My Dear Professor - Part 35 in Hindi Love Stories by Vartika reena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 35

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 35








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स्टाफ रूम का माहोल अजीब सा हो गया था। चारू हैरत मु आर्दश को देख रहे थी। आर्दश ने अभी अभी उसे बताया था की न्यू ओनर उसके द्वारा ही स्वागत चाहते है। और पर्सनली मिलना चाहते है। 


" पर वो मुझसे क्यो मिलना चाहते है? और है कौन नया मालिक ? " , चारू ने भवे सिकोड ली।


आर्दश ने कंधे उचका दिए।  चारू ने चिढ कर उसकी बांह पर मुक्का जड दिया। आर्दश हँस दिया। तभी उसकी नजर चारू के गले मे पडे पैनडेंट पर पडी। वो चांदी की चैन जिसके अंत मे चांदी का ही अपराजिता का फुल बना था...आर्दश को लुभा रहा था।


उसने चैन की तरफ इशारा किया , " ये पैनडेंट स्पेशल है ? पांच साल से पहन रही हो तुम। क्या खास बात है इसमे ? " 


चारू ने चैन को अंगूठे और पहली उंगली के बीच पकडा और सोच मे पड गई। 


" ये किसी के प्रती मेरा समर्पन है। " , वो हल्के से मुस्कुराई। 


" किसके प्रती? "   आर्दश ने सवाल किया।


चारू ने उसे एक नजर देखा फिर ना मे सर हिला दिया। आर्दश ने गहरी सांस भरी और बोला ," हम दोस्त है चारू । जब तुम मेरे साथ हँस सकती हो., तो रो भी सकती हो। मुझे इतना पराया ना करो यार..! मै क्या नैना , नव्या , शशांक और अमोघ से अलग.हूं क्या। मै दोस्त नही बन पाया आज तक तेरा । "


आर्दश आहत भाव से चारू को देखने लगा। चारू का दिल पसीज गया। उसने एक कदम आर्दश की तरफ बडाया।


" तुम मेरे लिए मेरी चंडाल चौकडी का अहम हिस्सा हो। इन पांच सालो मे सबसे करीबी दोस्त मेरे तुम ही तो हो। और दोस्त भी कहा मेरे भाई हो तुम। भूल गए..राखी क मेरी कुत्ता भईया ! " 


चारू अंत मे शरारत से बोली तो आर्दश.ने चारू के बाल खींच दिए। 


" ओए कुत्ते....मार दुंगी ! ", चारू आर्दश की बांह पर मुक्का मारती हुई बोली। 

" गड्ढा कर दे इस बांह मे मेरी। जबसे मार रही है चुड़ैल ! " , आर्दश ने मुंह बना कर कहा। फिर चारू को कंधु से धक्का देते बोला , " जा! स्वागत करना है न्यू ओनर का। तैयारी कर । " 


चारू ने आर्दश को जीभ चिढाई, " अवै.वैऐऐऐ!!!" और भाग गई। आर्दश हँस दिया।




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वाई एच युनिवर्सिटि आज मिडिया रिपोर्ट्स से घिरी थी जब यूनिवर्सिटी के सामने एक सफेद लक्जरी कार आकर रूकती है। कार प्रिमयम थी..ये देखकर ही पता चल रहा था। कार के आगे पीछे दो गाडिया और थी जो सेम ही थी। उन गाडी मे से कुछ लोग बाहर निकले। हाथ मे बंदूक , ब्लेक सुट पहने वो सभी आदमी यम दूत से कम नही लग रहे थे। तभी बीच वाली सफेद कार का दरवाजा खुला और बाहर कदम रखते हुए अमर राजपूत निकला।


उसे देखते ही वहां पर जमा रिपोर्ट्स ने अपने कैमरा से अमर को तस्वीरो मे कैप्चर करना शुरू कर दिया।


सब पर अपना प्रभाव छोडता अमर बस एक ध्येय से यहां आया था। वो सभी को नजरअंदाज करते हुए युनिवर्सिटी मे दाखिल हो गया। 

रेड कार्पेट के अंत पर बने स्टेज पर चकरू खडी थी। उसने हाथ मे गुलदस्ता पकड रखा था। 


उसकी नजर जैसे ही अमर पर पडी वो चौंक गई।  अमर जो अब तक स्टेज तक आ गया था...उसने चारू को देखा और मुस्कुरा.दिया।


चारू का दिल जोरो से धडक उठा । वो स्तब्ध होकर अमर को अपने पास आते देखती रही । अमर को उहकी हालत पर हँसी आ रही थी। मगर वो इस समय हँस नही सकता था। स्वंय को संयत करते हुए अमर चारू के सामने खडा हो गया।


चारू एहमखो की तरह अमर का मुंह ताकती रही जब तक की पास मे खडे आर्दश ने उसे कोहनी ना मार दी। चकरू झटके से होश मे.आई। वो हडबडा गई। 


उसने आर्दश को घूरा फिर अमर.को देखा। वो.समझ गई थी की न्यू ओनर कौन है। अपनी सांसो कौ संभालते हुए चारू ने बुके अमर की तरफ बडा दिया। उसके हाथ कांप रहे थे। सर घूम रहा था। रात भर रोने और नींद ना आना के कारण उसका बीपी लो हो गया था। उसने एक नजर अमर को देखा। 


पांच साल पहले की वो सभी यादे एक साथ उहकी आंखो के.सामने तैर गई।  चारू की सांसे भारी होने लगी। उसने एक आखरी बार अमर को विश किया और स्टेज से उतर गई।  


उसकी आंखे नम पढ गई थी। पग लडखडा रहे थे। अमर उसे जाते हुए देखता रहा। उसने जल्दी से सारी फोर्मलिटिज पुरी करी और स्टेज से उतर उस दिशा मे बड गया जहां चारू गई थी।







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अपने सीने पर हाथ धरे चारू हॉल के अंत मे एक पिलर से टिक कर खडी थी। ये जगह खाली थी। और युनिवर्सिटि के इस हिस्से मे ज्यादा कोई आता भी नही था। चारू जानती थी ये बात। इसलिए जब भी दर्द उसकी सहन करने की क्षमता को पार कर जाता वो सबसे छिपकर यहां आ जाती । अकेले..तन्हा अपनी यादो के साथ ! 


चारू अपने सीने पर हाथ मसल रही थी। उसने चारो तरफ देखा मानो स्वंय पर काबू चाहती हो ।


" नही..नही..नही ! तू कमजोर नही पड सकती चारू । अभी नही..कभी नही। ये अंजाइटी तुझसे ज्यादा ताकतवर नही है। यू कैन कंट्रोल इट । " चारू स्वंय को दिलासा देती बोली।


मगर.उसकी उखडती सांसे कुछ और ही कहानी बता रही थी। वो सरकते हुए जमीन पर बैठ गई।  उसने घूटने मोडे और उन्मे चेहरा छुपा रो पडी । 



अभी वो और यादो मे , और इस तडप खोती की एक हाथ आया और उसने चारू को अपने सीने से लगा लिया।.चारू की धडकने  तेजी से रफ्तार पकडने लगी। उसे जंगल और कॉफी की खुश्बू महसूस हुई।  वो समझ गई की उसे थामने वाला कौन है ।


वो.लडखडाती , तड़पती आवाज मे बोली, " अमर ! " 





क्रमशः


दस कमेंट = नेक्सट पार्ट