Mr. & Ms. Fake
Episode 5 – Welcome, Future Bahu!
रविवार की सुबह...
आर्यवीर अपने कमरे में इधर-उधर टहल रहा था।
उसने घड़ी की तरफ देखा।
सुबह 10:15 बजे।
आज पहली बार सान्वी उसके घर उसकी गर्लफ्रेंड बनकर आने वाली थी।
उसके हाथ ठंडे पड़ चुके थे।
तभी कबीर का फोन आया।
"भाई... ज़िंदा है?"
"यार... बहुत डर लग रहा है।"
"शादी नहीं हो रही, सिर्फ़ एक्टिंग है।"
"मेरी दादी के सामने एक्टिंग करना किसी इंटरव्यू से कम नहीं है।"
कबीर हँस पड़ा।
"भगवान तुम्हारी आत्मा को शांति दे।"
फोन कट गया।
नीचे हॉल में...
दादी पूरे घर को आदेश दे रही थीं।
"अरे, फूल ठीक से लगाओ... हमारी होने वाली बहू पहली बार घर आ रही है।"
आर्यवीर सीढ़ियों से उतरते हुए बोला,
"दादी... अभी कुछ तय नहीं हुआ है।"
दादी ने घूरकर देखा।
"चुप! नज़र मत लगा।"
इतने में...
टिंग-टॉन्ग...
डोरबेल बज गई।
पूरा घर एक साथ दरवाज़े की तरफ देखने लगा।
आर्यवीर ने धीरे से दरवाज़ा खोला।
सामने सान्वी खड़ी थी।
हल्के गुलाबी रंग का सूट, खुले बाल और चेहरे पर हल्की-सी घबराहट।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
सान्वी ने धीमे से पूछा,
"मैं ठीक लग रही हूँ?"
आर्यवीर कुछ सेकंड उसे देखता ही रह गया।
फिर संभलते हुए बोला,
"हाँ... मेरा मतलब... बहुत अच्छी।"
सान्वी मुस्कुरा दी।
उसी समय दादी पीछे से आ गईं।
"अरे बहू... बाहर क्यों खड़ी हो?"
इतना कहते ही उन्होंने सान्वी का हाथ पकड़ लिया।
आर्यवीर मन ही मन बोला,
"हे भगवान... शुरुआत ही बहू से!"
दादी सान्वी को सीधे मंदिर के सामने ले गईं।
"पहले भगवान के दर्शन करो।"
सान्वी ने हाथ जोड़ लिए।
फिर दादी ने उसके सिर पर हाथ रखा।
"हमेशा खुश रहो।"
सान्वी को अचानक अपने घर की याद आ गई।
उसकी आँखें एक पल के लिए नम हो गईं।
लेकिन उसने तुरंत मुस्कुराकर बात संभाल ली।
कुछ देर बाद...
पूरा परिवार हॉल में बैठा था।
बीच में आर्यवीर और सान्वी।
और सामने...
पूछताछ समिति।
सबसे पहले आर्यवीर की माँ बोलीं,
"बेटा, तुम दोनों की पहली मुलाक़ात कहाँ हुई थी?"
आर्यवीर कुछ बोलता, उससे पहले सान्वी बोली,
"कैफ़े में।"
आर्यवीर चौंक गया।
उसने तो सोचा था कि दोनों "बुक स्टोर" कहेंगे।
माँ मुस्कुराईं।
"अच्छा! कौन-सा कैफ़े?"
अब दोनों एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
सान्वी धीरे से बोली,
"वो..."
आर्यवीर तुरंत बोला,
"ब्लू मग कैफ़े।"
सान्वी ने राहत की साँस ली।
अब दादी का नंबर था।
"पहले किसने प्रपोज़ किया था?"
सान्वी ने तुरंत आर्यवीर की तरफ इशारा कर दिया।
"इन्होंने।"
पूरा परिवार हँसने लगा।
दादी ने शरारती अंदाज़ में पूछा,
"क्या कहा था?"
आर्यवीर के चेहरे का रंग उड़ गया।
सान्वी ने होंठ दबाकर हँसी रोक ली।
मजबूरी में आर्यवीर बोला,
"मैंने कहा था..."
"...क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?"
दादी ने ताली बजा दी।
"वाह!"
सान्वी ने धीरे से फुसफुसाया,
"अच्छी एक्टिंग कर लेते हैं।"
आर्यवीर ने भी धीरे से जवाब दिया,
"थैंक यू।"
तभी...
घर का सबसे शरारती सदस्य, दस साल का चिंटू, वहाँ आ गया।
उसने दोनों को घूरते हुए पूछा,
"अगर आप लोग सच में बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हो..."
"...तो एक-दूसरे का फेवरेट कलर बताओ।"
दोनों एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
आर्यवीर बोला,
"पिंक।"
उसी समय सान्वी बोली,
"ब्लैक।"
पूरा हॉल एकदम शांत हो गया।
चिंटू मुस्कुराया।
"पकड़े गए!"
आर्यवीर ने तुरंत कहा,
"अरे... इसका फेवरेट पहले पिंक था।"
सान्वी भी तुरंत बोली,
"हाँ... लेकिन दो महीने पहले बदल गया।"
चिंटू ने शक भरी नज़र से दोनों को देखा।
फिर बोला,
"हम्म... बच गए।"
पूरा परिवार हँस पड़ा।
इसी बीच नौकरानी चाय लेकर आई।
सान्वी घबराहट में कप उठाने लगी।
लेकिन उसका हाथ फिसल गया।
पूरा चाय का कप...
सीधे आर्यवीर की शर्ट पर गिर गया।
"ओह माय गॉड!"
सान्वी घबरा गई।
"सॉरी... सॉरी..."
वह जल्दी-जल्दी टिश्यू से उसकी शर्ट साफ करने लगी।
पूरा परिवार मुस्कुराकर दोनों को देख रहा था।
दादी ने धीरे से आर्यवीर की माँ से कहा,
"देखा... कितनी परवाह करती है हमारे आर्य की।"
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा...
और दोनों के मन में एक ही बात आई—
"काश इन्हें पता न चले कि ये सब सिर्फ़ एक्टिंग है..."
लेकिन उन्हें नहीं पता था...
घर के बाहर खड़ी एक लड़की यह सब देख रही थी।
उसने गुस्से में अपनी मुट्ठी भींच ली।
"आर्यवीर... तुम सिर्फ़ मेरे हो।"
उसने अपने मोबाइल में सान्वी की फोटो देखी और धीमे से कहा—
"अब खेल शुरू होगा..."