न साधु - 2

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते थे दूसरों के अच्छे पलो में उनके साथ हंसते और दुख में उनकी हिम्मत बन जाते। सब कुछ अच्छा चल रहा था फिर जब अमन पंद्रह साल का हुआ तब उसके पापा का तबादला किसी दूसरे शहर में हो गया वह इस बात से काफी दुखी था वह अपने दोस्तों और लोगों से दूर नहीं जाना चाहता था उसने अपने पापा से कहा.....क्या हमें जाना ही होगा? मोहन ने धीमी आवाज में कहा .. हां हमें जाना होगा अमन इस बात को सुनते ही दौड़ते हुए अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया उसकी मां दरवाजा खट-खटखटाने लगी और बोली..दरवाजा खोलो अमन क्या हुआ तुमने दरवाजा अंदर से बंद क्यों कर दिया ,अमन चुप रहा ,जवाब न देने पर उसने मोहन को बुलाया मोहन ने उसे बाहर आने के लिए कहा लेकिन वह फिर भी चुप था वह जनता था कि उसका बेटा नहीं जाना चाहता है उसने उसे समझाने की कोशिश की और कहा...देखो बेटा मुझे पता है तुम इस बात से दुखी हो में जनता हुं यह जगह अच्छी है पर हमें नई चीजों को भी अपनाना चाहिए तुम्हे ऐसे डरना नहीं चाहिए अगर हम पीछे ही देखते रहेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे मिलना - बिछड़ना ये दुनिया की सच्चाई है इस सच से बैर मत रखो खुदको बदलो ऐसे आंसू मत बहाओं अपने आने वाले कल को खुशी - खुशी अपनाओ अमन उठा और दरवाजा खोला आंसू पोंछे और कहा आपको परेशानी हुई उसके लिए में माफी चाहता हूं पापा मोहन ने उसे गले लगाया और कहा कोई बात नहीं।

अगले दिन मोहन और उसका परिवार जाने की तैयारी करने लगे थोड़ी देर बाद उन्हें लेने के लिए गाड़ी आ गई सारे लोगों ने उन्हें उनके आने वाले कल के लिए शुभकामनाएं दी अमन ने अपने दोस्तों को अलविदा कहा और अपने माता पिता के साथ गाड़ी में बैठ गया। और वह दूसरे शहर की ओर चले गए 

नए शहर पहुंचने के बाद वह अपने घर में गए और घर को देखा उन्हें घर बहुत पसंद आया फिर अमन के पापा उसका स्कूल में दाखिला कराने चले गए वह स्कूल बहुत बड़ा था और बहुत से बच्चे वहां पढ़ने आते थे दूसरे दिन सुबह अमन स्कूल जाने के लिए तैयार हुआ उसके मन में नई चीजों के लिए उत्साह था वह अपनी साइकल में बैठा ,जो उसके पापा ने दिलाई थी, और स्कूल की ओर चला गया वह अपनी कक्षा में जाकर बैठ गया सारे बच्चे उसे ही देख रहे थे एक लड़के ने उससे कहा ,ये मेरी बेंच हे तू आगे जाकर बैठ अमन आगे जाकर बैठ गया फिर दूसरे लड़के ने कहा...आगे जाकर बैठ वही एक लड़का जिसका नाम राम था उसने कहा.. यहां मेरे साथ कोई नहीं बैठता चाहो तो बैठ सकते हो। वह राम के साथ बैठ गया और पढ़ाई शुरू हो गई खाली समय में उसने देखा कि पढ़ने से ज्यादा लड़के लड़कियां एक साथ शादी की बात करने में लगे हैं वह एक दूसरे को दोस्त नहीं गर्लफ्रेंड और ब्वॉयफ्रेंड कहते हैं अमन को यह देख अजीब सा लगा उसने राम से पूछा...क्या इस स्कूल में ऐसा ही होता है राम ने कहा...हां। फिर घंटी बजी और स्कूल की छुट्टी हो गई अमन और राम ने एक दूसरे को बाय कहा और घर की ओर चले गए रास्ते में उसने देखा कि बाजार में कुछ लोग एक आदमी को मार रहे थे उसने लोगो से कहा हमे उसकी मदद करनी चाहिए पर लोग पीछे हटने लगे और अपने काम में ऐसे खोए थे मानो कुछ बुरा हो ही नहीं रहा है अमन को उसपर दया आ रही थी वह उसे बचाने के लिए कुछ सोच रहा था फिर उसे एक तरकीब सूझी उसने जोर से चिल्लाकर कहा भागो पुलिस आ रही है वह डर गए और उस आदमी के पैसे छीन कर गाड़ी में बैठे और भाग गए अमन ने उसे उठाया और पूछा आप ठीक है उसने जवाब दिया हा में ठीक हूं और उसे धन्यवाद कहा अमन ने पूछा..वह आपको क्यों मार रहे थे। उसने कहा वो लोग मेरे पैसे चुराने आए थे जब मैने उन्हें चोरी करते हुए पकड़ लिया तो उन्होंने मुझे ही चोर बोलकर मारने लग गए अमन ने कहा....आप अस्पताल जाकर अपना इलाज करा लीजिएगा। आदमी ने उसे एक बार और धन्यवाद कहा और चला गया घर आने के बाद अमन गार्डन में खेलने के लिए गया वह नए दोस्त बनाना चाहता था पर गार्डन में कोई नहीं था सब अपने घरों में बैठे फोन चला रहे थे। निराश होकर अमन घर आ गया रात हो गई बाहर हल्की ठंडी हवाएं चल रही थी चारो तरफ चांद की रोशनी फैली हुई थी वह छत पर चला गया और लंबी सांस ली और सोचने लगा...जैसा मैने सोचा था लोग तो काफी अलग निकले वह मन में खुद से ही बाते करने लगा कि लोग शिक्षा को महत्व नहीं दे रहे हैं,दया खत्म होने लगी है उसकी जगह लोगों के दिल में डर ने जगह बना ली है, इंसानों की जगह अब मोबाइल परम मित्र है, वह यह सब सोच ही रहा था फिर उसकी मां ने उससे कहा...खाने का टाइम हो गया है नीचे आजा उसने जवाब दिया हां आया।