Mafia's Obsessed Love - 21 in Hindi Love Stories by Priyanka Saini books and stories PDF | Mafia's Obsessed Love - 21

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Mafia's Obsessed Love - 21

वह गार्ड उस आदमी को वो कांच की बोतल पकड़बाते हुए बोला... "ये साला तो मुंह ही नहीं खोल रहा.."

उसकी बात सुन किंग की तरह बैठा वह शख्स.. एक एविल स्माइल से मुस्कुराता है ..

जो कोई और नहीं.. वेदांश राठौर था। और उसी के साथ थे अनव , और अकाश...  उसके पास वाले काउच पर बैठे थे।वह काउच देखने में ही एक लग्जरी ब्रांड के लग रहे थे। सामने एक कांच की टेबल रखी थी.. जिस पर कुछ महंगे मगर खतरनाक हथियार थे ।

अकाश उस आदमी को देखकर एक तिरछी मुस्कुराहट देता है.. जिसमे सिर्फ एक डेविल नजर आ रहा था.. वह उसे देख पास खड़े उसी गार्ड से बोला ... " ये क्या अब इसका बाप भी बोलेगा.. ? " 

सामने चेयर से बंधा वह आदमी उसे अब थोड़ी घबराहट होने लगी थी। उसने अपनी उस घबराहट को बमुश्किल छुपाते हुए कहा... 

" कौन है आप ? Plz जो कोई भी हो मुझे जाने दो.. मैने आपका क्या बिगाड़ा है.. मैं तो केवल एक मामूली सा कॉलेज स्टूडेंट हूं.. ? " 

वह उनसे रिक्वेस्ट भरी टोन में बोला.. उसकी बात सुन अब सामने बैठे तीन राक्षस हां राक्षस ही नजर आ रहे थे। जान निकालने के लिए तो इनकी वो तिरछी मुस्कान ही काफी थी .. जो प्यारी तो बिल्कुल नहीं मगर किसी के खून की जरूर प्यासी नजर आती थी ।

आकाश बहुत ही सीरियस टन में उससे पूछता है..  "तू  शायना राठौर को कैसे जानता है..?"  

वह लड़का शायना नाम सुनते ही घबराने लगता है .. वो डरते हुए बोला...  " में उसे नहीं जानता... लेकिन मेरा दोस्त जानता है .. वो उसकी गर्लफ्रेंड .."   वह अपनी बात भी पूरी नहीं कर पाता उससे पहले कुछ टूटने की आवाज आती है 

सब उस तरफ देखते है जहां अनव .. जिसके राइट हैंड में ड्रिंक का ग्लास था..  जिसे वह केवल अपने होंठों तक ही लेकर गया था.. मगर एक शिप भी उसने उसकी नहीं ली थी .. अब वह ड्रिंक उस कांच की मेज पर बुरी तरह बिखरी पड़ी थी साथ ही कुछ खून भी उसमें मिला था ।

वह खून अनव के हाथ से टपक रहा था। अनव जो बहुत देर से शांत बैठा था। एक सिगरेट को अपने होठों के बीच दबाकर लाइटर से उसे जलता है फिर एक कश भरकर मुंह और नाक से धुआं छोड़ते हुए..  वेदांश के हाथ से तेजाब से भरी उस बोतल को अपने हाथ में लेकर उस आदमी की तरफ बढ़ता है ।

उसको कदमों की आहट में आज एक अलग ही खौफ था। जिसे सामने चेयर से बंधा वह शख्स साफ साफ महसूस कर पा रहा था। वह डर से कांपने लगता है ।

अनव उसके पास आकर खड़ा होता है कुछ पल उसे देखकर उसके एक हाथ पर तेजाब की आधी बोतल गिरा देता है । उस दर्द को एहसास कर वह लड़का पागल की तरह चिल्लाने लगता है। उसकी आंखों से बेहिसाब आंसु बाहर आ रहे थे। उसकी वो हाथ कोहनी तक पिघल कर खत्म हो चुका था। 

अनव अब सिगरेट को अपने पैरों से मसलकर उसका चेहरा दो उंगलियों से उठा अपनी शर्द आवाज में बोला.. 

"किसकी गर्लफ्रेंड है वो.." वह लड़का डरते हुए अटक अटक कर बोलता है..  "किस.. किसी  की भी नहीं.. मुझे बस उसे किडनैप कर उसे हमारे कालेज की तीसरे फ्लौर पर रूम नंबर . 302 में पहुंचाने के लिए कहा गया था" 

"और  ये किसने कहा था " .. पीछे से आकाश सीरियस एक्सप्रेशन लिए उससे पूछता है।

"र.. रवि पवार .. " वो MLA भैरव पवार और हमारे कॉलेज के ट्रस्टी का बेटा है ।

अचानक एक गन शॉट होता है और वह शख्स चेयर पर पीछे की तरफ लुढ़क जाता है क्योंकि उस बुलेट का सटीक निशाना उसका वह दिल था जो अब खून से लथपथ हो चुका था। क्योंकि ये शॉट मारने वाला ओर कोई नहीं बल्कि वेदांश था। 

उस लड़के मारने के साथ ही अनव की आंखे कुछ नॉर्मल होती है मगर हाथों की मुट्ठियां बुरी तरह कस चुकी थी। और ये तब से बुरी तरह भींची थी..  जब उसने रवि पवार सुन था.. बस ये एक नाम उसके कानों में बुरी तरह चुभ रहा था।

उसकी आंखों के सामने वो दिन आ जाता है.. जब वह शायना के कॉलेज गया था किसी काम से.. क्योंकि वो भी उस कॉलेज का इन्वेस्टर था। 

उस दिन जब वह कॉलेज से लौट रहा था अचानक एक लड़की सामने से भागते हुए आती है जिसने डेनिम जींस के साथ पाउडर ब्लू कलर में ब्रांडेड शर्ट पहनी थी। वह जाकर सीधा उससे टकरा जाती है क्योंकि वो पीछे देखते हुए भाग रही थी। आज बॉक्सिंग का मैच था। 

इसलिए सब उधर बिजी थे पूरा कॉलेज खाली पड़ा था ये एक बड़ा मुकाबला था जिसमें मिहिर लड़ रहा था।

वह गिरती उससे पहले ही अनव उसे संभाल लेता है वह लड़की डरते हुए अपना चेहरा ऊपर उठाकर देखती है तो सामने अनव था। 

जब अनव उसे अपने सामने देखता है वो भी इस हालत में तो शॉक्ड हो जाता है। शनाया के बाल बिखरे पड़े थे, आंखे आंसुओं से भीगी और गाल पर थप्पड़ के निशान बने थे।

अनव उसके गाल पर हाथ रखकर उससे पूछता है..  " क्या हुआ है शाय..  और ये क्या हाल बना रखा है तुमने" 

हालांकि उसकी आंखे गुस्से से चमक रही थी। उसकी आंखों में वो पागलपन था .. जैसे उस हाथ को काट फेंके जिसने शनाया के गाल पर ये थप्पड़ का निशान बनाया था 

शनाया उसकी शर्ट को पकड़ एक हाथ से अपने पेट पर हाथ रखते हुए बोली .. "plz मुझे बहुत दर्द हो रहा है .. पीरियड्स की वजह से यहां से चलो.."

कुछ पल को माहौल थोड़ा ऑकवर्ड जरूर होता है ..भले ही शनाया हिचकिचा रही थी। वह अपनी नज़रे जमीन पर टिकाए खड़ी थी। लेकिन उसे ये कहना ही पड़ा .. एक तो वो भागती हुई आई थी। जिससे उसके पेट का दर्द और बढ़ गया था ।

अनव भी सिचुएशन को समझते हुए अपना कोट उसकी कमर पर बांध कर उसे गोदी में उठाकर कार के पास ले आता है शनाया भी कुछ नहीं कहती... दर्द का याद कर..

मगर वो गाड़ी में बैठने से पहले एक नजर पलट कर उस लड़के को जरूर देखता है जो अनव को देखकर भाग गया  
बाकी जितने लड़के थे उन्हें सभी को उसके गार्ड ने ठिकाने लगा दिया था।

उस दिन घर आने पर मिहिर, अजीत और जीवन तीनों पर बहुत डांट लगी थी। उन तीनों को भी गिल्ट हुआ कैसे वो अपनी बहन को अकेल छोड़ सकते थे।

उस दिन के बाद वेदांश ने कॉलेज में सिक्यूरिटी और बड़ा दी थी। उस दिन को याद कर... अनव उस लड़के को देखता है उसने आज उस हाथ को ही खत्म कर दिया था। जिससे अनव की आंखों में एक सेटिस्फेक्शन दिख रहा था।

वहीं वेदांश गौर से अनव को देख रहा था। वह शुरू से लेकर अब तक उसके बदलते हाव भाव को अच्छे से नोटिस कर रहा था।


कहीं दूर..

एक महंगी एक्सपेंसिव कार रोड पर नॉर्मल स्पीड पर चल रही थी। मौसम बहुत सुहावना था। ठंडी ठंडी हवा उसकी खुली खिड़कियों से कार के अंदर आ रही थी। चारों तरफ हरियाली, साथ ही असमान में बदल छाए हुए थे। जो कभी धूप निकलने के तो कभी न निकलने के गवाह बने हुए थे। और वजह भी.. 

कार के अंदर करीब चार लोग बैठे थे.. और इसी कार में गाना चल रहा था .. 

दिल पे ज़ख्म खाते है... जान से गुजरते है..  दिल पे ज़ख्म खाते है ..जान से गुजरते है (2)

जुर्म सिर्फ इतना है...जुर्म सिर्फ इतना है.. उनको प्या..

कांटीन्यू..  

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