Mr. Ms. Fake - 2 in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 2

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 2



एपिसोड 2 – पहली मुलाकात, पहला झगड़ा

अगली सुबह...

आर्यवीर पूरी रात सो नहीं पाया था।

दादी ने साफ़ कह दिया था—

"अगले रविवार तक अगर तू अपनी पसंद की लड़की नहीं लाया, तो मैं जिस लड़की को पसंद करूँगी, उसी से तेरी शादी तय कर दूँगी।"

आर्यवीर के हाथ से चाय का कप लगभग छूट गया।

"दादी... एक हफ़्ते में लड़की कहाँ से लाऊँ?"

दादी मुस्कुराईं।

"ये मैं नहीं जानती।"

इतना कहकर वे आराम से अख़बार पढ़ने लगीं।

आर्यवीर ने मन ही मन सोचा—

"अब सच में कुछ करना पड़ेगा।"

ऑफिस पहुँचते ही कबीर उसकी टेबल पर आ बैठा।

"तो? क्या फैसला किया?"

आर्यवीर ने धीरे से कहा,

"शायद... मुझे तेरी बात माननी पड़ेगी।"

कबीर की आँखें चमक उठीं।

"मतलब नकली गर्लफ्रेंड?"

आर्यवीर ने मजबूरी में सिर हिला दिया।

कबीर हँसते-हँसते बोला,

"भाई, तू देखना... यही आइडिया तेरी लाइफ़ बदल देगा।"

आर्यवीर ने लंबी साँस ली।

"बस कोई अच्छी लड़की मिल जाए..."

उसी समय...

शहर के एक बड़े मॉल में थिएटर ग्रुप का प्रमोशनल शो चल रहा था।

सान्वी अलग-अलग किरदार निभाकर लोगों का मनोरंजन कर रही थी।

कभी बूढ़ी अम्मा...

कभी स्कूल टीचर...

कभी पुलिस इंस्पेक्टर...

लोग हँस-हँसकर ताली बजा रहे थे।

शो खत्म होते ही उसका मैनेजर आया।

"सान्वी, शाम को एक कॉर्पोरेट इवेंट है। वहाँ भी एक्टिंग करनी है।"

"ठीक है सर।"

लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी।

उसे अभी भी अपने पिता के ऑपरेशन के पैसों की चिंता सता रही थी।

शाम...

आर्यवीर ऑफिस से निकलकर जल्दी-जल्दी सड़क पार कर रहा था।

तभी किसी से ज़ोरदार टक्कर हुई।

"धड़ाम!"

दोनों के हाथों का सामान नीचे गिर गया।

"अरे! देखकर नहीं चल सकते क्या?" लड़की गुस्से से बोली।

आर्यवीर भी झुँझला गया।

"गलती आपकी थी!"

"मेरी?"

"हाँ, आप मोबाइल देखते हुए चल रही थीं।"

"और आप?"

"मैं..."

आर्यवीर चुप हो गया।

क्योंकि सच में वह भी मोबाइल देख रहा था।

लड़की मुस्कुराई।

"देखा? हीरो बनने चले थे।"

आर्यवीर ने पहली बार ध्यान से उसकी तरफ देखा।

घुँघराले बाल...

बड़ी-बड़ी आँखें...

चेहरे पर गुस्से के बावजूद एक अजीब-सी मासूमियत।

वह कुछ कह पाता, उससे पहले लड़की नीचे गिरे कागज़ उठाने लगी।

आर्यवीर भी मदद करने झुका।

दोनों ने एक ही कागज़ पकड़ा।

उनके हाथ टकरा गए।

दोनों ने एक साथ हाथ पीछे खींच लिया।

एक पल की ख़ामोशी...

फिर लड़की बोली,

"वैसे... सॉरी।"

आर्यवीर भी मुस्कुरा दिया।

"मेरी भी गलती थी।"

दोनों अपने-अपने रास्ते चल दिए।

करीब दस कदम आगे बढ़ने के बाद...

सान्वी अचानक चिल्लाई—

"अरे... मेरा बैग!"

आर्यवीर ने पीछे मुड़कर देखा।

उसके हाथ में जो बैग था...

वह उसका अपना नहीं था।

गलती से दोनों के एक जैसे काले बैग बदल गए थे।

दोनों एक-दूसरे की तरफ भागे।

लेकिन तभी...

एक छोटा बच्चा उनके बीच से दौड़ा।

दोनों फिर टकरा गए।

इस बार दोनों सीधे पास की आइसक्रीम की दुकान के सामने गिर पड़े।

आर्यवीर के हाथ की आइसक्रीम उड़कर सीधे उसके अपने चेहरे पर आ गिरी।

सान्वी एक सेकंड तक उसे देखती रही...

फिर अपनी हँसी रोक नहीं पाई।

"हा... हा... हा... हा...!"

आर्यवीर शर्म से लाल हो गया।

पास खड़े लोग भी हँसने लगे।

वह झेंपते हुए बोला,

"बहुत मज़ाकिया है ना?"

सान्वी हँसते-हँसते बोली,

"सॉरी... लेकिन आपकी शक्ल अभी बिल्कुल वनीला आइसक्रीम जैसी लग रही है।"

आर्यवीर भी अपनी हँसी नहीं रोक पाया।

दोनों पहली बार खुलकर हँसे।

लेकिन उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था...

कि यही अजीब-सी मुलाकात कुछ दिनों बाद उन्हें एक ऐसे समझौते तक ले जाएगी, जो उनकी पूरी ज़िंदगी बदल देगा।

आपको मुझे एक विनती है कि यह मरी पहली कमेडी कहानी है आप लोगोंक  आप तक को कैसी लगी यह गाने पर अच्छी लगी हो तो प्लीज कहानी पढ़कर कमेंट कर दीजिएगा कि ताकि मैं और अच्छे से कहानी लिखने की कोशिश करूंगी अगर आप लोग कमेंट करेंगे तो मझे आगे की कहानीलखने में अच्छा लगेगा धन्यवाद राधे-राधे