Mrut Drip ka Rahashy - 1 in Hindi Adventure Stories by Rawat books and stories PDF | मृत द्वीप का रहस्य - 1

The Author
Featured Books
Categories
Share

मृत द्वीप का रहस्य - 1






                       रहस्यमयी नक्शाffh



हिमालय की ऊँची चोटियों पर सूरज की पहली किरणें बर्फ को सुनहरा बना रही थीं। ठंडी हवा के तेज़ झोंके चेहरे को चीरते हुए गुजर रहे थे।
Nhgghhfgh
आर्यन ने अपने बैग की पट्टी कसते हुए कहा, "बस दो किलोमीटर और। उसके बाद कैंप लगाएँगे।"

कबीर हँस पड़ा। "अगर तब तक तुम हमें किसी और पहाड़ पर न चढ़ा दो।"

मीरा ने दूरबीन से सामने की चट्टानों को देखा। अचानक उसकी नज़र एक अजीब दरार पर पड़ी।

"रुको... वहाँ कुछ है।"

चारों उस ओर बढ़े। दरार के पीछे पत्थरों से बंद एक छोटी-सी गुफा थी। बड़ी मुश्किल से उन्होंने रास्ता साफ़ किया और अंदर पहुँचे।

गुफा की दीवारों पर सैकड़ों साल पुराने चित्र बने थे—अनोखे प्रतीक, समुद्र की लहरें और बीच में एक अजीब-सा द्वीप।

गुफा के बीचों-बीच पत्थर का एक संदूक रखा था।

आर्यन ने काँपते हाथों से उसका ढक्कन उठाया।

अंदर एक पुराना चमड़े का नक्शा, एक जंग लगी कंपास और एक धातु का सिक्का रखा था। सिक्के पर किसी अनजानी भाषा में शब्द उकेरे गए थे।

मीरा ने नक्शा फैलाया।

नक्शे के कोने में लाल स्याही से लिखा था—

"जो इस द्वीप की खोज करेगा, वह या तो अमर हो जाएगा... या फिर कभी वापस नहीं लौटेगा।"

चारों एक-दूसरे को देखने लगे।

तभी गुफा के बाहर किसी के कदमों की आवाज़ गूँजी।

ठक...

ठक...

ठक...

कबीर ने धीरे से फुसफुसाया, "हमारे अलावा यहाँ कोई और भी है..."

अचानक गुफा के मुहाने पर एक काली परछाईं दिखाई दी।

उसके हाथ में टॉर्च नहीं, बल्कि एक पुरानी तलवार थी।

और उसने धीमी आवाज़ में कहा—

"वह नक्शा... मुझे दे दो।"

चारों के हाथ-पाँव सुन्न हो गए और गुफा के भीतर सन्नाटा छा गया।


चारों की नज़रें उस काली परछाईं पर टिक गईं। उसके चेहरे पर काला मुखौटा था और हाथ में चमकती हुई पुरानी तलवार। उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें ऐसा आत्मविश्वास था मानो उसे पहले से पता हो कि वे यहाँ आएँगे।

"नक्शा मुझे दे दो," उसने दोबारा कहा।

आर्यन ने नक्शा मोड़कर अपने बैग में रख लिया।

"पहले यह बताओ कि तुम हो कौन?"

मुखौटा पहने आदमी हल्का-सा हँसा।

"मैं कौन हूँ, यह जानने से पहले तुम्हें यह जानना होगा कि तुमने क्या ढूँढ़ लिया है।"

अचानक गुफा की छत से छोटे-छोटे पत्थर गिरने लगे।

मीरा चिल्लाई, "यहाँ से निकलना होगा!"

उसी समय वह रहस्यमयी व्यक्ति बिजली जैसी फुर्ती से आगे बढ़ा। कबीर ने पास पड़ी लकड़ी उठाकर उसका रास्ता रोका। दोनों के बीच कुछ पल तक संघर्ष हुआ, और उसी अफरातफरी में आर्यन ने सबको बाहर की ओर भागने का इशारा किया।

चारों गुफा से बाहर निकलकर पहाड़ी रास्ते पर दौड़ पड़े।

पीछे से तलवार चट्टानों से टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं।

कुछ मिनट बाद वे एक खड़ी चट्टान के किनारे पहुँच गए।

आगे गहरी खाई...

पीछे वह रहस्यमयी आदमी...

"अब भागोगे कहाँ?" उसने कहा।

तभी सिया की नज़र दाईं ओर लटकती हुई एक पुरानी रस्सी पर पड़ी। शायद कभी पर्वतारोहियों ने उसे बाँधा था।

"यही रास्ता है!"

एक-एक करके चारों रस्सी के सहारे नीचे उतरने लगे।

जैसे ही मुखौटा पहने आदमी ने उनका पीछा करना चाहा, रस्सी अचानक टूट गई।

वह ऊपर ही रह गया।

लेकिन जाने से पहले उसने ज़ोर से कहा—

"तुम जहाँ भी जाओगे... 'ऑर्डर ऑफ़ द ब्लैक आइल' तुम्हें ढूँढ़ निकालेगा!"

रात होने तक चारों एक छोटे से पहाड़ी गाँव पहुँच गए।

उन्होंने एक पुरानी सराय में कमरा लिया।

आर्यन ने बैग से नक्शा निकाला और मेज़ पर फैलाया।

अब तक जो सिर्फ़ फीकी रेखाएँ दिखाई दे रही थीं, वे धीरे-धीरे चमकने लगीं।

नक्शे पर एक नया रास्ता उभर आया...

और नीचे एक संदेश दिखाई दिया—

"पहला द्वार खुल चुका है। सात चाबियों में से पहली चाबी तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।"

कमरे की खिड़की के बाहर कोई खड़ा था।

उसने यह संदेश भी देख लिया था।

और उसके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी...

Continue