Impossible Ishq - Episode 15 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 15

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 15

एपिसोड 15 – साज़िश का पहला पर्दाफाश

जनरल मेडिसिन वार्ड का माहौल अचानक तनाव से भर गया था।

बेड नंबर 18 की मरीज फाइल गायब होने की वजह से पूरे स्टाफ में हलचल मच गई थी। नर्सें एक अलमारी से दूसरी अलमारी तक फाइलें ढूँढ़ रही थीं। डॉ. मीरा सक्सेना के चेहरे पर नाराज़गी साफ़ दिखाई दे रही थी।

उधर आयत की नज़र बार-बार अर्जुन पर जा रही थी।

उसे पूरा यक़ीन था कि अर्जुन ऐसी लापरवाही कभी नहीं कर सकता।

अर्जुन ने बिना घबराए पूरे रिकॉर्ड रूम को ध्यान से देखना शुरू किया। उसकी नज़र हर छोटी-सी छोटी चीज़ पर थी।

वह धीरे-धीरे रिकॉर्ड डेस्क तक पहुँचा।

उसने देखा कि बाकी सारी फाइलें क्रम से रखी हुई थीं, लेकिन एक अलमारी का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं था।

अर्जुन ने बिना कुछ कहे अलमारी खोली।

अंदर रखी फाइलों को एक-एक करके देखने लगा।

अचानक...

उसके हाथ में वही फाइल आ गई।

बेड नंबर 18।

अर्जुन ने फाइल उठाई और डॉ. मीरा की तरफ़ बढ़ गया।

"मैम... फाइल मिल गई।"

डॉ. मीरा ने राहत की साँस ली।

"लेकिन यह यहाँ कैसे पहुँची?"

अर्जुन शांत स्वर में बोला,

"मैम... यह अपनी जगह पर नहीं थी। किसी ने इसे दूसरी अलमारी में रख दिया था।"

पूरे वार्ड में कानाफूसी शुरू हो गई।

"क्या किसी ने जानबूझकर ऐसा किया है?"

"आख़िर क्यों?"

दूर खड़ा रोहन एक पल के लिए घबरा गया।

"इतनी जल्दी इसे कैसे मिल गई?"

लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया।

डॉ. मीरा ने कहा,

"जो भी हो... आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।"

"यस मैम।"

मामला वहीं शांत हो गया।

लेकिन अर्जुन के मन में एक सवाल रह गया—

"यह गलती नहीं थी... किसी ने जानबूझकर किया है।"

कुछ देर बाद सभी छात्र अपने-अपने काम में लग गए।

अर्जुन मरीजों की रिपोर्ट देख रहा था।

तभी एक बुज़ुर्ग मरीज को अचानक तेज़ खाँसी आने लगी।

आयत घबरा गई।

"अर्जुन...!"

अर्जुन तुरंत मरीज के पास पहुँचा।

उसने शांत स्वर में कहा,

"घबराइए मत अंकल... धीरे-धीरे साँस लीजिए।"

उसने नर्स को बुलाया और ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा।

आयत भी उसकी मदद करने लगी।

कुछ ही मिनटों में मरीज की हालत सामान्य हो गई।

बुज़ुर्ग मुस्कुराए।

"भगवान तुम दोनों को बहुत बड़ा डॉक्टर बनाए।"

आयत के चेहरे पर खुशी आ गई।

अर्जुन मुस्कुराया।

"धन्यवाद अंकल।"

दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।

हर बार अर्जुन की तारीफ़ सुनकर उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा था।

समर उसके पास आया।

"यार... तेरी पहली चाल भी बेकार गई।"

रोहन दाँत भींचकर बोला,

"अभी तो खेल शुरू हुआ है।"

"अब क्या करेगा?"

रोहन की नज़र आयत पर गई।

वह अर्जुन के साथ रिपोर्ट तैयार कर रही थी।

"अब ऐसा वार करूँगा कि अर्जुन खुद अपनी टीम के सामने शर्मिंदा हो जाएगा।"

दोपहर का समय हो चुका था।

सभी छात्र अस्पताल की कैंटीन में खाना खाने पहुँचे।

रीवा ने आयत को अपने पास बैठा लिया।

उधर अर्जुन गौरव और आरिफ़ के साथ बैठ गया।

लेकिन जैसे ही आयत ने पानी का गिलास उठाया...

उसका हाथ फिसल गया।

गिलास नीचे गिर गया।

आवाज़ सुनकर सबकी नज़र उसकी तरफ़ चली गई।

आयत थोड़ा घबरा गई।

तभी अर्जुन अपनी सीट से उठा।

उसने बिना कुछ कहे दूसरा गिलास भरकर आयत के सामने रख दिया।

"लीजिए..."

आयत ने उसकी तरफ़ देखा।

"थ... थैंक यू।"

"थैंक यू बोलने की आदत छोड़ दीजिए। टीम में हैं... एक-दूसरे की मदद करना हमारी ज़िम्मेदारी है।"

आयत मुस्कुरा दी।

यह छोटा-सा पल भी रोहन की आँखों में चुभ गया।

उधर दूसरी तरफ़...

इमरजेंसी यूनिट में सनाया पहली बार एक गंभीर मरीज को देखकर घबरा गई।

उसके हाथ काँपने लगे।

तभी करण उसके पास आया।

"अगर डरोगी... तो डॉक्टर कैसे बनोगी?"

सनाया ने झुँझलाकर कहा,

"मैं नहीं डर रही।"

"अच्छा? तो फिर हाथ क्यों काँप रहे हैं?"

सनाया ने तुरंत अपने हाथ पीछे कर लिए।

"तुम्हें उससे क्या?"

करण मुस्कुरा दिया।

"कुछ नहीं... बस इतना कि अगर मदद चाहिए हो तो बोल देना।"

"मुझे तुम्हारी मदद की ज़रूरत नहीं है।"

"ठीक है... लेकिन जब होगी, मैं मना भी नहीं करूँगा।"

इतना कहकर करण वहाँ से चला गया।

सनाया उसे जाते हुए देखती रह गई।

"अजीब लड़का है..."

लेकिन उसके चेहरे पर अनजाने में मुस्कान आ गई।

शाम होने लगी थी।

पहले दिन की ट्रेनिंग लगभग खत्म हो चुकी थी।

सभी छात्र बाहर निकल रहे थे।

तभी अर्जुन को लगा जैसे कोई उसे लगातार देख रहा है।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

दूर कॉरिडोर में रोहन खड़ा था।

दोनों की नज़रें मिलीं।

रोहन हल्का-सा मुस्कुराया।

वह मुस्कान दोस्ती की नहीं...

एक नई साज़िश की शुरुआत की थी।

अर्जुन भी सब समझ रहा था।

उसने मन ही मन तय कर लिया—

"अगर यह सच में कोई खेल खेल रहा है... तो अब मैं भी हर कदम पर नज़र रखूँगा।"

उधर आयत चुपचाप अर्जुन को देख रही थी।

उसे महसूस हो रहा था कि अर्जुन बाहर से जितना शांत दिखता है, उसके भीतर उतनी ही बड़ी लड़ाई चल रही है।

उसे नहीं पता था...

कि आने वाले दिनों में यह लड़ाई सिर्फ़ अर्जुन और रोहन के बीच नहीं रहेगी।

इसमें उसके अपने दिल का भी इम्तिहान होने वाला था।