Mr. Ms. Fake - 3 in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 3

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 3

Mr. & Ms. Fake

Episode 3 – The Crazy Proposal

सुबह के साढ़े नौ बजे।

आर्यवीर अपने केबिन में बैठा था, लेकिन उसकी आँखें लैपटॉप की स्क्रीन पर नहीं, बल्कि दीवार पर टिकी थीं।

उसके दिमाग़ में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—

"एक हफ़्ते में गर्लफ्रेंड लाओ... नहीं तो शादी पक्की।"

तभी कबीर कॉफी लेकर अंदर आया।

"क्या हुआ? अभी तक कोई लड़की मिली?"

आर्यवीर ने मायूस होकर सिर हिलाया।

"नहीं।"

कबीर ने मुस्कुराते हुए कहा,

"तो फिर कल मॉल वाली लड़की को ढूँढ़।"

"कौन?"

"अरे वही... जिससे तू दो बार टकराया था।"

आर्यवीर को अनायास ही सान्वी का हँसता हुआ चेहरा याद आ गया।

वह खुद भी हल्का-सा मुस्कुरा दिया।

उधर...

सान्वी थिएटर पहुँची तो मैनेजर ने उसे एक लिफाफा दिया।

"ये तुम्हारी पेमेंट है।"

सान्वी ने पैसे गिने।

फिर अस्पताल के बिल की कॉपी देखी।

रकम अब भी बहुत कम थी।

उसने मन ही मन कहा,

"पापा का ऑपरेशन... मुझे जल्दी पैसे चाहिए।"

वह भगवान की छोटी-सी मूर्ति के सामने खड़ी हुई और बोली,

"बस... एक अच्छा काम मिल जाए।"

शाम को...

कबीर ज़बरदस्ती आर्यवीर को उसी मॉल में ले आया।

"आज किस्मत अच्छी हुई तो मिल जाएगी।"

आर्यवीर बोला,

"अगर नहीं मिली तो?"

"तो कम से कम आइसक्रीम तो खा लेंगे।"

दोनों हँस पड़े।

उसी समय...

सामने एक छोटे-से स्टेज पर भीड़ जमा थी।

आर्यवीर ने देखा...

वही लड़की!

सान्वी अलग-अलग किरदार निभा रही थी।

कभी रोती हुई दुल्हन...

कभी गुस्से वाली टीचर...

कभी पुलिस इंस्पेक्टर...

भीड़ ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी।

आर्यवीर हैरान रह गया।

"ये... इतनी अच्छी एक्टर है?"

कबीर मुस्कुराया।

"भाई... भगवान ने खुद रास्ता दिखा दिया।"

शो खत्म होने के बाद...

सान्वी बाहर निकल रही थी।

तभी सामने आर्यवीर खड़ा था।

सान्वी ने उसे देखते ही मुस्कुराकर कहा,

"ओह... मिस्टर वनीला आइसक्रीम!"

आर्यवीर शर्म से मुस्कुरा दिया।

"और आप... मिस बैग एक्सचेंज।"

दोनों हँस पड़े।

कुछ पल बाद आर्यवीर थोड़ा गंभीर हो गया।

"मुझे... आपसे एक ज़रूरी बात करनी है।"

सान्वी ने भौंहें चढ़ाईं।

"इतनी जल्दी? पहले नाम तो बता दीजिए।"

"मैं आर्यवीर।"

"और मैं सान्वी।"

दोनों ने हाथ मिलाया।

पास के कैफ़े में...

दोनों आमने-सामने बैठे थे।

आर्यवीर कई बार बोलने की कोशिश करता, फिर रुक जाता।

आख़िर सान्वी हँसकर बोली,

"इतना डर क्यों रहे हैं? मैं इंटरव्यू नहीं ले रही।"

आर्यवीर ने गहरी साँस ली।

"जो मैं कहने वाला हूँ... वो सुनकर शायद आप मुझे पागल समझें।"

"कोशिश करिए।"

"क्या... आप... मेरी गर्लफ्रेंड बनेंगी?"

सान्वी की आँखें बड़ी हो गईं।

"क्या?"

आर्यवीर तुरंत बोला,

"नहीं... मतलब... नकली गर्लफ्रेंड।"

दो सेकंड की ख़ामोशी...

फिर...

सान्वी ज़ोर से हँस पड़ी।

इतनी ज़ोर से कि कैफ़े में बैठे लोग उनकी तरफ़ देखने लगे।

"आप सीरियस हैं?"

"हाँ।"

"आप मुझे जानते तक नहीं... और सीधे गर्लफ्रेंड?"

"नकली..."

"वो भी कम अजीब नहीं है।"

आर्यवीर ने पूरी कहानी बता दी—

दादी...

हर हफ्ते रिश्ता...

एक हफ़्ते की मोहलत...

और शादी से बचने की उसकी कोशिश।

सान्वी ध्यान से सुनती रही।

फिर बोली,

"मतलब... आपको एक एक्टर चाहिए।"

आर्यवीर ने सिर हिलाया।

"हाँ।"

सान्वी कुछ देर सोचती रही।

उसी समय अस्पताल से फिर फोन आया।

उसने कॉल काट दी।

उसकी आँखों में चिंता साफ़ दिखाई दे रही थी।

आर्यवीर ने पूछा,

"सब ठीक है?"

सान्वी ने मुस्कुराने की कोशिश की।

"हाँ... बस कुछ पर्सनल प्रॉब्लम है।"

वह उठ खड़ी हुई।

"मुझे जाना होगा।"

"तो... आपका जवाब?"

सान्वी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

"अभी नहीं।"

वह वहाँ से चली गई।

आर्यवीर उसे जाते हुए देखता रह गया।

उसे लगा... शायद उसने ज़िंदगी का सबसे अजीब प्रस्ताव देकर बहुत बड़ी गलती कर दी।

लेकिन उसे नहीं पता था...

कि अगले ही दिन सान्वी खुद उसे फोन करने वाली है।

क्योंकि उसकी ज़िंदगी भी एक ऐसे मोड़ पर पहुँच चुकी थी, जहाँ उसे पैसों की सख़्त ज़रूरत थी...

और शायद...

यह अजीब-सा समझौता दोनों की ज़िंदगी बदलने वाला था।

To Be Continued...