Impossible Ishq - Episode 13 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 13

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 13

एपिसोड 13
करीब एक घंटे का सफ़र तय करने के बाद बस आखिरकार लखनऊ के सबसे मशहूर सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मुख्य गेट पर आकर रुक गई।
बस रुकते ही सभी छात्रों की नज़रें खिड़की से बाहर चली गईं।
सामने कई मंज़िला शीशों से बनी विशाल इमारत खड़ी थी। गेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में अस्पताल का नाम लिखा था। अंदर एम्बुलेंस लगातार आ-जा रही थीं। सफेद कोट पहने डॉक्टर और नर्सें तेज़ी से अपने-अपने काम में व्यस्त थे।
रीवा ने हैरानी से कहा, "वाह... ये हॉस्पिटल तो हमारी सोच से भी बड़ा है।"
आयत ने चारों ओर देखते हुए धीमे से कहा, "सच में... यहाँ का माहौल ही अलग है।"
उधर अर्जुन बस से उतरा और एक नज़र पूरे अस्पताल पर डाली। उसके चेहरे पर वही आत्मविश्वास था, मानो वह किसी नई चुनौती के लिए तैयार हो।
तभी कॉलेज के सभी दस छात्रों को एक जगह इकट्ठा होने के लिए कहा गया।
कुछ ही देर बाद अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. आदित्य राठौर, वहाँ पहुँचे। लगभग पचास वर्ष के डॉ. राठौर की सख़्त लेकिन शांत छवि देखते ही सभी छात्र सीधे खड़े हो गए।
"वेलकम एवरीवन।"
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "इस अस्पताल में ट्रेनिंग के लिए चुना जाना आसान बात नहीं है। हर साल हज़ारों स्टूडेंट्स आवेदन करते हैं, लेकिन कुछ चुनिंदा छात्रों को ही यह अवसर मिलता है।"
सभी छात्र ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे।
"इस साल लखनऊ, कानपुर और आगरा के मेडिकल कॉलेजों से कुल तीस छात्रों का चयन हुआ है। अगले एक महीने तक आप सभी यहीं सीखेंगे, काम करेंगे और खुद को साबित करेंगे।"
इतना सुनते ही सभी के चेहरे पर उत्साह साफ़ दिखाई देने लगा।
डॉ. राठौर आगे बोले, "और एक बात..."
"इस ट्रेनिंग के अंत में जिस टीम का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहेगा, उसे अस्पताल की तरफ़ से 'बेस्ट क्लिनिकल टीम अवॉर्ड' दिया जाएगा। साथ ही उस टीम के सभी छात्रों को भविष्य में इंटर्नशिप के लिए विशेष प्राथमिकता मिलेगी।"
यह सुनते ही पूरे हॉल में हलचल मच गई।
रोहन के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।
"अब मज़ा आएगा... इस बार अर्जुन को हराकर ही रहूँगा।"
दूसरी तरफ़ अर्जुन बिल्कुल शांत खड़ा था। उसके लिए प्रतियोगिता से ज़्यादा ज़रूरी सीखना था।
कुछ देर बाद तीनों कॉलेजों की टीमें आमने-सामने खड़ी थीं।
डॉ. राठौर ने कहा, "अब मैं तीनों टीम लीडर्स का परिचय करवाना चाहता हूँ।"
"लखनऊ मेडिकल कॉलेज की टीम का नेतृत्व करेंगे... अर्जुन वशिष्ठ।"
तालियों की आवाज़ गूँज उठी।
अर्जुन आगे बढ़ा और सभी को हल्का-सा नमस्कार किया।
"कानपुर मेडिकल कॉलेज की टीम लीडर हैं... डॉ. समीहा सिद्दीकी।"
करीब बाईस साल की आत्मविश्वासी छात्रा आगे आई। उसकी आँखों में नेतृत्व का आत्मविश्वास साफ़ झलक रहा था।
"और आगरा मेडिकल कॉलेज के टीम लीडर हैं... अभिमन्यु राठौड़।"
तीनों टीम लीडर्स ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया।
समीहा मुस्कुराकर बोली, "उम्मीद है मुकाबला दिलचस्प रहेगा।"
अर्जुन ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, "मुकाबला सीखने का होना चाहिए... जीत तो मेहनत तय करेगी।"
अभिमन्यु हँस पड़ा।
"लगता है इस महीने मज़ा आने वाला है।"
दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था। उसके चेहरे पर मुस्कान तो थी, लेकिन दिल में जलन पहले से भी ज़्यादा बढ़ चुकी थी।
"हर जगह... हर बार... अर्जुन ही क्यों?"
उधर आयत की नज़र अनजाने में फिर अर्जुन पर चली गई।
उसे देखकर उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।
न जाने क्यों...
जब भी अर्जुन सामने होता था, उसे एक अजीब-सा सुकून महसूस होता था।
लेकिन दोनों में से किसी को भी अभी तक यह एहसास नहीं था...
कि यह एक महीने की ट्रेनिंग सिर्फ़ डॉक्टर बनने की शुरुआत नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कहानी की भी शुरुआत बनने वाली थी।