इधर अक्षिता वेदांश के वहां से जाते ही सीधा श्री के पास आती है.. श्री जिसका ध्यान अभी भी सीढ़ियों की तरफ ही था... भले ही वेदांश जा चुका था...,मगर उसने अपनी नजर नहीं बचाई थी... और श्री का ये एक नजर उस तरफ देखना भी अक्षिता के कलेजे में आग जलाने का काम कर रहा था।
वह श्री की बाजू पकड़ कर अपनी तरफ घूमती है। श्री जिसका ध्यान ही नहीं था। वह चौंक कर अक्षिता को देखती है।
अक्षिता उसे देखकर गुस्से से बोली ... "क्या देख रही थी तुम उस तरफ हम्ममम..? बोलो .. क्या देख रही थी तुम."
श्री ने उसे असमंजस से देखते हुए कहा ..." क्या कह रही आप मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा .. "
श्री की बात सुनकर अक्षिता अपने दांत पिसते हुए चीखकर बोली.. क्या कह रही हु.. मैं तुम्हे कुछ समझ नहीं आ रहा... लाइक सीरियसली... इतनी भोली हो तुम ये मासूमियत का नकाब ओढ़ कर किसे दिखा रही हो..
हम्म.. हां मुझे.. अच्छे से जानती हूं.. मैं तुम जैसी दो कौड़ी की लड़की को औकात नहीं है तुम्हारी अभी मुझसे बात करने की भी.. वह जैसे जैसे वह बोल रही थी।
वैसे वैसे श्री के एक्सप्रेशन बदल रहे थे वहां लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही थी और सभी श्री को अजीब नजरों से देख रहे थे । इसी के साथ अक्षिता की पकड़ श्री की उसी बाजू पर कस्ती जा रही थी जिसे पहले भी वेदांश ने अपने गुस्से के चलते पकड़ा था।
उसने अपने गुस्से को वैसे ही बरकरार रखते हुए आगे कहा... दूर रहो वेदांश से... उससे मेरी इंगेजमेंट होने वाली है और मुझे बिल्कुल नहीं पसंद तुम जैसी घटिया लड़की वेदांश के आगे पीछे घूमे...।
औकात तुम्हारी जमीन पर भी रहने की नहीं है और सपने आसमान में उड़ने के देख रही हो,
श्री ने जब ये सुन कि उसकी इंगेजमेंट वेदांश से होने जा रही है.. वह एक पल को हैरान होकर देखने लगी.. पता नहीं क्यों ये सुनने के बाद उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मगर उसने अक्षिता के सामने ये बिल्कुल भी जाहिर नहीं होने दिया।
इतनी भीड़ की देखकर राठौर फैमिली भी वहां आ जाती है दरअसल पूजा खत्म होने के बाद सभी महापंडित जी से कुछ बात करने में लग गए थे। जिसके चलते किसी ने भी उस तरफ ध्यान ही नहीं दिया... खुद अक्षिता के पैरेंट्स ने भी नहीं...
वहीं कनु किसी से फोन पर जरूरी बात करने चली गई मगर जब वो यहां आई और ये देखने बाद की अक्षिता कैसे श्री पर चिल्ला रही है। उसका पारा हाई हो गया।
श्री को खुद पर लोगो की ऐसी नजर बर्दाश्त नहीं हो रही थी। ये ही तो देखने का नजरिया होता है... अभी वो वेदांश के साथ पूजा में क्या बैठी लोग उससे मिलने के.. बात करने के.. बहाने ढूंढ रहे थे। उसकी तारीफों के पुल बांध रहे थे।
वाह.. क्या संस्कार है मगर ये जानने के बाद की अक्षिता की एंगेजमेंट वेदांश से होने वाली है.. अब उन्हीं लोगो का देखने का नजरिया ही बदल गया... अब वही लड़की उनकी नजर में वाहियात हो गई। खैर ये रियलिटी है.. सच का एक आईना.. जो लोग सामने कुछ ओर, पीठ पीछे कुछ ओर होते है।
अक्षिता श्री को आगे कुछ बोल पाती उससे पहले ही.. कनु ने आगे बढ़कर श्री की बाजू उसकी पकड़ से आजाद कराकर अक्षिता पीछे की तरफ धकेलते हुए.. वह भड़कते उस पर चिल्लाती हुई बोली...
"क्या कहा तुमने उसकी औकात नहीं है... तुम्हारी कितनी औकात है अपने बाप की औकात पर ही तो उड़ रही हो..
और तुम्हारी जानकारी के लिए बता दे.. श्री खुद चलकर तो Mr वेदांश के पास नहीं गई थी.. अपने इस बेकार से भेजे पर जरा जोर डाल कर याद करो.. खुद Mr वेदांश ने ही.. इसे जबरदस्ती अपने पास पूजा में बैठाया था..मिस ओवर मेकअप की दुकान.."
ये बात उसने श्री को एक निगाह देख अपनी तर्जनी उंगली से अक्षिता की तरफ प्वाइंट करते हुए कही..
" अपने लिए मिस ओवर मेकअप की दुकान सुन अक्षिता को बहुत गुस्सा आया वह अपनी भड़कीली लाल आंखों से उसे देखते हुए अभी कुछ कहती उससे पहले ही..
कनु ने आगे कहा.. " और हां.. क्या कहा था तुमने तुम्हारी इंगेजमेंट होने वाली है Mr राठौर से.. अभी हुई तो नहीं है न.. तो इतनी अकड़ किस बात की दिखा रही हो..? "
ये बात अक्षिता के एगो को हर्ट कर गई.. उसका कहने का क्या मतलब है.. क्या वेदांश के साथ उसकी इंगेजमेंट हो ये जरूरी तो नहीं .. बस एक ये खयाल उसके गुस्से को भड़काने का काम कर गया.. वह श्री की तरफ देखकर गुस्से से बोली..
"तुम कहना क्या चाहती हो.. ये बच.. " वह आगे कुछ भी कह पाती उससे पहले एक तेज आवाज वहां खड़े सभी के कानो में गूंजी..
" बस बहुत हुआ तुम्हारा.. अक्षिता " सभी उस तरफ देखते है जहां गुस्से में सिखा जी खड़ी थी। अक्षिता उन्हें देखकर मासूम बनते हुए.. आवाज में दुनिया जहां की नरमी लाकर बोली .." देखिए न आंटी.. ये लड़की,"
वह आगे कुछ कहती.. मगर सिखा जी ने उसकी बात बीच में काटकर कहा..." तुम्हारा कुछ ज्यादा ही नहीं हो रहा अक्षिता.. "सिखा जी को लोगो के ये डबल फेस बिल्कुल पसंद नहीं थे.. वह लोगो को सिर्फ उनके असल नेचर में ही पसंद करती थी। फ़िर चाहे इंसान वो ही क्यों न हो जो मुंह पर ही बेइज्जती करते हो....।
अक्षिता उनकी बात सुनकर अपनी मुट्ठी कसकर भींच लेती है वह आगे कुछ नहीं कहती .. उसकी मोम ने उसका हाथ पकड़कर शांत रहने का इशारा कर दिया था।
वैसे भी वह कुछ नहीं बोल पाती क्योंकि सिखा जी के गुस्से के आगे तो.. वेदांश के अलावा कोई और नहीं बोल पाता था। वह अपने सभी बच्चों से बहुत प्यार करती थी।
और सभी उनकी बहुत रेस्पेक्ट भी करते थे।
विधि जी आगे बढ़कर प्यार से श्री का हाथ पकड़कर बोली.. "आप ठीक है" श्री उन्हें देखती है इस वक़्त उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। उसे विधि जी का ये गेस्चर काफी पसंद आया वरना कहां कोई.. अपनी होने वाली बहु के आगे.. किसी दूसरी लड़की को स्पोर्ट करता है।
श्री उन्हें देखकर हां में सिर हिलाती है। कनु श्री का दूसरा हाथ पकड़कर कहती है .."हमे लेट हो रहा है चले... "
श्री भी अपना सिर हिला देती है वह दोनों मंदिर से बाहर आ जाते है।
मंदिर के अंदर सिखा जी एक नजर अक्षिता को देखती है और वो दूसरी तरफ जाने लगती है। पीछे खड़े महापंडित जी ये देखकर बस मुस्करा देते है।
गुस्से से अक्षिता भी पैर पटककर आ जाती है । अब सभी धीरे धीरे कर मंदिर से जाने लगते है। वहीं एक तरफ खड़े मिहिर,जीवन, अजीत और शायना गुस्से से जाती हुई अक्षिता को देखते है...
उन्हें अक्षिता का इतना घमंड बिलकुल पसंद नहीं आया था। मिहिर उसे देखकर कहता बिल्कुल सही कहा था उस लड़की ने... "ओवर मेकअप की दुकान.." जीवन उसे देखकर बोलता है ..."कौन सी लड़की ने.."
"अरे वही जो भाभी के लिए सावंत की वाहियात औलाद अकड़ उतार रही थी.."
"अच्छा वो.." शायना ने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान न देते हुए कहा.. मगर फिर रुककर उसे देखनी लगती है..
"कौन भाभी .." वो हैरानी से अजीत से बोली.. सेम रिएक्शन से मिहिर और जीवन भी उसे देखने लगते है।
जीवन उसे देखकर बोला ..." क्या मतलब तू भी उन्हें अपनी भाभी के रूप में देखने लगा .. अच्छी है न वो.."
" बिल्कुल हमारे सपनों जैसी..."
अजीत उन तीनों को देखकर कहता है .." हम्म.. काश! वो ही हमारी भाभी होती .."
तीनों इस चीज को इमेज करते है.. की श्री उनकी भाभी है " मिहिर एक गहरी सांस लेकर कहता है.. "खाली पुलाव पकाने का कोई फायदा नहीं है "
और वह मंदिर के बाहर चला जाता है। उसके पीछे पीछे वो तीनों भी चले जाते है।
इधर मंदिर की सीढ़ियों के बीचों बीच कनु बड़बड़ाते हुए आगे चल रही थी। उससे थोड़ी सी पीछे श्री भी आ रही थी। कनु का ध्यान आगे की तरफ बिल्कुल नहीं था।
कनु अभी चल ही रही थी कि किसी से टकरा जाती है वह शख्स सीढ़ियां चढ़ते हुए..ऊपर आ रहा था। कनु अपना बैलेंस नहीं संभाल पाती और सामने वाले इंसान के ऊपर गिर जाती है..
वह अचानक हुए इस हादसे के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था,मगर फिर भी अपना एक पैर नीचे दूसरी सीढ़ी पर रखकर खुद को बैलेंस कर लेता है..
इस वक़्त उसके दोनों हाथ कनु की कमर पर लिपटे हुए थे। कनु को जब एहसास होता है वह नहीं गिरी तो अपनी आंखे खोलकर देखती है उसके सामने एक हैंडसम सा लड़का खड़ा था। उसने फॉर्मल पेंट शर्ट पहने थे।
उसकी बॉडी वेल फिटेड थी। एक पल को तो वह उसके चेहरे में ही खो गई।
तभी उसके कानों में एक मर्दाना आवाज पड़ती है... "अब सारी जिंदगी ऐसे ही रहने का इरादा है क्या? " कनु अपने सैंस में लौटती है.. वह उससे दूर होते हुए कहती है ..
" इससे अच्छा तो में जहर ही न खा लूं.. "
वह लड़का उसे आंखे छोटी कर देखता है क्या मतलब वह उसकी हैंडसमनेस और चार्मिंग की बेइज्जती कर रही है।
वह बोला.. "ओ हेलो मिस बकबक.. क्या तुम्हारा दिमाग खराब है? सामने से आकर तुम खुद मुझसे टकराई थी। समझ नहीं आता आंखे है या बटन.. "
" तुमने मेरी आंखों को बटन कहा.. चिराग जलाकर भी ऐसी आंखे ढूंढोगे न तब भी दुनिया मे तुम्हे कहीं नहीं मिलेगी समझे Mr.. " कनु ने उसकी बात का जवाब अपनी अकड़ में देते हुए कहा ..
"तो हम चिराग बुझाकर ढूंढेंगे न .. " उसने भी एक तिरछी मुस्कुराहट के साथ उससे कहा ..
उसकी मुस्कुराहट को देखकर कनु चिढ़कर बोली .. ओ हेलो ... तुम जो भी कोई हो.. मुझे कोई शौक नहीं है तुमसे बेफिजूल में टकराने का और बोल तो ऐसे रहे हो ..जैसे मुझे तुमसे शादी करनी है .. हूंन .. "
" वैसे आइडिया अच्छा है .."इतना कह वह ऊपर की तरफ निकल जाता है। इधर कनु सोचती रह जाती है क्या मतलब था उसका..
श्री जो कब से इस ड्रामे को देख रही थी। उसका हाथ पकड़ खींचकर ले जाते हुए बोली.."शादी का.."
"ओ.." कनु ने उसकी बात का रिप्लाई देते हुए कहा मगर जैसे उसे एहसास हुआ वह पीछे पलटकर बोली " इसकी तो .. "
मगर श्री उसे वहां से खींचकर ले जाती है। इधर वह लड़का आगे बढ़कर सीढ़ियां चढ़ता है। उसकी आंखों के सामने दुनिया के आठवें अजूबे खड़े थे..
जीवन अपनी आंखे बड़ी बड़ी कर उसे देखकर बोला .. हर्ष भाई आप सच में शादी कर रहे है .. उसकी बात सुन वह लड़का जो कोई और नहीं वेदांश के पर्सनल असिस्टेंट था । उसने हड़बड़ाकर कहा.. " अरे.. शायद आपको कुछ गलतफहमी हो गई होगी .."
कोई कुछ आगे बोलता मगर उससे पहले ही वो बोला... "मैम से कहो जल्दी यहां से घर निकले बॉस ने मुझे आप सभी सिक्योरिटी दी है .. "
पीछे से आ रहा पूरा राठौर परिवार को भी ये सब सही लगता है। वह जाने के लिए रेडी हो जाते है। विकास सावंत आज उनके घर शाम को आयेंगे ऐसा कहकर वह भी अपनी वाइफ और बेटे के साथ वहां से चले जाते है।
इधर गुस्से में कार के अंदर बैठी अक्षिता को जब सावंत देखते है तो उसे श्री पर गुस्सा आने लगता है। वह अक्षिता के सिर पर हाथ फेरकर कहता है.." आप टेंशन न ले बच्चा में बहुत जल्द तुम्हारी सारी परेशानी को दूर करने का इंतजाम करने वाला हूं.. "
इधर एक सुनसान जंगल के बीच... एक भूतिया घर जैसी दिखाई देने वाली हवेली.. उस पर जगह जगह घास जम चुकी थी। कहीं कहीं काई जमी हुई थी।
मगर अंदर से उतनी ही शानदार.. थी। उस हवेली के लिविंग एरिया में एक इटालियन स्टाइल में बड़ा सा झूमर लटका हुआ था। मगर इसमें चारों तरफ केवल शांति थी
जैसे सालों से यहां कोई नहीं रहता हो..। इस हवेली के किसी एक कमरे में .. एक आदमी को बुरी तरह पीटकर कुर्सी से बांध कर रखा हुआ था। उसके सामने ही लग्जरी काउच पर तीन शख्स पैर पर पैर चढ़ाए बैठे थे।
उन तीनों में से एक शख्स जो बीच में पड़े सोफे पर रोब के साथ बैठा था बिल्कुल किसी किंग तरह.. वह अपने हाथ से सामने खड़े एक गार्ड को कुछ इशारा करता है। उसके तुरंत बाद एक आदमी कांच की बोतल लाता है जिसमें से धुंआ उठा रहा था। उसमें खोलता हुआ लिक्विड था देखकर साफ पता चल रहा था.. वह हाई क्वालिटी का तेजाब है..
वह गार्ड उस आदमी को वो कांच की बोतल पकड़बाते हुए बोला... "ये साला तो मुंह ही नहीं खोल रहा.."
उसकी बात सुन वह किंग की तरह बैठा वह शख्स.. एक एविल स्माइल से मुस्कुराता है ..
जो कोई और नहीं..
सॉरी फ्रेंड्स में डेली चैप्टर तो नहीं दे पाती .. फिलहाल मेरे कुछ दिन में सेकंड सेमेस्टर के exam है फिर ऊपर से एक दो कंपीटिशन में फॉर्म फ़िल कर दिया था। उसके भी एग्जाम है पूरे साल पढ़ाई तो की नहीं.. कम से कम इज्जत बचाने लायक पढ़ना पड़ रहा है ।
पर में जल्दी जल्दी अपलोड करने की कोशिश करूंगी.. और थैंक यू 💞 आप सभी को मेरी स्टोरी रेड करने के लिए..
बहुत बहुत शुक्रिया मिस दिशा ओर एंड Mr Sahu .. आपका दोनों का 💞💞 कॉमेंट्स के लिए ..
Agar aapko story pasand aa rahi hai to follow zarur karein ❤️ OR raiting bhi dein..