Mere Dard ka Marham tha vo - 1 in Hindi Love Stories by A Singh books and stories PDF | मेरे दर्द का मरहम था वो - 1

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मेरे दर्द का मरहम था वो - 1

🙏 एक छोटी-सी विनती 🙏

अगर मेरी इस कहानी में कोई गलती रह जाए, तो कृपया मुझे माफ़ कर दीजिएगा। ❤️ यह सिर्फ़ मेरे दिल के एहसासों की एक छोटी-सी कोशिश है।

✨ चलिए, कहानी शुरू करते हैं… ✨


🌼 "हर किसी के हालात हमेशा एक जैसे नहीं होते…" 🌼

किसी की मजबूरी को समझे बिना उसे जज करना, कहीं न कहीं हमारी अपनी सोच और परवरिश पर सवाल खड़े करता है। मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही मजबूरियों के भँवर में फँसी एक लड़की की है।

इस कहानी की नायिका है राधिका। एक ऐसी लड़की, जो वक्त से पहले ही बड़ी हो गई और अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाने लगी। उसका इरादा हमेशा साफ़ था—उसे हर हाल में अपने परिवार का सहारा बनना था। उसकी सोच सही थी, उसकी नीयत साफ़ थी, लेकिन हालात ने ऐसी बेरहम करवट ली कि चाहकर भी किस्मत उसका साथ न दे सकी।

जब वह दुनिया के तानों और अपनी मजबूरियों के आगे पूरी तरह टूटने लगी, जब उसे लगा कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, तभी उसे अपने महादेव की याद आई।

और हम सब जानते हैं, जहाँ महाकाल का हाथ सिर पर हो, वहाँ हार की कोई गुंजाइश नहीं होती। उनकी असीम कृपा से राधिका ने खुद को थोड़ा संभाल लिया, लेकिन उसकी अग्निपरीक्षा अभी खत्म नहीं हुई थी…

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इन सब बातों को सोचते-सोचते राधिका अपने अतीत की यादों में खो जाती है। वह परिवार, जो कभी उसकी सबसे बड़ी ताकत था, आज पूरी तरह बिखर चुका था।

राधिका के परिवार में उसके मम्मी-पापा और तीन बेटियाँ थीं। उनका कोई बेटा नहीं था, लेकिन इस बात की कमी उन्होंने कभी महसूस नहीं होने दी। तीनों बहनें एक-दूसरे से बेहद प्यार करती थीं।

राधिका सबसे बड़ी थी। वह अपनी दोनों छोटी बहनों को अपनी जान से भी ज़्यादा चाहती थी। उसकी दोनों बहनें भी उस पर जान छिड़कती थीं। राधिका को हमेशा विश्वास था कि चाहे दुनिया बदल जाए, लेकिन उसकी बहनें कभी नहीं बदलेंगी।

उसकी मँझली बहन का नाम आध्या और सबसे छोटी बहन का नाम आर्या था।

उनके पापा एक प्राइवेट नौकरी करते थे। आमदनी ज़्यादा नहीं थी, लेकिन फिर भी उनके घर में प्यार, अपनापन और खुशियाँ कभी कम नहीं थीं। वे एक साधारण मिडिल क्लास परिवार थे, जहाँ पैसों से ज़्यादा रिश्तों की अहमियत थी।

महादेव की कृपा से तीनों बेटियाँ बहुत संस्कारी और अच्छे स्वभाव की थीं।

राधिका के मन में किसी के लिए कोई छल, कपट या बुराई नहीं थी। अगर कोई उसे डाँट देता या उसकी गलती न होने पर भी उसे सुनना पड़ता, तो वह बिना कुछ कहे सब सह लेती।

मिडिल क्लास परिवारों में छोटी-छोटी बातों पर डाँट-फटकार होना आम बात होती है। राधिका के साथ भी बचपन से ऐसा ही होता आया था। गलती चाहे किसी की भी हो, डाँट अक्सर उसी को पड़ती, क्योंकि वह सबसे बड़ी थी।

कई बार उसे लगता था कि सबसे बड़ी संतान होना भी किसी परीक्षा से कम नहीं होता। लेकिन उसने कभी किसी से शिकायत नहीं की। वह अपनी छोटी-सी दुनिया और अपने महादेव की भक्ति में ही खुश रहती थी।

उस समय तक उनका पूरा परिवार हँसता-मुस्कुराता था। किसी ने भी नहीं सोचा था कि किस्मत उनकी ज़िंदगी का सबसे कठिन इम्तिहान अभी बाकी रखे बैठी है…


   
    मिलते हैं अगले अध्याय में… ❤️


                              — A Singh🌹