चारू एक सेमिनार एटेंड करती है। जिसमे वो पांच साल बाद अपने कॉलेज के प्रोफेसर अमर राजपूत को स्टेज पर देखती है। अमर को देख वो पांच साल पीछे पुरानी यादो मे खो जाती है। जहां वो पहली बार अपने कॉलेज मे अमर से मिली थी। अब आगे –
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सेमिनार खत्म हो के बाद चारू उठी और जाने लगी जब एक फेलो प्रोफेसर ने उसे डांस करने का प्रस्ताव दिया। वो उही की उम्र का था । चारू ने उसे देखा और पोलाइटली मना कर दिया।
" मै वैसे भी घर जा रही हूं । आप किसी और को पूछ लिजिए डांस के लिए। ", कहकर चारू जाने ही लगी थी।
" मिस चारू..वेट ! ", वो प्रोफेसर बोला।
चारू रूक गई। 'मिस चारू' इस एक शब्द ने ना जाने कितनी यादे ताजा कर दी थी। वो गहरे घाव जिन्हे इस पूरे सेमिनार वो जी रही थी एक बार फिर हरे होने लगे थे। चारू की आंखो मे नमी तैर गई।
" मिस्टर आर्दश मेरे पास समय नही है। हम बादमे बात करते है। "
इतना बोलकर चारू चली गई।
प्रोफेसर आर्दश उसे जाते देखते रह गए।
" कब खुलोगी तुम चारू । ऐसे खुद मे सिमट कर कब तक रहोगी। " आर्दश.ने सोचा।
आर्दश एक अच्छा लडका था। उसने इसी साल वाई एच यूनिवर्सिटी जाइन करी थी जहा उसकी मुलाकात चारू से हुए थी।
आर्दश अभी सोच ही रहा था की उसे गहरी नजरे होने ऊपर महसूस हुई। वो.पलटा तो अपने से कुछ पांच कदम की दूरी पर प्रोफेसर अमर.राजपूत उसे ही देख रहे थे।
आर्दश मुस्कुरा दिया।
" हाए मिस्टर राजपूत " आर्दश हाथ बडाते हुए बोला।
अमर भी मुस्कुरा दिया। उसने आर्दश के साथ हैंड शा कर लिया।
" आप तो स्टार प्रोफेसर है मिस्टर राजपूत है। वातावरण आ कमेंडेबल वर्क यू डिड इन मेघराज । ऊपर से यू हैव योर ओन अगरो बेस्ड कम्पनी । ", आर्दश खासा प्रभावित था अमर से।
अमर हल्के से हँस दिया।
" आप तो काफी कुछ जानते है मेरे बारे मे । " वो बोला।
आर्दश भी मुस्कुरा दिया। , " कौन नही जानता ! मेघराज मे हो रहे खनन को रोका ही आपने और आपके भाई नही था। ऊपर से आपका द पृथ्वी ट्रस्ट एंड आपकी कम्पनी द पृथ्वी मिलकर और पेड लगा रहे है। यू आर डुईगं नाईस वर्क । वैसे सच कहूं तो आपकी तरह बनना है मुझे । यू आर माई मोटिवेशन । "
अमर चौक गया । उसे नही पता था कि जिस लडके को चारू से बात करता देख वो जल रहा था..वो उहकी तरह बनना चाहता है। अमर की नजरे कोमल हो गई। वो आगे.बडा और आर्दश के कंधे पर हाथ रख दिया।
" बी योर ओन आइडल । किसी के जैसे बनने के चक्कर मे खुद मत खो देना । ", अमर गंभीरता से बोला।
आर्दश ने हाँ मे सर हिला दिया।
तभी अमर बोला, " हु वॉज दैट गर्ल बाइ द वे ? "
अमर ने अपने पेंट की जेब मे हाथ डाल खुद को भरसक शांत दिखाने की कोशिश करने लगा।
" कौन ? ", आर्दश. की भंवे सिकुड गई।
" जिस से डांस करने का पुछ रहे थे । ",
" ओ..शी..शू इज जस्ट आ फ्रेंड । " , आर्दश आराम से बोला।
" फ्रेंड..और..गर्लफ्रेंड? ", अमर शरारत से बोला। हालाकि उसकि जेब मे उसकी मुट्टठियां कस गई थी।
" जस्ट आ नोर्मल फ्रेंड । इससे ज्यादा वो कभी किसी को अपने पास आने भी नही देगी। ", आर्दश हल्की उदासी से बोला।
अमर की भंवे सिकुड गई। " मतलब ? "
" फिर कभी बताउंगा सर । अभी चलता हूं । " आर्दश ने बात टालने के उद्देश्य से कहा।
" अर्....आर्दश ! रूको। ", अमर ने उसे टोका ।
आर्दश पलट गया।
" उसका नबंर दे सकते हो ? ", अमर ने होंठ भींच लिए। वो स्वंय को शर्मिदा महसूस कर रहा था।
आर्दश.ने सवालिया निगाहो से अमर को देखा थो अमर झेंप गया।
" मै ऐसे ही किसी को भी उसका नंबर नही दे सकता । ", आर्दश प्रोटेक्टिवली बोला।
अमर का चेहरा सख्त हो गया। , " मै कोई 'किसी' नही हूं । मै वो ही जिसके कारण मिस चारू किसी को भी अपने पास नही आने देती । एक नोर्मल फ्रेंड से ज्यादा का अधिकार किसी को नही देती। आई एम हर फर्सट लव । "
अमर ने मानो आर्दश के सामने एलान कर दिया हो। उहकी आवाज शांत थी किंतु बातो मे एक पोजेसिवनैस छुपी थी। वो पुरे अधिकार के साथ स्वंय को चारू का पहला प्यार बोल रहा था।
आर्दश अमर की बात सुनकर चौंक गया। और चौंक गई थी चारू...जो अपनी फोन लेने वापस आई थी।
" अमर ! ", उसने हल्की आवाज मे अमर का नाम लिया।
एक हवी का झोंका आया और चारू की खुश्बू अमर से होते हुए गुजर गई । पांच साल बाद उसे गिली मिट्टी और पहली बारिश की खुश्बू का एहसास हुआ था। उसे चकरू का एहसास हुआ था। वो पलट गया । और उहकी निगाहे...वो.तो ठहर गई चारू की हल्की भूरी आंखो पर ।
वो अपलक चारू को निहारने लगा। वो गोल्डन सारी मे स्वंय धूप का टुकडा प्रतीत होती थी। अमर की सांसे उसके गले मे ही अटक गई।
आज देखा है आपके । पूरे पांच साल बाद आप मिली है। आपकी खुश्बू ने घेरा है मुझे। क्या तुम महसूस कर पा रही हो जो मै कर पा रहा हूं। क्या तुम मेरी तडप , मेरा गिलट समझ पा रही हो ।
अमर ने आंखो ही आंखो मे सवाल किया। चारू सिहर उठी। मानो वे सब समझ रही हो। वो.समझ रही हो अमर की आंखो की थकान , और उनमे छिपी तडप ।
मगर सब नजरअंदाज करती चारू अपना फोन टेबल से उठा चली गई।
अमर ने दुख से आंखे बंद कर ली। तभी आर्दश आकर उहकु कान मे फुसफुसाया ," गर्लफ्रेंड? "
अमर ने झटके से उहकी तरफ देखा । आर्दश ने दांत दिखा दिए ह अमर ने ना मे सर हिला दिया।
" नो..स्टुडेंट ! "
इतना बोलकर अमर भी चला.गया।
क्रमशः
यार आपलोग कमेंट क्यो नही करते । कितना बोलू ? आप लोग को स्वंय से शर्म सी नही आती कि हम समीक्षा नही करते, रेटिंग भी नही देते । मेरी महनत की कोई कदर नही है क्या ?
मै दो तीन घंटे निकाल कर कहानी देती हूं । और रोज एक भाग तो लिख ही रही हूं। अब ये मातृभारती भाग को शैडयुल करते है। तो एक से दो दिन दिन। टाइम लग जाता है। मगर इसमे भी मै खाली नही बैठती मै लिखती रहती हूं। थोडा तो लेखिका का भी सोचिए। पैसे थोडी मांग रही हूं । मांगती भी तो भी आप देते नही ।
दिस इज नोट फेयर । इतना निराश ना करे । मुझे इस भाग पर दस कमेंट चाहिए। नही तो अगला भाग नही आएगा